कैसी मित्र पुलिस बन गई हुजूर…

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कप्तान साहब नहीं सुनती आपकी प्रेमनगर पुलिस
अवैध खोखे हटाने को खाकी के सामने हुआ संग्राम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। आवाम के लिए पुलिस मित्र रूप मे रहे यह सबको स्वीकार्य है लेकिन अगर मित्र पुलिस अपराधियों, माफियाओं, नशा तस्करों और सरेआम गुंडागर्दी करने वालों के साथ मित्रता निभाने लगे तो यह किसी को मंजूर नहीं हो सकता? राजधानी के प्रेमनगर इलाके में मंदिर के बाहर लगे अवैध खोखे को हटवाने के लिए इलाके के लोग काफी समय से प्रेमनगर पुलिस से अपील करते रहे कि अवैध खोखे को हटवा दो नहीं तो इससे किसी दिन एक बडा बवाल मच सकता है लेकिन पुलिस को आवाम की यह बात शायद रास नहीं आई और वह इलाके लोगों की बात को हमेशा अनसूना करने मे ही यकीन रखती रही। अवैध खोखे को हटाने के लिए कैंट बोर्ड तैयार था लेकिन पुलिस उनका साथ देने को तैयार नहीं थी और आज इस अवैध खोखे को लेकर वहीं सबकुछ हो गया जिसकी आशंका इलाके के लोगों को लम्बे समय से हो रखी थी? अवैध खोखे को हटवाने के लिए इलाके के लोगों ने वहां दस्तक दी तो कुछ महिलाओं और लोगों के साथ खोखा चलाने वालों ने पुलिस के सामने ही मारपीट की और पुलिस वहां पर तमाशबीन बनकर सबकुछ देखती रही जिसके चलते एक महिला के पैर की हड्डी टूट गई तो कुछ लोगों को चोटें आई जिसके बाद वहां एक बडा तमाशा हो गया और इलाके के लोगों ने प्रेमनगर पुलिस को कटघरे मे खडा किया कि वह पुलिस को बताते रहे कि उनके साथ मारपीट हो रही है तो वह खामोश क्यों है लेकिन पुलिस को तो मित्र रूप दिखाना था इसलिए वह खामोशी के साथ वहां तमाशबीन बनकर खडी रही ऐसे में मित्रता सेवा, सुरक्षा का स्लोगन सिर्फ हवा-हवाई होता हुआ नजर आ गया।
आज प्रेमनगर का एक इलाका संग्राम रण उस समय बन गया जब मन्दिर के बाहर लगे एक अवैध खोखे को हटवाने के लिए लोगों ने एक बार फिर अपनी बात रखी तो वहां खोखा चलाने वालों ने उन्हें अपनी दादागिरी का भौकाल दिखाना शुरू किया। अवैध खोखे को हटाने को कैंट बोर्ड तैयार था और वहां पुलिस भी मौजूद थी लेकिन हैरानी वाली बात है कि पुलिस के सामने ही खोखा चलाने वालों ने लोगों पर हमला बोल दिया और उससे वहां अफरा-तफरी मच गई। सवाल यह खडा हुआ कि जिस समय यह हमला हो रहा था उस समय पुलिस भी मौजूद थी लेकिन पुलिस वहां पर तमाशबीन बनकर खडी हुई थी और जो लोग हमले का शिकार हो रहे थे उन्होंने पुलिस से कहा भी कि उन पर हमला किया जा रहा है तो पुलिस का कहना था कि वह खामोश रहे। हमले का शिकार हुये कुछ लोगों का कहना था कि पुलिस का हमलावरों के प्रति मित्रता वाला रूप उनके लिए हैरान करने वाला था क्योंकि पुलिस ने वहां पर हमलावरों को रोकने के लिए कुछ नहीं किया और वह इस तमाशे को देखते रहे। कुछ लोगों ने बताया कि हमलावरों ने एक महिला को धक्का दिया तो उनके पैर की हड्डी टूट गई और कुछ लोगों को इसमे चोटे भी आई जिससे यह सवाल खडा हुआ कि इलाके में अगर पुलिस के सामने हमलावर हमला करने से नहीं चूके तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस किस तरह से खामोश बैठकर तमाशा देख रही थी?
प्रेमनगर पुलिस हमले के बाद उन्हें अपनी पकड में लेने के लिए आगे बढ़ी जिन्होंने कुछ लोगों पर हमला कर उन्हें घायल किया था। हमले का शिकार होने वाले कुछ लोगों ने खुला आरोप लगाया कि वह प्रेमनगर पुलिस को लम्बे समय से शिकायत कर रहे थे कि मन्दिर के बाहर लगे इस अवैध खोखे को हटाया जाये लेकिन पुलिस हमेशा उनकी इस मांग को हवा मे उडाती चली गई और आज आखिरकार इस अवैध खोखे को लेकर वहां एक बडा संग्राम मच गया और उससे कुछ लोग घायल भी हो गये। इलाके के कुछ लोगों ने अपनी पीडा बताते हुए कहा कि अगर पुलिस ने जल्द इस अवैध खोखे को हटाने के लिए अपने कदम कैंट बोर्ड के साथ आगे नहीं बढाये तो वहां कभी भी कोई बडा हादसा हो सकता है।

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