सीएम साहब राजधानी मे ही इंतहा कर रहे भू-माफिया

0
186

माफियाओं से डरे आवाम को धामी से ही उम्मीद
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में भूमाफियाओं का वर्चस्व किसी से छुपा नहीं है और हर सरकार के कार्यकाल में आवाम को अफसरों के कार्यालयों में यही दर्द बयां करते हुए देखा जा रहा है कि उनकी जमीन पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है और सिस्टम ऐसे भूमाफियाओं की नाक मे सख्ती के साथ कभी भी नकेल डालने मे सफल नहीं हो पाया है? मुख्यमंत्री ने सत्ता संभालने के बाद साफ अल्टीमेटम दिया था कि भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी और जो भूमाफिया लोगों की जमीनों पर कब्जा करता हुआ पाया गया उसके खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जायेगा। हैरानी वाली बात है कि राजधानी में भूमाफियाओं के मन मे सरकार का कोई डर देखने को नहीं मिल रहा है और आये दिन सिस्टम के कुछ अफसरों के पास लोग अपना दर्द लेकर जा रहे हैं कि उनकी जमीनों पर कब्जा हो रखा है और उनके कब्जों को खाली कराया जाये। गजब की बात है कि राजधानी में अगर आज भी कब्जों का खेल हो रहा है तो यह सरकार के लिए भी एक चिंता का विषय होना चाहिए। अगर किसी की जमीन के गेट का ताला तोडकर कोई उसे अपना बताने का रौब गालिब करे तो उससे समझा जा सकता है कि जमीन कब्जाने के लिए किस तरह से दबंगता का तांडव चल रहा है? अब तो यह बात भी उठने लगी है कि सीएम साहब राजधानी में ही भूमाफिया लोगों की जमीने कब्जाने का शातिराना खेल खेलकर इंतहा कर रहे हैं और भूमाफियाओं से डरे आवाम को अब उनसे ही एक उम्मीद है इसलिए अगर जिला प्रशासन तत्काल एक कमेटी गठित कर जमीन की नापतोल कराकर भूमाफियाओं पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करे तो भूमाफियागिरी का जरूर अंत हो जायेगा?
उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी में जमीनें कब्जाने का खेल वर्षों से भूमाफिया करते आ रहे हैं और उसके चलते जमीनों के मालिकों में एक डर की भावना बनी हुई है कि आखिरकार वह अपनी कमाई की खरीदी गई जमीनांे को कैसे भूमाफियाओं से बचायें यह उनके लिए बडी चुनौती है? उत्तराखण्ड के कई जनपदांे में भूमाफियागिरी का खुला खेल देखकर कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में गढवाल और कुमांऊ मे डीआईजी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था जहां अकसर लोगों की कतारें लगी रहती थी कि उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया गया है या फिर किसी की जमीन बताकर उनके साथ लाखों की ठगी कर ली गई है। एसआईटी का गठन होने के बाद भी राजधानी के अन्दर अकसर भूमाफियाओं का खुला तांडव देखने को मिलता था और कई थाने चौकियों में भूमाफियाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमें यह बताने के लिए काफी हैं कि किस तरह से राजधानी के अन्दर भूमाफियाओं का भौकाल दिखाई देता रहा है? राजधानी के नये डीएम सविन बसंल ने जनपद में भूमाफियागिरी का अंत करने के लिए खुद मोर्चा संभाल रखा है और उनके पास जिस तरह से जमीनों पर कब्जांे को लेकर शिकायतें आ रही हैं उससे समझा जा सकता है कि अभी भी भूमाफियाओं के हौसले कितने बुलंद है कि वह एक आम इंसान की जमीनों पर कब्जे करने से बाज नहीं आ रहा है।
प्रेमनगर के गुरमेल सिंह नामक एक व्यक्ति ने डीएम को एक शिकायत दी कि उसकी आरकेडिया ग्रांट मे भूमि है और उस भूमि के खसरा और खाता नम्बर को भी अंकित करते हुए बताया कि उसने यह भूमि 2006 में क्रय की थी जिस पर बांउड्री वॉल और गेट लगा रखा है। शिकायत मे कहा गया कि तेइस दिसम्बर को बीनी देवी व उसका पुत्र संदीप असवाल एवं देवर रमेश असवाल ने उसकी बाउंड्री वॉल मे लगे गेट का ताला तोडकर उसके अन्दर कब्जे की नियत से तीन-चार ट्रोली बजरी की डाल दी और उसने जब इन लोगों से वहां बजरी डालने को लेकर सवाल पूछा तो वह कहने लगे कि यह भूमि उन्होंने खरीद ली है जबकि गुरमेल सिंह का कहना है कि उसने यह भूमि किसी को बेची ही नहीं है और यह भूमि तो उसकी है इस पर उसे वहां धमकाया गया। गुरमेल ने कहा कि जमीन को जबरदस्ती यह लोग कब्जाना चाह रहे हैं और भूमि के सभी समस्त दस्तावेज उसके पास हैं और जमीन की रजिस्ट्री भी उसी के नाम है। गुरमेल सिंह ने डीएम को दी शिकायत मे कहा है कि वह 70 वर्ष का कमजोर व्यक्ति है इसलिए उसकी जानमाल की रक्षा की जाये और उसे भयमुक्त होकर अपनी जमीन पर जाने दिया जाये जिससे वह वहां काम करा सके। डीएम ने इस शिकायत पत्र को राजधानी के एसपी सिटी को जांच के लिए भेजा है।
अब सवाल यह है कि ऐसे मामलों में जिला प्रशासन को एक कमेटी का गठन करना चाहिए और जमीनों पर हुये कब्जों को लेकर एक हफ्ते के अन्दर ही जमीन के दस्तावेज और उसकी नपाई कराकर पीडित को न्याय दिलाना चाहिए जिससे कि ऐसे मामलों पर नकेल लग सके और जो व्यक्ति किसी की जमीन पर कब्जा करते हुए पाया जाये उसके खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाये जिससे कि भूमाफियाओं की नाक मे नकेल डाली जा सके।

जमीन से चले जाओ वरना कपडे फाडकर लिखवाउंगी मुकदमा
देहरादून। कितनी गजब की बात है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन पर हो रहे कब्जे को लेकर मौके पर जाये और वहां कब्जा करने वाली कोई महिला हो और वह जमीन मालिक को यह धमकी दे कि वह जमीन से बाहर नहीं गया तो वह अपने कपडे फाडकर पुलिस मे उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा देगी तो यह ब्लैकमेलिंग की एक इंतहा नहीं है तो और क्या है?
डीएम को प्रेमनगर निवासी 70 वर्षीय गुरमेल सिंह ने अपना दर्द बयां किया कि प्रेमनगर आरकेडियाग्रांट मे उनकी भूमि है और उस पर बाउंड्री वॉल तथा गेट लगा रखा है लेकिन एक महिला बीनी देवी और उसके परिवार के लोगों द्वारा उसकी बाउंड्री गेट का ताला तोडकर वहां कब्जा करने की नियत से तीन चार ट्रॉली बजरी की डाल दी और जब बुजुर्ग ने बीनी देवी को जमीन पर कब्जा करने को लेकर नाराजगी दिखाई तो उसने उल्टा बुजुर्ग को यह धमका दिया कि जमीन हमारी है और यहां से चले जाओ वरना वह कपडे फाडकर पुलिस मे रिपोर्ट दर्ज करा देगी। सवाल उठता है कि अगर ऐसे प्रपंचो को रचकर कोई महिला किसी की जमीन पर कब्जा करने के लिए किसी पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने का डर दिखाये तो फिर एक आम इंसान अपनी जमीन पर कब्जा कैसे छुडवाये यह उसके लिए एक बडा संकट है?

LEAVE A REPLY