नगर पंचायत के तत्कालीन ईओ को सजा

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उधमसिंहनगर। विजिलेंस ने जम्मू कश्मीर में तैनात एक सेना कर्मचारी से मकान बनाने के रिश्वत के रूप में बीस हजार रूपये लिये थे जिस पर विजिलेंस ने ईओ को रंगे हाथो गिरफ्तार किया था। विजिलेंस की कडी पैरवी के चलते आखिरकार तत्कालीन ईओ को भ्रष्टाचार के इस मामले में सजा हुई है। शिकायतकर्ता सआदत हुसैन पुत्र स्व. मो.हनीफ निवासी वार्ड नम्बर-4 केलाखेड़ा तहसील बाजपुर जिला ऊधम सिंह नगर ने पत्र सर्तकता अधिष्ठान सेक्टर हल्द्वानी में 24 मई .2०12 को दिया गया कि प्रार्थी आर्मी में जम्मू-कश्मीर में तैनात है तथा प्रार्थी के पास एक बीघा 13 बिस्वा जमीन केलाखेड़ा में है, जिसमें वह संयुक्त परिवार के साथ रहता था।
पत्र में कहा गया कि इस जमीन पर पक्का निर्माण कराने के लिए नगर पंचायत केलाखेड़ा के ईओ संजीव मेहरोत्रा से दिनांक 26 अप्रैल 2०12 को उनके कार्यालय में मिला तो उनके द्वारा कहा गया कि केलाखेडा में सभी मकान बिना नक्शे के बने है, यदि कुछ खर्चा करो तो अपना मकान बना लो तथा बीस हजार रूपये रिश्वत की मांग की गयी। इसके पश्चात मकान का कार्य प्रारम्भ कर दिया, रूपये न देने के कारण समय-समय पर ईओ संजीव महरोत्रा द्वारा मुझे पैसों के एवज में प्रताडि़त किया जा रहा है। इस सम्बन्ध में सर्तकता अधिष्ठान द्वारा जाँच करायी गयी तथा निरीक्षक तिलक राम वर्मा के नेतृत्व में टीम गठित की गयी। इस दौरान 26 मई .2०12 को रूद्रपुर में आरोपी संजीव महरोत्रा को शिकायतकर्ता सआदत हुसैन से रिश्वत लेते हुये ट्रैप टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया तथा सर्तकता अधिष्ठान सेक्टर हल्द्वानी में 26 मई .2०12 को मुअसं ०1/2०12 धारा 7/13 (1), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम पंजीकृत किया गया। अभियोग की विवेचना निरीक्षक राजेन्द्र सिंह हयांकी द्वारा सम्पादित कर आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया गया।
अभियोजन की कार्यवाही के दौरान अभियोजन अधिकारी सुश्री सुनीता भट्ट द्वारा न्यायालय के समक्ष सात गवाहों को परीक्षित कराया गया। अभियोग में केस आफिसर निरीक्षक हेम चन्द्र पाण्डे तथा कोर्ट पैरोकार कानि. राजेन्द्र सिंह मेहरा थे। न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, प्रथम, विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण, हल्द्वानी, नैनीताल सविता चमोली की अदालत द्वारा आठ सितम्बर 2०25 को अभियुक्त संजीव महरोत्रा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा सात के अपराध में एक वर्ष के साधारण कारावास तथा दस हजार रूपय के अर्थदण्ड तथा धारा 13 (1) (डी) सपठित धारा 13 (2) भ्रनिअधि के अपराध में दो वर्ष के साधारण कारावास तथा अर्थदण्ड रूपये दस हजार रूपये कुल तीन वर्ष के कारावास एवं बीस हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।

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