धामी की दो टूक जेलों से अपराध किया तो यमराज से होगा सामना

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जेल चीफ ने जेलों से अपराध के रास्ते किये बंद
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य की जेलों से बडे-बडे कुख्यात बदमाश अपने गैंग चलाते रहे और जेलों से बैठकर उन्होंने जहां हत्या, फिरौती और खतरनाक अपराध करने का तांडव किया उससे राज्य की जनता से लेकर उद्यमियों में भी कुख्यात बदमाशों का एक बडा डर देखने को मिला करता था। जेलों में कुख्यातों के पास से मोबाइल बरामद होना एक आम बात हो गई थी और इनके तांडव को रोकने में हमेशा सरकारें और जेल चीफ का इकबाल फुस्स दिखाई देता था लेकिन जबसे राज्य की कमान युवा मुख्यमंत्री ने संभाली है और जेल चीफ के रूप में तेज तर्रार आईपीएस की तैनाती हुई है तबसे किसी भी जेल से अपराध करने का दुसाहस कोई भी अपराधी नहीं कर पा रहा है क्योंकि जेल चीफ ने जेलों में बंद कुख्यातों को अल्टीमेटम दे रखा है कि अगर उन्होंने अपराध करने का दुसाहस किया तो उन्हें मिट्टी मे मिला दिया जायेगा। मुख्यमंत्री के शासनकाल में अब किसी भी जेल से अपराध का तांडव नहीं हो रहा है और न ही किसी कुख्यात में इतनी हिम्मत है कि वह जेल से अपराध कर सके या किसी उद्यमी से फिरौती मांग सके। मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि जेलें अपराधियों के सुधार के लिए बनी हुई है न कि वहां से अपराध करने के लिए।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी राज्य को अपराधमुक्त करने की दिशा में लम्बे समय से संकल्प लिये हुये हैं क्योंकि राज्य की जनता की रक्षा करना किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी होती है और इस जिम्मेदारी को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री ने अपने कदम आगे बढा दिये हैं और उन्होंने राज्य की जनता से वायदा किया है कि 2०25 तक उत्तराखण्ड को अपराध और नशामुक्त कर दिया जायेगा। जेल चीफ के पद पर तैनात होते ही अभिनव कुमार ने साफ संदेश दिया कि आवाम की रक्षा कुख्यात और दुर्दांत अपराधियों से की जायेगी। जेल चीफ अभिनव कुमार जो राज्य बनने के बाद से ही उत्तराखण्ड में तैनात हैं और वह राज्य में होने वाले अपराध को अच्छी तरह से पहचानते हैं तो वहीं कुछ जेलों से कैसे कुछ अपराधी अपने गैंग वर्षों से चला रहे हैं इसका भी उन्हें इल्म है इसलिए राज्यवासियों को अब यह आशा दिखने लगी है कि जेलों से गैंग चला रहे कुख्यात अपराधियों पर अब जेल चीफ अभिनव कुमार की पैनी नजर रहेगी और चंद जेलों से जो कुख्यात वर्षों से अपने गैंग चलाकर सरकार और पुलिस महकमें को चुनौती देते आ रहे हैं उन्हें अब इस बात का इल्म हो जायेगा कि जेलों में अब उनके द्वारा आवाम और उद्यमियों को आतंकित करने का चल रहा खेल खत्म हो जायेगा। आवाम को खुशी है कि जेल चीफ की कमान एक ऐसे तेज तर्रार आईपीएस अभिनव कुमार के हाथों में आई है तबसे कुछ जेलों में बंद कुख्यात बदमाशों के मन में अभिनव कुमार का एक बडा डर देखने को मिल रहा है और उन्हें यह इल्म है कि अगर उन्होंने जेल से अपराध किया तो उन्हें इसका बडा खामियाजा भुगतना पडेगा।
उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही देखने को मिलता रहा कि जेलों में बंद काफी कुख्यात अपराधी वहीं से अपने गैंग का संचालन करते रहे और आज भी राज्य की जनता कालाढूंगी में हुये उस कांड को नहीं भूल पाई जिसे दून जेल में बंद एक कुख्यात ने मोबाइल फोन के सहारे अंजाम दिलाया था? कुछ कुख्यात आखिरकार कुछ जेलों में कैसे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते रहे हैं यह हैरान करने जैसा ही नजर आता है क्योंकि जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता वहां अगर कुछ कुख्यात अपराधियों के पास फोन मौजूद रहे तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिस्टम के कुछ लोग भी अपराधियों के साथ मिले हुये रहते हैं? उत्तराखण्ड की चंद जेलों में कुख्यात बदमाशों ने दर्जनों बार उद्यमियों से फिरौती मांगी और जेल से ही हत्या कराने का खेल खेला वह उत्तराखण्ड के लिए घातक ही माना गया? एक्स डीजीपी ढोल पीटते रहे कि जेलों में बंद कुख्यात बदमाशों पर नकेल लगाई जायेगी लेकिन वह अपने कार्यकाल में चंद जेलों में बंद कुछ बडे-बडे कुख्यात बदमाशों द्वारा चलाये जा रहे गैंग पर नकेल लगाने में फिस्ड्डी ही साबित हुये थे? अब उत्तराखण्ड जेल की कमान अभिनव कुमार के हाथों में है और अब उनकी पैनी नजर जेलों से चल रहे कुख्यात बदमाशों पर जरूर लगेगी और जेलों से कुख्यातों का चल रहा साम्राज्य का खेल भी खत्म होगा ऐसी आशा अब राज्यवासियों और उद्यमियों में दिखाई दे रही है। यह तय माना जा रहा है कि आवाम को अपराधियों से आजादी दिलाने की दिशा में शेरदिल अभिनव कुमार एक बडे प्लान के तहत आगे बढ़ रहे हैं जिससे जेलों से होने वाले अपराध अब थम गये हैं।

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