बेटी पढ़ाओं-बेटी बचाओं का नारा हुआ ‘फुस्स’
नारी शक्ति से टकराना, सरकार को पड़ेगा भारी?
आईपीएस के बाद अब प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने महिला पत्रकार को दिखाई गुंडई
हुजूर अब तो महिला पत्रकार भी नहीं रही सुरक्षित!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड नौ नवम्बर को अपनी रजत जयंती मना रहा है और उसका जश्न मनाने के लिए राज्यभर में बडी तैयारियां की जा रही है तो वहीं राजधानी के एफआरआई में प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर सरकार और सिस्टम रजत जयंती को यादगार बनाने के लिए बडी रणनीति के साथ काम कर रहे हैं। हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड में कुछ अफसर अपने पद के घमंड में इतने चूर हो चुके हैं कि वह मीडिया को अपने निशाने पर लेने से नहीं चूक रहे तो वहीं महिला पत्रकारों के साथ हो रहे तांडव ने यह सवाल खडे कर दिये हैं कि आखिरकार बेलगाम अफसरों की नाक में नकेल डालने के लिए कब सरकार सख्त कदम उठायेगी? कभी कोई पुलिस का बडा अफसर महिला पत्रकार को अपनी वर्दी का रौब गालिब करते हुए उसे तांडव दिखाने से नहीं चूका तो वहीं आज प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने सरेआम एक महिला पत्रकार के साथ अभद्रता और हैवानियत का जो तांडव सबके सामने किया उस तांडव की वीडियो मे दिखाई दे रहे दृश्य यह बताने के लिए काफी हैं कि आखिरकार उत्तराखण्ड में ऐसे बेलगाम अफसरों के होते हुए राज्यवासी कैसे रजत जयंती का जश्न मनाने के लिए अपने आपको आगे करेगा यह एक बडा सवाल अब उत्तराखण्ड की वादियों में तैरने लगा है। गजब की बात तो यह है कि सरकार बेटी बचाओ बेटी पढाओ का नारा दे रही है और कुछ अफसर देवियों को अपमानित कर उन्हें खुलकर अपनी सरकारी ताकत दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखण्ड किस राह पर आगे बढ रहा है?
उत्तराखण्ड सरकार दावा करती आ रही है कि मीडियाकर्मियों की रक्षा होगी और उन्हें सरकार हमेशा सुरक्षा कवच देगी लेकिन सरकार का यह दावा राज्य में पिछले कुछ माह के भीतर हवा हवाई होता हुआ नजर आया है? राज्य में जब आपदा आई तो एक जनपद में एक महिला पत्रकार जब वहां रिपोटिंग करने के लिए गई तो पुलिस के एक बडे अफसर ने घमंड में चूर होकर उसे अपनी वर्दी का खूब रौब दिखाया और उसके साथ अभद्रता की सारी हदें पार कर यह साबित कर दिया था कि वह राज्य के अन्दर इतना पॉवरफुल है कि वह किसी को भी अपनी वर्दी के इस इकबाल से भयभीत कर सकता है? इस अफसर के घमंड के किस्से किसी से छिपे नहीं है और महिला पत्रकार के साथ जो कुछ हुआ उस पर अगर सरकार सख्त एक्शन लेती तो यह मान लिया जाता कि मीडिया को सरकार सुरक्षा कवच दे रही है? वहीं आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल पर एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है निदेशक ने पत्रकार सीमा रावत पर हाथ उठाया और उनका मोबाइल फोन छीन लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसके बाद पत्रकार संगठनों, अभिभावकों और आम जनता में व्यापक विरोध दर्ज किया जा रहा है।
बता दें कि यह मामला डाइट डी.एल.एड प्रशिक्षित अभिभावकों से जुड़ा है, जो अपनी मांगों को लेकर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे थे। अभिभावकों की मुख्य मांग थी कि वर्तमान बैच को भी प्राथमिक शिक्षा भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए। सुबह से ही अभिभावकों की ओर से लगातार कवरेज के लिए कॉल आ रहे थे, जिस पर एक महिला पत्रकार सीमा रावत मौके पर पहुंचीं। निदेशालय में अभिभावकों और निदेशक के बीच बहस तेज हो गई। इस दौरान सीमा रावत ने मोबाइल से कवरेज शुरू किया। इसे देखते ही निदेशक अजय नौडियाल आक्रोशित हो गए और पत्रकार पर हाथ उठाते हुए उनका मोबाइल छीन लिया। पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई, जो अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल है।
उधर सोशल मीडिया पर विरोध की लहर उठी है और वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद निदेशक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पत्रकार संगठनों ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला करार दिया है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि यदि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी मीडिया कवरेज से इतना बौखला जाते हैं कि एक महिला पत्रकार भी सुरक्षित नहीं रहती, तो राज्य में प्रेस की आजादी खतरे में है।
पिछले कुछ समय से ऐसे मामले सामने आने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि मीडिया की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में है? सरकारी कार्रवाई महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी पर राज्य सरकार क्या कदम उठाएगी? निष्पक्ष जांच क्या इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? अभिभावकों ने भी निदेशक पर हाथापाई का आरोप लगाया है। फिलहाल, शिक्षा विभाग या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। मामले की जांच की मांग जोर पकड़ रही है?

