अपराध जगत में अभिनव का अभी भी डर

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पुलिस के मन से निकाला था जांचो का डर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में भले ही एक साल तक अभिनव कुमार कार्यवाहक डीजीपी के रूप में तैनात रहे लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल में अपराध जगत की नाक में नकेल डालने का जो दौर शुरू किया था उसे देखकर जेल और जेल से बाहर अपराध करने वाले बडे-बडे कुख्यातों के मन में उनका डर देखने को मिला था क्योंकि उन्होंने हर बडे अपराध के बाद खुद मोर्चा संभाला और जब तक अपराधियों को उनके अंजाम तक नहीं पहुंचाया तब तक वह शांत नहीं बैठे थे। इसी के चलते अपराधियों के मन में आज भी उनके नाम का बडा डर देखने को मिल रहा है भले ही वह अभी डीजीपी पद पर नहीं है लेकिन अपराधियों को यह भय है कि वह आज भी उत्तराखण्ड में तैनात हैं और यही कारण है कि अपराध जगत के बडे-बडे शैतानों को आईपीएस अभिनव कुमार का खौफ सताता है।
उत्तराखण्ड में तैनात आईपीएस अभिनव कुमार का एक ही विजन रहा कि अगर किसी भी अपराधी ने अपराध करने का दुसाहस किया तो उसे उसके अंजाम तक पहुंचाना उनका पहला मिशन है। अभिनव कुमार ने अपने एएसपी कार्यकाल से लेकर कार्यवाहक डीजीपी कार्यकाल में अपराधियों को खाकी का जो इकबाल दिखाया उसके चलते हमेशा बडे-बडे अपराधियों के मन में उनका एक बडा डर देखने को मिलता रहा। वर्दी की आन-बान-शान के लिए उन्होंने हमेशा आवाम का रक्षक बनकर अपराध जगत के शैतानों को मिट्टी में मिलाने का जो दौर शुरू किया था उसने आज तक अपराध जगत को भय में डाल रखा है। अभिनव कुमार ने हमेशा बडे-बडे अपराधियों और माफियाओं को इस बात का इल्म कराया था कि अगर उनके राज में किसी ने अपराध करने का कोई भी दुसाहस किया तो उसका अंजाम उन्हें भुगतना पडेगा चाहे वह पाताल में भी जाकर छुप जायें।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही चंद आईपीएस अफसरों ने तो अपने जनपदों में अपराधियों के मन में खाकी का इतना बडा भय पैदा कर रखा था कि वह अपराध करने से भी तौबा करने लगे थे लेकिन जब राज्य के अन्दर वर्षों पूर्व रणबीर मुठभेड कांड हुआ और उसमें काफी दरोगाओं को जेल की सलाखों के पीछे जाना पडा तो उसके बाद से ही पुलिस के इकबाल में वो धमक खत्म होती चली गई जिसके लिए उत्तराखण्ड पुलिस अपराधियों में एक नई पहचान बना चुकी थी। रणबीर मुठभेड कांड के बाद उत्तराखण्ड और बाहरी राज्यों के अपराधियों के मन में यह बात उभर आई कि अगर वह खाकी पर गोली भी चलायेंगे तो पुलिस जवाब में गोली का जवाब गोली से नहीं देगी। अपराधियों ने जो सोचा था उसी राह पर राज्य की पुलिस वर्षों से चलती हुई दिखाई दी और राज्य के कई जनपदों में बडे-बडे ईनामी बदमाश पुलिस के हत्थे चढे और वह जेल जाकर वहां से अपने गैेंग चलाकर व्यापारियों से फिरौती मांगने से लेकर कत्ल करने तक के सौदे करने लगी और उसी के चलते आवाम के मन में अपराधियों का खौफ इतना बढता चला गया कि वह अपने आपको डरा और सहमा हुआ महसूस करने लगा।
वर्षों तक उत्तराखण्ड पुलिस के दिमाग में रणबीर मुठभेड कांड का हश्र धूमता रहा और यही कारण रहा कि पुलिस के कुछ आला अफसर भी अपनी पुलिस को उस दौर में लाकर खडा नहीं कर पाई जहां उसे खडा होना चाहिए था। पुलिस को मित्र पुलिस का तमका दिया गया वह आवाम के लिए तो सुकून भरा जरूर रहा हो लेकिन अपराधियों के लिए पुलिस मित्र के रूप में चंद जनपदो ंके अन्दर देखने को मिली और उसी के चलते बडे-बडे अपराधियों के मन में पुलिस के इकबाल का भय हवा-हवाई होता चला गया। उत्तराखण्ड के डीजीपी रहे अभिनव कुमार ने अपनी पुलिस का इकबाल बुलंद करने की दिशा में उन्हें आगे किया और साफ संदेश दिया कि अगर कोई अपराधी उन पर गोली चलाने का दुसाहस करे तो उसे गोली का जवाब गोली से ही मिलना चाहिए। उत्तराखण्ड पुलिस के मन में एक बडा जोश भरने के लिए अभिनव कुमार ने जो मंत्र दिया था उस मंत्र को धारण कर सभी जनपदों की पुलिस ने अपराधियों के मन में एक बडा खौफ पैदा कर रखा है। आज भले ही अभिनव कुमार डीजीपी के पद पर तैनात नहीं है लेकिन अपराध जगत में उनके नाम का डर आज भी उन्हें भयभीत किये हुये हैै।

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