सीएम साहब: राजधानी में एक नया शहर बसाओ

0
157

प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद राजधानी को एक नये रूप मे ढालने के लिए शुरूआती दौर मे ही मिशन शुरू हुआ था और उस दौरान शहर को सुन्दर बनाने के बडे-बडे दावे किये गये लेकिन यह दावे धरातल पर आवाम के दिलों को नहीं जीत पाये और उस दौरान भी यह बहस चली कि आखिरकार शहर तो आज भी वैसे का वैसा है तो फिर राजधानी को नया रूप देने के लिए जो हजारों करोड रूपये खर्च किये गये थे वह आखिर हुये कहां खर्च थे? शहर की वही सडकें, शहर का वही हाल आवाम देखती रही और जब अस्थाई राजधानी के शहर को स्मार्ट शहर बनाने के लिए हजारों करोड रूपये खर्च होने शुरू हुये तो ऐसा आभास हो रहा था मानो दून का शहर एक नया स्वरूप लेकर आयेगा और उस स्मार्ट शहर को देखकर उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देश-विदेश से आने वाले लोग भी आश्चर्यचकित होंगे। त्रिवेन्द्र रावत राज में शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का सिलसिला शुरू हुआ था उससे ऐसा आभास हो रहा था मानो शहर एक नये रंग-रूप मे दिखाई देगा लेकिन शहर तो कभी स्मार्ट बन ही नहीं पाया और सोशल मीडिया पर हमेशा आवाम इस स्मार्ट सिटी को लेकर अकसर अपनी नाराजगी प्रकट करता हुआ दिखाई देता रहा? एक ही बरसात मे जिस तरह से शहर की सडकें जलमग्न हो जाती हैं वह किसी से छिपा नहीं है और शहर आज भी उसी रूप मे देखने को मिल रहा है जैसा पुराने दौर मे देखने को मिलता था, हां शहर की कुछ रूपरेखा और सडकों के किनारे दीवारों पर जरूर रंगीन पेंटिंग आवाम को देखने को मिली लेकिन शहर मे आज भी जाम का झाम आवाम को खूब रूलाता है तो वहीं शहर मे पार्किंग के आभाव से अकसर शहरवासियों और बाहर से आने वाले यात्रियों को भी काफी कठिनाईयों का सामना करना पड रहा है। अब राजधानी के अन्दर यह बहस चल रही है कि सीएम साहब दून को सुन्दर बनाने के बजाए एक अलग शहर बसाया जाये जो कि उत्तर प्रदेश के नोएडा के तर्ज पर विकसित हो और आवाम को लगे कि अब राजधानी मे भी एक नया शहर मुख्यमंत्री ने बसा दिया है जिसकी पुन: एक लम्बे अर्से से उम्मीद बनी हुई थी।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य को एक नई उडान पर ले जाने के लिए तेजी के साथ आगे बढ रहे हैं और उन्होंने गढवाल व कुमांऊ में विकास का जो नया दौर शुरू किया है वह राज्यवासियों से लेकर बाहर से आने वाले पर्यटकों व श्रद्धालुओं को भी खूब रास आ रहा है। मुख्यमंत्री 2०25 तक उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के विजन पर आगे बढे हुये हैं और उनकी चाहत है कि उत्तराखण्ड विकास की उस उडान पर उडता चला जाये जिसका सपना राज्यवासी चौबीस साल से देखते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य के पर्यटन और तीर्थाटन को एक नई पहचान देने का जो सिलसिला शुरू किया है वह उत्तराखण्डवासियों को तो खूब रास आ रहा है साथ मे उन पर्यटकों व श्रद्धालुओं को भी उत्तराखण्ड अब बदलता हुआ नजर आने लगा है जो उत्तराखण्ड को एक नई उडान पर उडते हुए देखने की तमन्ना वर्षों से पाले हुये थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राजधानी को एक नया रूप देने के लिए लम्बे समय से बडे विजन के साथ काम कर रहे हैं और वह शहर को नये दून के रूप में विकसित करने का भी संकल्प ले रहे हैं लेकिन राजधानीवासियों का मानना है कि मुख्यमंत्री को अब एक नया शहर उत्तर प्रदेश के नोएडा के तर्ज पर विकसित करना चाहिए जिससे कि देहरादून शहर का लोड कम हो सके और जिस नये शहर को बसाया जाये वहां न पार्किंग की कोई कमी हो और न ही सीमित सडकें दिखाई दें जिससे कि सडकों पर अकसर जाम की स्थिति दिखाई दे। एक नये शहर को स्मार्ट शहर के रूप मे बसाने का मिशन मुख्यमंत्री करें ऐसी चाहत अब राजधानीवासी भी पाल रहे हैं और उनका कहना है कि स्मार्ट दून बनाने का जो दौर चला था वो तो अब खत्म हो चुका है क्योंकि अब शहर की सडकें न तो बडी की जा सकती हैं और न जगह-जगह पार्किंग की ऐसी व्यवस्था हो सकती है जिससे कि किसी को भी पार्किंग की समस्या से न झूझना पडे?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बडी सोच के राजनेता हैं और उनसे उत्तराखण्डवासियों को एक बडी उम्मीद है कि वह देहरादून में एक नया शहर ऐसा बसायें जो नोएडा की तर्ज पर विकसित हो और उसे देखकर हर कोई यह कहे कि हां देहरादून मे भी एक नया शहर बस गया है जो सपनों के शहर की तरह नजर आता है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी राजधानी में एक नये शहर को बसाने के लिए बडे विजन के साथ अपने कदम आगे बढायेंगे?

LEAVE A REPLY