उत्तराखण्ड में धामी का जलवा

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संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की जनता ने कभी सपने में भी यह नहीं सोचा था कि भाजपा हाईकमान ने जिस युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को छह माह पूर्व उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनाया था वह राज्य की जनता का दिल इस कदर जीत लेंगे कि चारो तरफ उनके ही कहानी किस्से और चर्चे जगह-जगह सुनने को मिलेंगे। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो कि विश्व के एक बडे राजनेता बन चुके हैं और उन्होंने जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी को अपना सखा बनाकर उत्तराखण्ड को एक स्वच्छ राज्य बनाने का संकल्प सौंपा उस संकल्प को धारण कर पुष्कर ंिसह धामी ने सत्ता चलानी शुरू की और उन्होंने साफ संदेश दे दिया कि वह अपने शासनकाल में किसी भी छोटे या बडे को भ्रष्टाचार करने की छूट नहीं दे सकते और जिसने भी भ्रष्टाचार करने का दुसाहस किया उसके खिलाफ कार्यवाही करने में वह तिनकाभर भी नहीं हिचकेंगे। वहीं राज्यवासियों के लिए पुष्कर का दयावान रूप उत्तराखण्ड को एक नई दिशा की ओर ले जाता हुआ दिखाई दे रहा है और हर गली-मौहल्ले नुक्कड पर पुष्कर ंिसंह धामी के ही किस्से और चर्चे सुनने को मिल रहे हैं और राज्यवासियों के मन में एक नई ऊर्जा का संचार दिखाई दे रहा है कि ऐसे मुख्यमंत्री को बीस साल तक राज्य का मुख्यमंत्री घोषित कर दिया जाये क्योंकि जिस पुष्कर सिंह धामी ने चंद समय में ही आवाम के दिलों में राज कर उन्हें अभेद इंसाफ देने की दिशा में अपने आवास का दरवाजा खोल दिया है वह पुष्कर सिंह धामी को देश के अन्दर कितने बडे पायदान पर लाकर खडा कर दिया है इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होगा। पुष्कर ंिसह धामी ने साफ संदेश दिया है कि कोई भी गरीब से गरीब उनके पास आकर अपनी फरियाद कर सकता है और उनके दर से कोई भी फरियादी उदास होकर नहीं जायेगा यह उनका संकल्प है। वर्ष 1988 में हिन्दी फिल्म दयावान आई थी जिसमें फिल्म के अदाकार विनोद खन्ना को दयावान की भूमिका में दिखाया गया था और इस फिल्म को देश के अन्दर काफी सराहा गया था। इस फिल्म का रिमेक उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी के अन्दर देखने को मिल रहा है जो कि उत्तराखण्ड में राज्यवासियों के लिए एक दयावान की भूमिका में नजर आ रहे हैं। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा मुख्यमंत्री राज्य को मिला है जो गरीब से गरीब व्यक्ति को भी अपने सीने से लगाने से पीछे नहीं हटता और वृद्ध गरीब महिलाओं को देखकर उनके मन में जो भाव राज्य की जनता को देखने को मिल रहा है वह एक दयावान का रूप ही माना जा रहा है। उत्तराखण्ड में भले ही विधानसभा चुनाव के बाद कुछ राजनेताओं ने मुख्यमंत्री बनने के लिए उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक दौड लगाई लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उत्तराखण्ड के युवा नेता पुष्कर सिंह धामी के अन्दर सत्ता चलाने का जो जनून देखने को मिला उसी का परिणाम रहा कि पुष्कर ंिसह धामी को चुनाव में हारने के बावजूद भी नरेन्द्र मोदी ने उन पर बडा विश्वास दिखाते हुए उन्हें राज्य का एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें उत्तराखण्ड को देश का सर्वेश्रेष्ठ राज्य बनाने का विजन सौंपा है। उत्तराखण्ड में दुबारा सत्ता संभालने के बाद पुष्कर ंिसंह धामी ने साफ संकेत दिया है कि राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। पुष्कर ंिसह धामी ने छोटे से छोटे व्यक्ति को इंसाफ देने के लिए जिस तरह से अपने कदम आगे बढा रखे हैं उसके चलते वह भाजपा के अन्दर एक बडे राजनेता के रूप में उभर कर सामने आ चुके हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को धरातल पर उतारने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने जिस तरह से राज्य के अन्दर काम करना शुरू किया है उससे राज्यवासियों की आंखों के वह तारे बनते जा रहे हैं। गजब की बात तो यह है कि इन दिनों पान की दुकान से लेकर बडे-बडे शोरूम में सिर्फ और सिर्फ पुष्कर सिंह धामी की चर्चाएं हो रही हैं और हर जगह एक ही आवाज सुनने को मिल रही है कि आखिरकार अगर उत्तराखण्ड को पहले ऐसा मुख्यमंत्री मिल गया होता तो आज राज्य का रूप ही अलग होता। उत्तराखण्ड के अन्दर पुष्कर ंिसह धामी का बढता वजूद भाजपा के ही कुछ बडे-बडे दिग्गज राजनेताओं की नींद उडाये हुये है और उन्हें पुष्कर सिंह धामी के बढते कदमों को देखते हुए यह सोचने के लिए मजबूर होना पड रहा है कि आखिरकार भविष्य में उनका राजनीतिक कद क्या होगा?

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