राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को लिखा खत

0
119

न करें सैन्य धाम का उद्घाटन
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। राजधानी के एक अधिवक्ता ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को खत लिखा है कि भ्रष्टाचार एवं राष्ट्रधन की लूट के केन्द्र सैन्य धाम का उद्घाटन तब तक न करें जब तक इसमें लिप्त भ्रष्टाचारियों को दण्ड न मिले तथा उनसे राष्ट्र सम्पदा की वसूली न कर ली जाये। अधिवक्ता ने जिस तरह से सैन्य धाम को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को खत लिखा है उससे उत्तराखण्ड की राजनीति में एक बडी हलचल मचने की आशंकायें प्रबल हो गई हैं।
राजधानी के अधिवक्ता विकेश नेगी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि आपसे निवेदन है कि आप हमारे राष्ट्र के प्रथम नागरिक तथा महामहीम हैं, अतः सर्व साधारण की जिम्मेदारी है कि आपके संज्ञान में यह लाया जाये कि देहरादून में बन रहे जिस सैन्य धाम के उद्घाटन हेतु आप आ रहे हैं वह पूर्णतः भ्रष्टाचार के तहत उत्तराखण्डियों के जंगल और जमीन तथा राष्ट्र के धन की चोरी का एक सर्वोच्च केन्द्र बना हुआ है जिसका विरोध पूरे प्रदेश की जनता वर्षभर से कर रही है। ऐसे में आपको अंधेरे में रख सैन्य धाम का अपके कर कमलो से उद्घाटन हमारे प्रदेश के लोगों से भ्रष्टाचार से लडने के आपके आदेश एवं स्वप्न के तहत किये जाने वाले प्रयासों पर घोर आघात होगा। अधिवक्ता ने लिखा कि मान्यवर आपके संज्ञान हेतु इस भ्रष्टाचार के सम्पूर्ण तथ्यों का सारांश इस पत्र के साथ संलग्न कर प्रेषित किया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि आपसे निवेदन है कि भ्रष्टाचार एवं राष्ट्रधन की लूट के केन्द्र सैन्य धाम का उद्घाटन तब तक न करें जब तक इसमें लिप्त भ्रष्टाचारियों को दंड न मिले तथा उनसे राष्ट्र सम्पदा की वसूली न कर ली जाये।
वहीं प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में भी अधिवक्ता विकेश नेगी ने कहा है कि आप हमारे राष्ट्र के सर्व सम्मानित प्रधानमंत्री, नेता एवं जनप्रतिनिधि हैं, अतः यह सर्वसाधारण की जिम्मेदारी है कि आपके संज्ञान में यह लाया जाये कि देहरादून में बन रहे जिस सैन्य धाम के उद्घाटन करने हेतु आप आ रहे हैं, वह पूर्णतः भ्रष्टाचार के तहत उत्तराखण्डियों के जंगल व जमीन तथा राष्ट्र धन की चोरी का सर्वोच्च केन्द्र बना हुआ है जिसका विरोध पूरे प्रदेश की जनता वर्षभर कर रही है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि आपको अंधेरे मे रख सैन्य धाम का आपके कर कमलों से उद्घाटन हमारे प्रदेश के लोगों से भ्रष्टाचार से लडने के आपके एवं स्वप्न के तहत किये जाने वाले प्रयासों पर घोट आघात होगा। प्रधानमंत्री को लिखे खत में कहा गया है कि आपके संज्ञान हेतु इस भ्रष्टाचार के सम्पूर्ण तथ्यों का सारांश इस पत्र के साथ संलग्न कर प्रेषित किया जा रहा है अतः आपसे करवद्ध निवेदन है कि भ्रष्टाचार एवं राष्ट्र धन की लूट का केन्द्र सैन्य धाम का उद्घाटन तब तक न करें जब तक इसमें लिप्त भ्रष्टाचारियों को दंड न मिले तथा उनसे राष्ट्र सम्पदा की वसूली न कर ली जाये।
अधिवक्ता ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे खत में उन दस्तावेज को भी संलग्न किया हैं जिसके तहत अधिवक्ता सैन्य धाम में भ्रष्टाचार का खुलकर आरोप लगा रहे हैं।

LEAVE A REPLY