कांग्रेस में हैडमास्टर बने हरदा

0
60

हरक के तल्ख तेवरों पर भाजपा करेगी पलटवार?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में दो बार विधानसभा चुनाव हार चुकी कांग्रेस के अन्दर जिस तरह से कुछ छत्रपों में आपसी घमाशान मच रहा था उसके चलते कांग्रेस हाईकमान ने आखिरकार हरीश रावत को कांग्रेस के अन्दर हैडमास्टर की भूमिका में नई जिम्मेदारी मिली है और उन्होंने इस जिम्मेदारी का निर्वाहन करने के लिए मंच से ही सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर 2027 का चुनावी रण जीतने का पाठ पढाया है। हरदा ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को दो टूक संदेश दिया है कि वह यह न सोचे कि किसी नेता को वह जीता दें और किसी नेता को जीताने से वह अपने आपको दूर रखें। हरदा ने अभी से ही पार्टी को एक सूत्र में बांधने के जो पाठ कांग्रेसियों को पढाया है उससे कहीं न कहीं भाजपा में भी जरूर बेचैनी होगी? वहीं हरक ने आये दिन भाजपा को कटघरे में खडा करने के लिए अपने तल्ख तेवर अपना रखे हैं और वह जिस अंदाज में आक्रामक नजर आ रहे हैं उसे देखते हुए यह आशंका प्रबल हो रही है कि भाजपा भी हरक के इस वार पर जरूर पल्टवार करेगी?
पूर्व सीएम हरदा ने कहा कि भाजपा को बिहार चुनाव में मिली जीत के बाद कांग्रेस की जिम्मेदारी बहुत बढ़ गयी है। साथ ही यह भी चेताया कि फील्ड में नहीं जाने पर दूसरे दल के लोग आपके स्थान पर काबिज हो गए। लिहाजा उन्हें रिप्लेस करने के लिए गांडीव उठाना पड़ेगा।और सामाजिक न्याय की गदा से भाजपा पर प्रहार करना होगा। नाभि के नीचे चोट मारनी होगी। हरदा का सीधा इशारा गणेश गोदियाल व आर्य की तरफ था। विधानसभा चुनाव 2027 के लिए शुरू हो चुकी महाभारत में कांग्रेस के पांच पांडवों को जीत के गुर बताने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत को बेशक हाईकमान ने फ्रंट फुट पर नहीं रखा। लेकिन हरदा ने नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की ताजपोशी के दिन अभिभावक के तौर पर नसीहत देते हुए कांग्रेस की दस साल की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाने का मंत्र जोर शोर से देकर अपने होने का अहसास अवश्य करा दिया।
अपने लंबे सम्बोधन में हरदा अभिभावक,मार्गदर्शक की भूमिका में बार बार नजर आए। उन्हें यह भी इल्म बखूबी था कि उनके कंधों पर ‘पांच पांडव’ जैसी सीधी चुनावी जिम्मेदारी नहीं है। फिर भी इस विष को पीते हुए हरदा ने खुले मंच से चुनाव प्रचार की बारीकियां समझाने में जी जान लगा दी। नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि अपने अंदर ललक,भूख और जीतने की तड़प पैदा करो। ऐसा हम 2002 और 2012 में कर चुके है। यही नहीं, पार्टी के अंदर और बाहर एक दूसरे की बुराई करने वालों को पारस्परिक गुणों के बखान व एक दूसरे को उत्साहित करने का सुझाव भी दिया। कहा कि, विष पुरुषों को दूर रखिये। और जो विष है उसे मेरी जेब में उड़ेल दो। 2013 की केदार आपदा के बाद कांग्रेस सरकार के कार्यों को भी जनता तक ले जाने की बात दोहराई। यही नहीं, पंडित नारायण दत्त तिवारी के समय प्रदेश में हुई औद्योगिक क्रांति और इंफ्रास्ट्रक्टर को लेकर किए गए बुनियादी कार्यों को भी घर घर पहुंचाने की पुरजोर अपील की।
अपनी हर बात पर हरदा ने सवाल भी किया, अब अगर आप लोग ऐसा नहीं कर सकते तो वे क्या कर सकते हैं। और कोई भी कार्यकर्ता क्या कर सकता है। दिल्ली से आये केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी में हरदा ने कांग्रेस के समय की 32 हजार नौकरियों का भी जिक्र किया। कांग्रेस के दस साल के शासन में दो बार पटवारी भर्ती, मेडिकल कालेज, नर्सिंग कालेज,आईटीआई,पॉलिटेक्निक आदि की स्थापना का भी उल्लेख किया । कहा कि भाजपा के शासन में एक भी मेडिकल और नर्सिंग कालेज नहीं खुला। पूर्व सीएम हरदा ने बहनों को जोड़ने की बात कह कार्यकर्ताओं और नेताओं को कुंती का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा था कि कुंती का आशीर्वाद पांडव के साथ था। यह भी कहा कि,गांधारी का आशीर्वाद दुर्योधन को नहीं मिला था। लिहाजा मां-बहनों की पूजा करो। युवक कांग्रेस व पार्टी के छात्र संगठन एनएस यूआई जिंदाबाद के नारे लगाते हुए पंचमुखी रुद्राक्ष (गोदियाल, प्रीतम, हरक, आर्य व कापड़ी) को गले में धारण करने की नसीहत देते हुए हरदा एक मार्गदर्शक की भूमिका में नजर आए।

हरक सिंह को घेरेगी भाजपा
कांग्रेस की नई टीम के गठन के बाद उत्साहित हरक सिंह रावत ने उपनलकर्मियों के धरना स्थल व मीडिया के साथ वार्ता में जिस तरह सीएम धामी और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत पर प्रहार किए। उसके बाद भाजपा के रणनीतिकार जवाबी फार्मूले पर काम करने में जुट गए हैं। भाजपा मुख्य तौर पर गोदियालय प्रीतम, आर्य व भुवन कापड़ी के बजाय हरक सिंह की घेराबंदी के साफ मूड में दिख रही है? अति उत्साह में दिख रहे हरक सिंह पूर्व सीएम त्रिवेंद्र को चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दे चुके हैं। यह वीडियो बहुत वॉयरल हो रहा है। भाजपा के सूत्र कांग्रेस के चुनावी नैया के पांचों मल्लाहों में सिर्फ हरक सिंह को कमजोर श्कड़ीश् के तौर पर देख रही है। भाजपा एक बार फिर हरक सिंह से जुड़े पुराने विवादों को जनता के सामने नये सिरे से पेश करेगी।
गौरतलब है कि नतीजतन, 2022 के बाद सीबीआई व ईडी की जांच का सामना कर रहे हरक सिंह को एक बार फिर भाजपा के तीरों का सामना करना पड़ सकता है। गौरतलब है कि 2016 में कांग्रेस सरकार गिराकर भाजपा में शामिल होने वाले और फिर 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस में वापसी करने वाले हरक सिंह एक बार फिर अपने गर्म तेवरों से चर्चाओं में है। गर्मजोशी से भरे अपने वक्तव्यों में कई बार भाषाई मर्यादा भी तोड़ते दिख रहे हैं। तू तड़ाक भी जारी है। भाजपा के सम्भावित शिकंजे के बाद चुनावी जंग और अधिक रोचक होने की उम्मीद है। अभी 2027 के रण में भले ही एक समय बचा हो लेकिन कांग्रेस के चंद छत्रपों ने भाजपा को सडकों पर अब सीधेतौर पर ललकार कर यह चुनौती देनी शुरू कर दी है कि वह अब सत्ता से उसे उखाड फेकेंगे।

LEAVE A REPLY