उत्तराखण्ड में ‘रईसजादे अफसर’

0
96

विजिलेंस नहीं तोड पायेगी दौलत का चक्रव्यूह!
भ्रष्टाचार के रथ पर सवार हैं दर्जनों अफसर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने भ्रष्ट और घोटालेबाज राजनेताओं और अफसरों को चार साल से दो टूक संदेश दे रखा है कि अगर उन्होंने राज्य में कुछ भी भ्रष्टाचार किया तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पडेगा। हालांकि आज भी यह सत्य है कि उत्तराखण्ड में दर्जनों अफसर भ्रष्टाचार के रथ पर सवार होकर दौलत कमाने का वो खेल खेल रहे हैं जो शायद विजिलेंस को कभी नजर नहीं आया और यही कारण है कि भ्रष्टाचारियों के दौलत के चक्रव्यूह को विजिलेंस कभी तोड ही नहीं पाई और भविष्य में वह कोई करिश्मा कर देगी यह भी एक सपने जैसा ही नजर आ रहा है? उत्तराखण्ड के अन्दर एक बार फिर बडी बहस चल पडी है कि राज्य के अन्दर बडी संख्या मंे रईसजादे अफसर हैं जिन्होंने दौलत का वो साम्राज्य खडा कर रखा है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। भ्रष्टाचार से कमाई गई दौलत के चक्रव्यूह को भेद पाने में सिर्फ और सिर्फ लोकायुक्त ही कामयाब हो सकता है जिसका गठन राज्य के अन्दर आखिर क्यों नहीं हो पाता यह हमेशा एक बहस का विषय बना हुआ है? भ्रष्टाचार मिटाना है तो फिर लोकायुक्त से सरकारों को घबराने की जरूरत क्यों है क्योंकि भ्रष्टाचारी ही भय मे रहेगा जब राज्य के अन्दर लोकायुक्त का गठन होगा और खामोशी मे रहने वाले वो रईसजादे अफसर भी आवाम के सामने बेनकाब हो जायंेगे जो भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाकर राज्य की जनता के साथ एक बडा धोखा करने के मिशन में आगे बढे हुये हैं?
उत्तराखण्ड में तेइस सालों तक जितनी भी सरकारें रही सबके कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का काला खेल विकराल रूप से चलता रहा और इसकी गूूंज देश से लेकर सर्वोच्च अदालत में भी खूब गूंजी लेकिन राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार और घोटाले करके अकूत दौलत कमाने वाले भ्रष्ट नेताओं और अफसरों पर कभी कोई शिकंजा कसा गया हो ऐसा तो देखने में कभी नहीं मिला? उत्तराखण्ड के अन्दर दर्जनों अफसर ऐसे देखने को मिले जिन्होंने खुलकर भ्रष्टाचार और घोटाले किये और उसी के चलते उन्होंने अकूत दौलत कमाने के जिस रास्ते को चुना वह आम जनमानस को हमेशा एक बडा दर्द देता रहा। भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों को इस बात का शुरूआती दौर से ही इल्म है कि राज्य के अन्दर विजिलेंस इतनी कमजोर है कि वह छोटे भ्रष्टाचारियों पर तो शिकंजा कस सकती है लेकिन बडों को वह कभी अपने जाल में फसाने मे कभी कामयाब नहीं होगी। उत्तराखण्ड के अन्दर अकसर जब भ्रष्टाचार की जडों पर प्रहार करने के लिए विपक्ष और कुछ संगठन आगे आये तो कभी भी सरकारों ने उन भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने के लिए कोई एक्शन नहीं लिया जिन पर अकूत दौलत कमाकर बेनामी सम्पत्तियां अर्जित करने के हमेशा दाग लगते रहे हैं।
उत्तराखण्ड के अन्दर जबसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभाली है तबसे उन्हांेने भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों के खिलाफ बडी दहाड लगाई है और उन्होंने विजिलेंस को मजबूत करने की दिशा में जरूर अपने कदम आगे बढाये हैं लेकिन यह भी सच है कि आज भी उत्तराखण्ड के अन्दर दर्जनों अफसर भ्रष्टाचार के रथ पर सवार होकर आज भी अपना खजाना भ्रष्टाचार से भरने मे कोई कसर नहीं छोड रहे हैं? उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस चल रही है कि आज भी दौलतमंद दर्जनों अफसरों के साम्राज्य का चक्रव्यूह भेद पाने में विजिलेंस कामयाब नहीं हो पा रही है और उसके पास जो शक्ति है उसे देखकर यह हमेशा आशंकायें रहंेगी कि वह दौलत कमाने वाले भ्रष्ट अफसरों का साम्राज्य कभी नहीं तोड पायेंगे? उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचारियों पर नकेल लगाने का एक मात्र हंटर लोकायुक्त ही है जिसका गठन करने के लिए सरकारें हमेशा आगे आने से बचती आ रही हैं ऐसे में सवाल खडे होते हैं कि जब सरकार की मंशा भ्रष्टाचार और घोटालों का अंत करना है तो फिर राज्य में लोकायुक्त के गठन से उसे क्यों परहेज है?

LEAVE A REPLY