रघुनाथ नेगी ने मुख्य सचिव से की विजिलेंस जांच कराने की मांग
जालसाजों को किसी भी सूरत में नहीं छोडें़गे
देहरादून(संवाददाता)। विकासनगर विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत पूर्व सरकार में हुये सैकडो करोड रूपये के टेंडर घोटाले का खूब शोर मचा था और उसके बाद इस घोटाले की जांच शासन ने विजिलेंस से कराई थी लेकिन इस मामले में कथित मिलीभगत कर कुछ जुर्माना लगाकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया था ऐसा आरोप अब जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष ने सीधेतौर पर लगाकर विजिलेंस को भी कटघरे में लाकर खडा कर दिया है। अब इस घोटाले को लेकर मोर्चा अध्यक्ष ने शासन में दस्तक दी और मुख्य सचिव से रूबरू होकर उनके पाले में गेंद डालते हुए मामले की जांच विजिलेंस से कराने की मांग उठा दी और साफ कहा कि एक दिन में दो तरह के अखबार जालसाजों ने छाप डाले थे और एक साजिश के तहत अधिकारियों, ठेकेदारों और समाचार एजेंसी ने मिलकर सरकार को लाखों रूपये का चूना लगा दिया था। मोर्चे ने साफ अल्टीमेटम दिया है कि वह जालसाजों को किसी भी सूरत में छोडेगा नहीं।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्य सचिव आनंद बर्धंन से मुलाकात कर विकासनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत वर्ष 2017-18 में लगभग 2.25 करोड रुपए के टेंडर घोटाले, जिसमें पूर्व में विजिलेंस जांच की सिफारिश शासन द्वारा की गई थी, लेकिन मामले में मिलीभगत कर मात्र 50,948 जुर्माना लगाकर मामला रफा दफा कर दिया गया था, के मामले में विजिलेंस जांच कराने का आग्रह किया, जिस पर मुख्य सचिव ने सचिव, लोक निर्माण विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिये।
नेगी ने कहा कि वर्ष 2017-18 में विकास नगर क्षेत्र के आठ निर्माण कार्यों के टेंडर हासिल करने की दिशा में नेता के निर्देशन में ठेकेदारों द्वारा अधिकारियों व समाचार एजेंसी को अपनी साजिश में शामिल कर टेंडर गुपचुप तरीके से आधे प्रतिशत से भी कम दर पर हासिल कर लिए। यहां एक प्रकार का बहुत ही दिलचस्प खेल खेला गया, जिसके द्वारा एक ही दिन में एक ही समाचार पत्र के दो तरह के पृष्ठ प्रकाशित किए गएय एक में टेंडर छपाया गया तथा दूसरे में टेंडर प्रकाशित नहीं हुआ। अगर टेंडर प्रकाशित होता तो 25 से 35 फीसदी तक बिलो दर पर टेंडर स्वीकृत होता। नेता द्वारा ही उक्त कार्यों को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित करने के लिए हाथ पर मारे गए थे, जिससे अपने गुर्गों को ठेका दिलवा सके। मोर्चा इस घोटाले का पर्दाफाश करने को लेकर सात-आठ साल से संघर्षरत है,जिसमें मुख्य सूचना आयुक्त के आदेश आठ फरवरी 2018, मुख्य सचिव के आदेश सत्रह मई 2018 व दस जनवरी 2018 मुख्यमंत्री के आदेश तीन नवम्बर 2022, सतर्कता जांच कराने संबंधी सिफारिश के आदेश दिनांक सत्रह जून 2020 के क्रम में कार्रवाई की गई थी, लेकिन नेता द्वारा विभागीय अधिकारियों के आगे नतमस्तक होने के चलते मात्र 50,948 रुपए जुर्माना लगाकर मामला रफा दफा कर दिया गया था। मोर्चा जालसाजों को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेगा।
