2027 फतह करंेगे धुरंधर!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। चार साल बेमिसाल के समारोह में मुख्यमंत्री को कर्मठ और शानदार मुख्यमंत्री होने का ताज पहनाया गया तो उसके बाद से ही राज्य की जनता बोलने लगी है कि धाकड़ से धुरंधर बने मुख्यमंत्री ने 2027 का चुनावी रण जीतने के लिए अभी से ही गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। तीसरी बार राज्य के अन्दर कमल खिलाने के लिए अभी से ही देश के प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को चुनावी रणभूमि में आगे कर दिया है तो वहीं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बडे बहुमत से राज्य के अन्दर सरकार बनाने का टास्क सौंप दिया है। उत्तराखण्ड में लम्बे समय से अफवाहबाजी का दौर चल रहा था कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चुनाव नहीं होगा लेकिन भाजपा हाईकमान ने दो टूक कह दिया है कि विधानसभा चुनाव धामी के चेहरे पर लडा जायेगा और वह राज्य के अन्दर एक बार फिर भाजपा की सरकार बनाकर उत्तराखण्ड को विकास के पथ पर तेजी के साथ आगे ले जायेंगे।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वच्छता के साथ चल रही राजनीतिक पारी को देखकर उनके सपने चूर-चूर होते जा रहे हैं जो हमेशा एक बडी कुर्सी पाने के लिए मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखते आ रहे हैं। दिलेर की तरह सत्ता चला रहे मुख्यमंत्री से भले ही दिल्ली में भाजपा के तमाम दिग्गज उनकी सत्ता चलाने की स्टाईल के कायल हो रखे हों लेकिन कुछ सफेदपोश अफवाहों का भौपू राज्यभर में बजाते आ रहे हैं लेकिन इनके भौपू से जो स्वर निकल रहे हैं उसे सुनकर लोग भी ठहाके मार रहे हैं कि अफवाहबाजो कब तक अफवाहों की हवा उडाकर लोगों को असमंजस में डालते रहोगे? अब तो राज्य की जनता भी मानने लगी है कि अफवाहबाजों को शायद इस बात का इल्म नहीं है कि जिन अफवाहों को उडाकर वह खुश हो रहे हैं वह सिर्फ और सिर्फ एक झूठ के पुलिंदे से ज्यादा कुछ नहीं है क्योंकि भाजपा हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी को अभी से ही मिशन 2027 फतेह करने का टास्क सौंप दिया है।
उत्तराखण्ड में अगर जनमत संग्रह करा लिया जाये तो उससे भी पता चल जायेगा कि बाइस सालों में जितने भी पूर्व मुख्यमंत्री सत्ता पर काबिज रहे हैं उनसे पुष्कर सिंह धामी का राजनीतिक वजूद उनके चार साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल मंे कितना विशाल हो चुका है। उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपने आपको उत्तराखण्ड का राजा ही समझा और उन्होंने हमेशा आवाम से दूरी बनाकर ही रखी जिसके चलते आवाम अपने आपको ठगा सा महसूस करता रहा कि उन्होंने ही मुख्यमंत्री बनाया है तो फिर कुर्सी पर बैठकर कोई भी मुख्यमंत्री क्यों आवाम से दूरी बना लेता है? वहीं पुष्कर सिंह धामी ऐसे मुख्यमंत्री बन गये जिन्होंने सत्ता पर बैठते ही अपने आपको आवाम का सेवक माना और उन्होंने जिस दरियादिली से सत्ता चलाने के लिए अपने कदम आगे बढाये वैसे दृश्य सिर्फ फिल्मों में ही दिखाई देते हैं लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने धरातल पर एक महानायक की भूमिका में आकर सत्ता चलाने के लिए अपने कदम आगे बढाये उससे राज्यवासियों के मन में कोई भी ऐसा भय दिखाई नहीं देता जो कुछ पूर्व सरकारों में उन्हें दिखाई देता था? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में अभी तक ऐसा देखने को नहीं मिला कि पुलिस के आला अफसरों ने अगर कोई अभियान चलाया तो उसमें वाहवाही लूटने के लिए किसी निर्दोष को सलाखों के पीछे पहुंचाया हो? मुख्यमंत्री ने जबसे अपनी दूसरी पारी की शुरूआत की है तबसे काफी सफेदपोश और मीडिया का एक सिंडिकेट इसलिए भी डरा और सहमा हुआ नजर आ रहा है कि पुष्कर राज में उनके गलत धंधे परवान नहीं चढ पा रहे हैं इसी के चलते वह सरकार के मुखिया को लेकर बंद कमरों में अफवाहों का भौपू बजा रहे हैं और इस भौपू के सहारे वह खूब उछलकूद कर रहे हैं। गजब की बात यह है कि इन अफवाहबाजों को इस बात का इल्म ही नहीं है कि मोदी के सखा पुष्कर सिंह धामी की स्वच्छ साख दिल्ली में भाजपा के बडे-बडे नेताओं को खूब भा रही है और उनकी एक ही इच्छा है कि पुष्कर सिंह धामी जो कि एक युवा नेता हैं वह उत्तराखण्ड को देश का आदर्श राज्य बनाने की दिशा में आगे बढते जायें और जो लोग अफवाहबाजी का भौपू बजा रहे हैं उनका भौपू समय आने पर अपने आप ही फट जायेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिस विश्वास के साथ सरकार चला रहे हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि वह मिशन 2027 को फतह करने के लिए अभी से ही एक विजन के तहत समूचे राज्य में राजनीतिक गोटियां बिठाने में लग गये हैं?
