सरकार की लेडी सिंघम करेगी माफियाओं का अंत

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शपथ लेने के बाद साफ संदेश दिया था कि राज्य में माफियाराज का अंत होगा और भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी राजनेता या अधिकारी को बक्शा नहीं जायेगा। सरकार के मुख्य पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी में आवाम को पारदर्शिता और स्वच्छता का संदेश देने के लिए लेडी सिंघम के रूप में पहचाने जाने वाली आईएएस सोनिका को राजधानी का डीएम बनाकर साफ संदेश दे दिया कि सरकार माफियाराज के खिलाफ अपना मनसूबा साफ कर चुकी है और यही कारण है कि राजधानी के लोगों में डीएम को लेकर एक बडा विश्वास पैदा हुआ है कि वह पुष्कर सरकार की लेडी सिंघम बनकर राजधानी में खनन व जमीन माफियाओं का अंत कर देंगी। कैनाल रोड जैसे वीआईपी इलाके में पहाड काटकर जिस तरह से वहां अवैध प्लाटिंग का खेल शुरू करने की कोशिश शुरू हो रखी थी उस पर लेडी सिंघम ने एक बडा प्रहार करते हुए जिस तरह से अपने विजन को साफ किया उसको देखते हुए अब आवाम मुख्यमंत्री से उम्मीद लगाकर बैठी है कि वह पहाड काटने की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दें जिससे वो बडी मछलियां भी सामने आ सकें जिनके इशारे पर शहर के बीचो-बीच पहाड काटने का दुसाहस कर वहां उसे समतल कर दिया गया? वहीं इस मामले में राजधानी के पूर्व डीएम को बेदाग माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने इस मामले में जिस तरह से अपना रूख साफ किया था कि जमीन की समतलीकरण की अनुमति तीन माह की ही होगी और उन्होंने इस मामले में बडी कार्यवाही करते हुए लगभग 63 लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया था। अब राजधानी के अन्दर इस बात को लेकर भी बडी बहस छिड गई है कि कैनाल रोड की अवैध पहाड़ खुदाई व खनन के बडे तीरंदाज साफ बच निकले हैं या फिर सरकार उन पर शिकंजा कसने के लिए अपनी बडी कार्यवाही करने का साहस दिखायेगी?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी किचन टीम राज्य को भ्रष्टाचार और माफियाओं से निजात दिलाने के लिए बडे विजन के तहत काम कर रही है और पुष्कर सिंह धामी ने अपना साफ मिशन रखा हुआ है कि राज्य में माफियातंत्र किसी भी कीमत पर पनप नहीं पायेगा। हैरानी वाली बात है कि जहां राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड को माफियातंत्र से आजाद करने का प्लान बनाकर आगे बढ रहे हैं वहीं अस्थाई राजधानी के कैनाल रोड में पूरा का पूरा पहाड़ काट दिया और वहां प्लाटिंग कर उसे बेचने की तैयारियां तक शुरू कर दी गई थी वह एमडीडीए और खनन विभाग को क्यों नजर नहीं आया यह उनकी मंशा पर सवालिया निशान लगा रहा है? गजब बात तो यह है कि शहर के बीचो-बीच यह सब अनैतिक कार्य चलता रहा लेकिन महानिदेशक खनन की जोशीली, मुस्तैद और ईमानदार टीम को कुछ दिखाई नहीं दिया और तो और वी.सी एमडीडीए की जीरो टॉलरेंस वाली टीम जो हल्की सी खुदाई कार्य होने पर गरीब के काम पर रोक लगाकर सील कर देती है उसे भी सौ करोड की अवैध प्लाटिंग नजर न आना हैरान करने जैसा है? ऐसा ही एक खेल राजपुर में शिव मन्दिर के पास भू-माफियाओं द्वारा खेला गया और वहां सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे समतल करने के बाद सरकार का ही खनन चुराकर उससे वहां काम करने की जब पोल खुली थी तो एमडीडीए विभाग फिर सवालों के घेरे में आया था क्योंकि यह कार्यवाही भी राजधानी के पूर्व डीएम राजेश कुमार द्वारा की गई थी। शहर के बीचो-बीच कैनाल रोड में पहाड काटकर वहां प्लाटिंग करने के खेल की खबर जब नवंागतुक डीएम देहरादून सोनिका को लगी तो उन्होंने एक बडे खेल को तहस-नहस करके रख दिया। इस जमीन पर समतली कार्य किये जाने के लिए खनन विभाग द्वारा छह माह की अनुमति दी गई थी लेकिन अपर जिलाधिकारी ने समतलीकरण की चार माह की अनुमति की थी लेकिन पूर्व डीएम ने इसकी अवधि घटाकर तीन माह कर दी थी और उन्होंने ही अवैध खनन का संज्ञान लेकर 63 लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया था लेकिन इसके बावजूद भी वहां कैसे पहाड़ काटकर उसे समतल कर दिया गया यह खनन और एमडीडीए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खडे कर रहा है? सवाल यह उठ रहा है कि इस बडे खेल में मात्र चार लोगों का निलम्बन किया जाना आवाम के गले नहीं उतर रहा और उनका मानना है कि अगर राज्य के मुख्य सेवक पुष्कर ंिसह धामी इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए हरी झण्डी दें तो इस खेल में कुछ बडी मच्छलियां भी बेनकाब हो जायेंगी?

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