लेडी धामी ने पति की जीत के सफर को बनाया अभेद

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चम्पावत(संवाददाता)। उपचुनाव की घोषणा होते ही जहां राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने चुनाव को एतिहासिक जीत में बदलने के लिए एक बडी रणनीति के तहत चम्पावत की धरती पर उतरे थे वहीं पुष्कर सिंह धामी की अर्धांगनी गीत धामी भी अपने पति की एतिहासिक जीत के लिए हर मोर्चे पर एक माह तक डटी रही और अब चम्पावत की जनता भी यह कहने से नहीं चूक रही कि जहां उन्हें बेटे के रूप में पुष्कर सिंह धामी मिलेंगे वहीं बहू के रूप में उन्हें गीता मिलेगी। नारी शक्ति के बीच जिस तरह से गीता धामी ने अपनी पति की जीत को यादगार बनाने के लिए दिन-रात एक-एक गांव खंगालकर वहां प्रचार प्रसार किया वह किसी से छुपा नहीं है और आज चुनाव के दौरान उन्होंने मतदान स्थलों पर अपनी पति की जीत का सफर सुहाना करने के लिए खुद मोर्चा संभाल रखा था और नारी शक्ति जिस तरह से उन्हें अपना खुलकर आशीर्वाद देकर उन्हें वचन दे रही थी कि समूचा चम्पावत अब उनका है तो उसे देखकर साफ झलक रहा था कि चम्पावत की जनता ने चुनाव की घोषणा के बाद ही पुष्कर सिंह धामी को अपना बेटा और गीता धामी को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था।
उल्लेखनीय है कि चम्पावत में अपने पति की जीत को यादगार बनाने के लिए पुष्कर सिंह धामी की पत्नी ने खुद मोर्चा संभाल रखा था और वह एक माह से चम्पावत की जनता के बीच में प्रचार प्रसार करने के लिए पहुंची तो उससे देखकर नारी शक्ति भी यही कहती हुई दिखाई दी कि चम्पावत में सिर्फ पुष्कर-पुष्कर न कहिये क्योंकि गीता धामी भी जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पुष्कर सिंह धामी की जीत को अभूतपूर्व बनाने के लिए एक माह से दिन-रात जिस तरह से चम्पावत के चप्पे-चप्पे पर महिलाओं के साथ प्रचार प्रसार कर रही थी वह इसी बीत की ओर इशारा कर गया कि पुष्कर सिंह धामी के साथ गीता धामी अभेद खडी हुई थी।

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