एक पाठशाला भी है विधार्थी परिषद

0
202

चंपावत/देहरादून(संवाददाता)। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि जिले में प्रवेश करते हुए स्मरण आया और पुरानी यादें ताजा हुई और आज छात्रों के बीच आया हूं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में धर्म, संस्कृति एवं आध्यात्म का केन्द्र होना चाहिए और हमने इसकी शुरूआत कर दी दी है। उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कृति एवं आध्यात्म के उत्थान के लिए कार्य किया और विद्यार्थी परिषद इसके लिए संघर्ष करता आया है। यहां चम्पावत के मल्लिका अर्जुन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के युवा सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से देश व छात्रों की सेवा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद करता आ रहा है और यह ऐसा संगठन है जिसमें छात्र एवं शिक्षक दोनों ही पदाधिकारी होते है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद ने लंबे समय तक संघर्ष किया है और यह एक पाठशाला भी है। आज परिषद में सभी परिवार से लोग है और यहां पर संस्कृति का बचाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिषद की जहां भी बात आती है तो राष्ट्र व छात्रों के निर्माण में यह व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है और काशी के अंदर व्यापक स्तर पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद समान नागरिक संहिता की बात करती रही है। उन्होंने कहा कि पूरे हिन्दुस्तान में सिविल कोड लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सिविल कोड को लागू कर रहे है और इसे शुरू कर रहे है। उन्होंने कहा कि इस कानून को लागू करने वाला हमारा राज्य गोवा के बाद दूसरा राज्य होगा।
उन्होंने कहा कि पहले एक देश में दो प्रकार के संविधान चलते थे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कश्मीर से धारा 37० को हटाने का काम किया गया। उन्होंनें कहा कि उत्तराखंड में भी एक कानून होना चाहिए और केदारनाथ धाम, बदरीनाथ धाम में नया काम चल रहा है और अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है और आध्यात्म का काम किया जा रहा है और आने वाले समय में अनेकों कार्य किये जाने है। उन्होंने कहा कि पूर्व में आम चुनाव से पहले प्रदेश की देवतुल्य जनता से कहा था कि हमारी नई सरकार आयेगी तो किसी धर्म, जाति, किसी पंथ, किसी सम्प्रदाय का होगा तो हम सबके लिए एक कोड कानून लायेंगें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है। उन्होंने कहा कि चुनाव में सभी लोगों से अनुरोध किया है कि वह अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने के लिए आयें।

LEAVE A REPLY