फर्जी मुकदमों के मकडजाल में अफसर फसाते रहे उमेश को

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक युवा राजनेता हैं और वह अपनी सरकार को पारदर्शिता के साथ चलाने का वचन राज्य की जनता को दे चुके हैं इसी के चलते अब उनके सामने सबसे बडी चुनौती ऐसे भ्रष्ट अफसरों पर नकेल लगाने की है जिन्होंने राज्य में कुछ राजनेताओं के साथ मिलकर भ्रष्टाचार के दलदल में खूब गोते लगाये और चंद राजनेताओं के इशारे पर उन्होंने उनके दुश्मनों पर साजिश रचकर उन्हें नेस्तानबूत करने के लिए चक्रव्यूह रचे? ऐसे ही कई हमले विधायक उमेश कुमार पर चंद आईपीएस अफसरों द्वारा किये गये थे और एक राजनेता के इशारे पर जिस तरह से उमेश कुमार को तबाह करने का तानाबाना बुना गया था वह राज्य में किसी से छुपा नहीं है और तो और साजिशें रचने वाले चंद आईपीएस अफसरों में से एक आईपीएस के पास कुछ वर्षों मे अकूत सम्पत्ति का साम्राज्य खडा करने में कामयाब हो गया क्या इसकी जांच राज्य के मुख्यमंत्री केन्द्र की विजिलेंस से कराने के लिए अपने कदम आगे बढायेंगे इस पर राज्यवासियों की नजरें टिकी हुई हैं? उल्लेखनीय है कि उमेश कुमार देश का एक ऐसा शख्स बन चुका है जिस पर चंद समय में ही दो-दो राजद्रोह के मुकदमें एक साजिश के तहत दर्ज किये गये। हैरानी वाली बात है कि देश में कहीं भी व्हटसप कॉल करने पर किसी के खिलाफ राजद्रोह जैसा मुकदमा दर्ज हुआ हो ऐसा देखने और सुनने को नहीं मिला लेकिन उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के एक करीबी पूर्व भाजपा नेता ने रांची में पत्रकार उमेश कुमार के खिलाफ व्हटसप कॉल के आधार पर ही राजद्रोह जैसा मुकदमा दर्ज कराकर एक नया इतिहास रच दिया था? इतना ही नहीं उसी मामले में राजधानी के पूर्व पुलिस कप्तान रहे अरूण मोहन जोशी ने विधायक उमेश कुमार समेत कुछ पत्रकारों के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा एक साजिश के तहत दर्ज कराया और एक पत्रकार के साथ जिस तरह से उन्होंने तांडव का नंगा नाच करते हुए उसे यातनायें दी वह यह साबित कर गया था कि सिर्फ कप्तानी पर बने रहने के लिए अरूण मोहन जोशी ने किस तरह से अपनी टीम के साथ फर्जी राजद्रोह का मुकदमा कायम किया था और उस मुकदमें को उच्च न्यायालय ने फर्जी पाते हुए खारिज कर दिया था लेकिन सरकार ने फर्जी राजद्रोह का मुकदमा कायम करने वाले अरूण मोहन जोशी के खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की यह हैरान करने वाली बात है? उत्तराखण्ड के चंद आईपीएस प्रदेश के लिए घातक हैं जो कि सिर्फ महत्वपूर्ण पदों पर बने रहने के लिए चंद राजनेताओं के इशारे पर कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार दिखाई देते आ रहे हैं?

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