साहब के लॉज से घबराते हैं पुलिस हाकिम!

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तडके तक चलने वाली पार्टिंयों पर ‘आंख मंूद रही खाकी’
तो पॉवरफुल बार के बंद होने की समय सीमा कोई नहीं?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलों के डीएम व पुलिस कप्तानों को फ्रीहैंड कर रखा है कि वह अपने जिलांे में किसी के साथ भी भेदभाव न करें और व्यापारियों को उनके व्यापार चलाने में कोई ऐसा पैमाना न बनाये जिससे कि किसी पॉवरफुल इंसान के लिए तो नियम कानून को ताक पर रख दिया जाये और सीधेतौर पर व्यापार करने वाले काफी व्यापारियों को उनका व्यापार चलाने में जानबूझकर अडचनें पैदा की जायें जिससे कि किसी पॉवरफुल इंसान के व्यापार को पंख लगते रहे और दूसरे व्यापारियों को अपना व्यापार चलाने में ही संकट आकर खडा हो जाये? राजधानी के अन्दर मुख्यमंत्री के आदेशों को जिस तरह से हवा में उडाया जा रहा है उसकी खबर शायद मुख्यमंत्री के कानों में नहीं पहुंच पा रही है क्योंकि शहर के अन्दर एक साहब के लॉज से पुलिस हाकिम भी शायद घबराते हैं यही कारण है कि वे आज तक उस लॉज पर अपनी खाकी को वहां भेजने से भी इसलिए कतराते हैं कि कहीं उनकी पुलिस के कुछ दरोगा वहां तडके तक चलने वाली पार्टिंयों को बंद कराने के लिए वहां पहुंचने का साहस कर दें तो उन्हें कहीं 440 वोल्ट का करंट न लग जाये? उत्तराखण्ड के अन्दर जब राज्य के मुख्यमंत्री सबका साथ सबका विकास के विजन पर आगे बढ रहे हैं तो फिर राजधानी में शराब के बार बंद कराने के दो पैमाने कैसे हो सकते हैं कि कमजोर व्यापारी को तो पुलिस के कुछ दरोगा आये दिन उन्हें नियम कानून का पाठ पढाने के लिए कभी भी आगे आ जाते हैं और एक पॉवरफुल साहब के लॉज की ओर पुलिस का कोई दरोगा तो क्या पुलिस हाकिम भी वहां देर रात चलने वाली पार्टिंयों और हुक्का बार को बंद कराने का साहस नहीं दिखा पा रहे ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बार व हुक्का बार चलाने के लिए व्यापारियों को किसी आईपीएस की छत्र छाया में जाना पडेगा तभी उनके बार व हुक्का बार चल पायेंगे?
राजधानी के अन्दर पुलिस का इकबाल गैर कानूनी धंधे करने वालों के सामने तो टॉय-टॉय फिस्स होता हुआ दिखाई दे रहा है? जहां हरिद्वार पुलिस संगठित रूप से सट्टा व जुए के अड्डे चलाने वालों पर प्रहार कर रही है वहीं राजधानी की अधिकांश पुलिस सट्टेबाजों और जुए के अड्डे चलाने वाले बडे सिंडिकेट के आगे जहां खामोशी साधकर उनके अवैध धंधों पर प्रहार करने के लिए आगे ही नहीं आ रही वहीं राजधानी के कुछ इलाकों में स्थित लॉज व कैफो पर जिस तरह से पुलिस के कुछ दरोगाओं ने अपनी नजरें तिरछी कर रखी है उससे काफी व्यापारियों के सामने अपने लॉज व कैफे चलाना एक टेडी खीर बनता जा रहा है? हैरानी वाली बात है कि बार समय से खुले और वहां नाबालिकों को बार के अन्दर एंट्री न दी जाये और बार संचालक अपने ग्राहकों को सही मात्रा मंे शराब का पैक देने में कोई हेराफेरी तो नहीं कर रहे इस पर नजर रखने के लिए शासन ने आबकारी विभाग बनाया हुआ है जो इस बात पर भी नजर रखता है कि कहीं बार समयावधि के बाद तो नहीं खोला जा रहा और अगर ऐसा कोई बार संचालक कर रहा हो तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाये लेकिन गजब की बात तो यह है कि आबकारी विभाग का काम भी राजधानी पुलिस के कुछ दरोगाओं ने अपने हाथों में ले रखा है और उन्हें इस बात का इल्म है कि बार के बंद होने का समय क्या होता है लेकिन कुछ दरोगा कुछ कैफे व लॉज को अपना निशाना बनाने के लिए वहां के संचालकों को जिस तरह से डराने के लिए अकसर अपनी एंट्री वहां करते हैं उससे कैफे व लॉज चलाने वाले संचालकों के सामने अपने व्यापार को भयमुक्त होकर चलाने का एक बडा संकट आकर खडा हो जाता है क्योंकि जहां पुलिस बार-बार जाती है वहां आम इंसान पुलिस के खौफ के चलते आने से भी गुरेज करने लगता है जिसके चलते राजधानी में काफी बार व लॉज संचालकों के सामने अपने व्यापार को चलाने का एक बडा संकट आकर खडा हो रखा है? कितनी अजीब बात है कि पुलिस के कुछ दरोगा चंद कैफे व लॉज वालों को ज्ञान बांट देते हैं कि अगर उन्हें अपना लॉज व कैफे चलाना है तो उन्हें आईपीएस बनना होगा या फिर उनकी पहुंच किसी बडे आईपीएस से हो तो उनके कैफे व लॉज में पुलिस झांकने भी नहीं आयेगी? राजधानी के अन्दर लम्बे अर्से से देखने में आ रहा है कि एक साहब के लॉज की ओर कोई भी पुलिस अफसर या दरोगा झांकने का साहस नहीं दिखा पाता क्योंकि उन्हें इस बात का हमेशा डर सताता है कि अगर उन्होंने पॉवरफुल साहब के लॉज में देर रात तक चलने वाली शराब पार्टिंयों व हुक्के बार को बंद कराने का जरा भी साहस दिखाया तो उनके सामने नौकरी के दौरान बडा संकट आकर खडा हो जायेगा? यही कारण है कि राजधानी के पुलिस हाकिम तो इस बात का शत-प्रतिशत इल्म है कि एक पॉवरफुल साहब के लॉज में देर रात और तडके तक आये दिन पार्टिंयां आयोजित होती है लेकिन इस लॉज की तरफ पुलिस हाकिम व उनका कोई दरोगा झांकने की भी हिम्मत नहीं दिखाता क्योंकि उन्हें इस बात का भय रहता है कि पॉवरफुल साहब के लॉज में अगर उन्होंने वहां के संचालक को नियम कानून का पाठ पढाने का तिनकाभर भी साहस दिखाया तो उनकी कुर्सी पर कभी भी खतरा मंडरा जायेगा?

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