सीएम के संकल्प से प्रेम करता आवाम

0
126

देहरादून(संवाददाता)। ‘आस्थाÓ, इस शब्द के सभी अक्षर भले ही पूर्ण न हो परंतु इस शब्द का संदेश सदा ही भावपूर्ण रहता है। आस्था को हमेशा से देवी-देवताओं से जोड़कर ही देखा गया है। हालंकि इस शब्द के शाब्दिक अर्थ और भावार्थ में ज्यादा अंतर देखने को नहीं मिलता है। ऐसा नहीं कि किसी व्यक्ति की आस्था सिर्फ ईश्वर तक ही सीमित होकर रह जाती है अपितु वह उस विशेष इंसान में भी आस्था रख सकता है, जिसका साकारात्मक प्रभाव उसके जीवन में रहता है। कुछ इसी तरह का प्रभाव उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की जनता पर डाला है। इसी प्रभाव को परिणाम रहा है कि इतिहास में पहली बार किसी राजनीतिक दल ने सरकार लगातार दूसरा कार्यकाल संभाला हो। बीते वर्षों में एक समय ऐसा भी जब उत्तराखण्ड में भारतीय जनता पार्टी की लोकप्रियता लगातार गिर रही थी। इसके पीछे पार्टी के कुछ दिग्गज नेताओं द्वारा किए गए विचित्र क्रियाकलाप रहे थे, जिसके चलते आवाम लगभग यह मन बना चुकी थी कि आगामी चुनाव में भाजपा से दूरी बनाकर रखनी है। इस बात की सूचना जब भाजपा हाईकमान को लगी थी तो वह मंथन करने में जुट गई थी और उस मंथन के निष्कर्ष के रूप में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हाईकमान में उत्तराखण्ड की बागडोर पुष्कर सिंह धामी के हाथों में सौंप दी थी। हाईकमान का यह कदम एक मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ और पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी व्यक्तिगत ख्याति के साथ-साथ पार्टी की लोकप्रियता के कद को भी आसमान तक पंहुचाया। आने वाले दिनों चम्पावत सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है जहां से भाजपा के प्रत्याशी के रूप में सीएम पुष्कर सिंह धामी मैदान में उतरने वाले है। जानकारों का मानना है कि उत्तराखण्ड की जनता ने जिस आस्था के साथ पुष्कर सिंह धामी के नाम पर भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया था, उस आस्था को बरकरार रखते हुए चम्पावत की जनता आगामी उपचुनाव में धामी का ‘विजय तिलकÓ करेगी।
किसी राजनेता की लोकप्रियता का अंदाजा उसकी जनसभध्रैली में उमड़ी से स्वत: ही लग जाता है। जैसे कि देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भी जिस किसी क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करने जाते है तो वहां की जनता उनको सुनने के लिए उमड़ पड़ती है। उत्तराखण्ड में कुछ इसी प्रकार की छवि अब सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी के भी बन चुकी है। वे जहां भी जनता को संबोधित करने जाते है, लोग उन्हें सुनने के लिए दौड़े चले आते है। इसका एक उदाहरण कुछ दिन पूर्व टनकपुर में देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की टनकपुर में हुई जनसभा भले ही मैदानी क्षेत्र में हुई लेकिन यह रैली पहाड़ के मतदाताओं को साधने में भी सफल रही। चम्पावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी द्वारा सीएम के लिए अपनी सीट छोडने के बाद यह मुख्यमंत्री की पहली चुनावी रैली थी। जिसमें उन्होंने जनता से उप चुनाव में खुद की जीत के लिए आशीर्वाद मांगा। चम्पावत विधान सभा सीट मैदान और पहाड़ का मिश्रण है। टनकपुर का ककरालीगेट विधान सभा का वह प्रवेश द्वार है जहां से पहाड़ और मैदान का भौगोलिक क्षेत्र शुरू होता है। मतदाताओं के लिहाज से मैदानी क्षेत्र पहाड़ से समृद्ध है। मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में 6० फीसद मतदाता हैं तो पर्वतीय क्षेत्र में 4० फीसद मतदाता हैं। टनकपुर और बनबसा में पहाड़ की तुलना में मतदाताओं की संख्या अधिक होने के चलते ही यह रैली टनकपुर में आयोजित की गई थी। इसलिए इसे भाजपा की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। मुख्यमंत्री की सभा दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं को साधने में सफल रही। टनकपुर और बनबसा में बड़ी संख्या में चम्पावत जिले के पर्वतीय क्षेत्रों से आकर लोग बसे हैं। इनमें अधिकांश परिवारों के कुछ लोग मैदान में रहते हैं तो कुछ पर्वतीय क्षेत्र में निवास करते हैं। जन सभा में सीएम ने न केवल चम्पावत विधान सभा बल्कि पूरे जिले के समग्र विकास की बात की। जिसका सकारात्मक संदेश सभी मतदाताओं तक पहुंचा। पिछले दो विधान सभा चुनाव में लगातार इस सीट से भाजपा की जीत हुई है और दोनों ही चुनावों में पर्वतीय क्षेत्र की तुलना में भाजपा को मैदानी क्षेत्र से ज्यादा वोट मिले थे। वैसे यह सर्वविदित है कि उत्तराखण्ड की जनता अपने सीएम से कितना स्नेह करती है और उनमें आपार आस्था रखती है। कुछ विरोधियों को यह बात संभवत: हजम नहीं होती, तो उनके हाजमें को दुरूस्त करने के लिए अब चम्पावत की जनता अपनी आस्था का प्रमाण देते हुए आगामी विधानसभा उपचुनाव में सीएम को विजय तिलक करके ही करेगी?

LEAVE A REPLY