चुनावी महासंग्राम के लिए पुष्कर पर किये प्रहार

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनाव से मात्र छह माह पूर्व जब भाजपा हाईकमान ने युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को सत्ता सौंपी तो उसके बाद उन्होंने राज्य में चारो ओर विकास की गंगा बहाने के साथ राज्यवासियों के मन में एक बडा जोश भरने का सिलसिला शुरू किया तो उसे देखकर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी सहम गये थे और राज्य में कांग्रेस की वापसी को लेकर उन्होंने जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी को खनन प्रेमी सीएम बताकर उन्हें राज्यवासियों के सामने विलेन बनाने का कुचक्र रचा उस कुचक्र के जाल में हरदा खुद ही फंस गये और राज्य की जनता ने पुष्कर सिंह धामी को राजनीति का एक धाकड़ बल्लेबाज के साथ स्वच्छ सत्ता चलाने वाला नेता भी मान लिया और उसी का परिणाम था कि सत्ता पर काबिज होने से पहले जिस भाजपा के सर्वे में पार्टी को विधानसभा चुनाव में मात्र चंद सीटें आने का अनुमान दिखाई दे रहा था उस अनुमान को भेदते हुए पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर राज्य में भाजपा की सत्ता में वापसी करा दी और देश के प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा हाईकमान के वह तारे बन गये। अब पुष्कर सिंह धामी की दुबारा मुख्यमंत्री के रूप में हुई ताजपोशी के बाद हरदा जो पुष्कर सिंह धामी को खनन प्रेमी मुख्यमंत्री करार दे रहे थे वह अब उन्हें शालीन राजनेता का खिताब दे रहे हैं। इससे सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या हरदा ने राजनीतिक द्वेष के चलते पुष्कर सिंह धामी को अपने निशाने पर ले रखा था?
उल्लेखनीय है कि पुष्कर सिंह धामी वह राजनीतिज्ञ हैं जिन पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा हाईकमान जेपी नड्डा ने भरोसा जताकर उन्हें विधानसभा चुनाव से मात्र छह माह पहले ही उत्तराखण्ड की कमान सौंपी थी और उन्हें विजन दिया था कि वह राज्य के अन्दर एक बार फिर भाजपा की सरकार सत्ता में लायें। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब-जब उत्तराखण्ड आये तो उन्होंने पुष्कर ंिसह धामी को सत्ता चलाने के गुर समझाये और पारदर्शिता के साथ सरकार चलाकर राज्यवासियों का दिल जीतने का पाठ पढाया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुरूमंत्र पर पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सत्ता चलाई और वह छह माह के भीतर ही गढवाल और कुमांऊ दोनो मण्डलों के नेता के रूप में उभर कर सामने आये। मात्र छह माह के भीतर पुष्कर सिंह धामी के बढते राजनीतिक वजूद को देखते हुए कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विधानसभा चुनाव में सिर्फ पुष्कर सिंह धामी को ही अपने निशाने पर लेने का एजेंडा बनाकर रखा और वह बार-बार पुष्कर सिंह धामी को खनन प्रेमी मुख्यमंत्री बताकर उन पर राजनीतिक द्वेष भावना से प्रहार करते रहे लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने कभी भी हरीश रावत पर पलटवार नहीं किया और शालीनता के साथ वह जवाब देते रहे। हरीश रावत ने कभी भी इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि जिस पुष्कर सिंह धामी पर वह राजनीतिक द्वेष भावना से प्रहार कर उन्हें खनन प्रेमी मुख्यमंत्री बता रहे हैं उन्हें राज्य की जनता एक बडे राजनेता के रूप में स्वीकार कर उनके नेतृत्व में भाजपा की सरकार बना देगी। अब एक बार फिर जब पुष्कर सिंह धामी की मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी हुई है तो हरदा ने उन्हीं पुष्कर सिंह धामी की तारीफ करते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव के दौरान उन पर कई तरह के प्रहार किये और वह चुनाव में प्रहार न करते तो क्या करते? हरदा कहते हैं कि धामी ने बहुत ही शालीनता के साथ उनके प्रहारों का जवाब दिया और उनके अन्दर शालीनता वाली बात उन्हें बहुत अच्छी लगी। हरदा के इस बयान से यह बात साफ हो गई कि पुष्कर ंिसह धामी ने छह माह तक स्वच्छता के साथ सरकार चलाई थी और उसी का परिणाम रहा कि भले ही पुष्कर सिंह धामी अपना चुनाव हार गये लेकिन भाजपा को एक बार फिर सत्ता दिलाने के लिए उन्हे असली हीरो मानकर एक बार फिर प्रदेश की कमान उन्हें सौंपी गई।

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