धामी चाहते हैं जनता का सेवक ही बने मेयर का उम्मीदवार

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है और चुनाव लडने के लिए सभी राजनीतिक दलों के हर दूसरे नेता के मन में जो उमंग दौड रही है उसे देखते हुए कांग्रेस व भाजपा के दिग्गज नेताओं के माथे पर जरूर चिंता की लकीरें पडी होंगी? दोनो राजनीतिक दलों में मेयर व नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लडने के लिए दर्जनांे राजनेताओं मंे एक बडी होड लगी हुई है और सभी राजनेता पार्टी नेताओं के सामने अपनी उम्मीदवारी का डंका बजा रहे हैं जिससे दोनो राजनीतिक दलों में पार्टी उम्मीदवारों के चयन को लेकर एक बडा महामंथन चल रहा है। उत्तराखण्ड में निकाय चुनाव में कमल खिलाने के लिए मुख्यमंत्री एक जोश के साथ पार्टी नेताओं को जीत का झंडा थमा रहे हैं तो वहीं चर्चा है कि धामी चाहते हैं कि जनता का सेवक ही मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष का उम्मीदवार बने। मुख्यमंत्री भाजपा संगठन के साथ मिलकर उम्मीदवारों के चयन को लेकर महामंथन मे जुटे हुये हैं तो वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता भी पार्टी उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक गुणा भाग कर रहे हैं और पार्टी के अन्दर से यह आवाज भी उठ रही है कि इस चुनाव में उन्हें भी मौका दिया जाये जिन्होंने अभी तक किसी भी चुनाव मंे उम्मीदवार बनने के लिए ताल नहीं ठोकी थी?
चुनाव आयोग ने उत्तराखण्ड के अन्दर निकाय चुनाव को लेकर अब अपना फैसला सुना दिया था और उसके बाद से ही राज्य के अन्दर निकाय चुनाव का बडा बिगुल बज गया था। निकाय चुनाव में मात्र एक माह का समय बचा है क्योंकि 23 जनवरी को मतदान कराने का आयोग ने आदेश दिया है ऐसे मे दोनो राजनीतिक दलों के सामने अपने पार्टी प्रत्याशियों के चयन को लेकर अब एक बडी होड़ जरूर मचेगी क्योंिक जब प्रत्याशियों के नाम की घोषणा होगी तभी वह चुनाव मैदान में उतरकर अपने पक्ष में प्रचार प्रसार करने के लिए आगे बढेंगे। निकाय चुनाव की आहट से ही भाजपा व कांग्रेस के दर्जनों नेताओं ने अपनी दावेदारी ठोकने का बिगुल बजा रखा है और सोशल मीडिया पर भी उनकी चाहत सामने आ चुकी है कि वह चुनाव लडने के लिए किस कदर बेताब हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड में निकाय चुनाव को लेकर पहले से ही अलर्ट मोड मे दिखाई दे रहे हैं और कुछ समय पूर्व दिल्ली से भाजपा के एक बडे नेता ने राज्य के सभी भाजपा नेताओं को निकाय चुनाव में कमल खिलाने का आदेश दिया था और कहा था कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार बेहतर काम कर रही है। मुख्यमंत्री इन चुनाव में भी हर तरफ कमल खिलाने के मिशन पर बडा मंथन और चिंतन कर रहे हैं और उसी को देखते हुए यह चर्चाएं भी जन्म ले रही हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चाहते हैं कि जनता का सेवक ही मेयर व नगर पालिका अध्यक्ष का उम्मीदवार बने। मुख्यमंत्री भाजपा संगठन के बडे पदाधिकारियों से पार्टी उम्मीदवारों के चयन को लेकर जल्द ही बडा महामंथन कर अपने उम्मीदवारों के नामों पर अपनी मोहर लगायेंगे। भाजपा के अन्दर चुनाव लडने वालों की एक लम्बी कतार मेयर पद के लिए दिखाई दे रही है और वह सोशल मीडिया पर मौजूदा दौर में जिस तरह अपने पक्ष में माहौल बनाते हुए नजर आ रहे हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि भाजपा के लिए अपने उम्मीदवारों के चयन को लेकर बडी माथापच्ची करनी पडेगी क्योंिक उम्मीदवारों के नामों की घोषणा होने के बाद चुनाव लडने की ललसा रखने वाले कुछ नेता अपनी नाराजगी भी दिखाते हुए नजर आ सकते हैं? वहीं कांग्रेस की ओर से भी मेयर का चुनाव लडने के लिए काफी नेताओं में एक होड देखे जा रही है और सभी चाहते हैं कि पार्टी उन्हें अपना उम्मीदवार बनाये क्योंकि वह वर्षों से पार्टी का झंडा डंडा उठाकर पार्टी को मजबूत कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों तेजी के साथ राजधानी में भाजपा के सम्भावित उम्मीदवार के नाम को लेकर काफी हो हल्ला मच रहा है और कई राजनेताओं के नामों पर सम्भावना जताई जा रही है कि पार्टी किसे अपना उम्मीदवार बना सकती है हालांकि यह सब तो अभी कयास ही हैं क्योंकि भाजपा का महामंत्र है कि वह ऐसे राजनेता को चुनाव मैदान मे उतारे जिसकी छवि सेवक के रूप में हो और आवाम उसे पसंद करता हो ऐसे मे अब देखने वाली बात होगी कि भाजपा और कांग्रेस कब तक निकाय चुनाव में अपने प्रत्याशियों के नामों का खुलासा कर उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी।

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