आवाम की एक ही पुकार भ्रष्टों की सोने की लंका जला दो पुष्कर

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखंड में भ्रष्टाचार का जड से अंत करने के लिए युवा राजनेता पुष्कर सिंह धामी को चुना और उन्हें मुख्यमंत्री की कमान सौंप दी गई। मुख्यमंत्री ने नरेन्द्र मोदी की उम्मीदों पर शत प्रतिशत खरा उतरने की दिशा में अपने कदम लगातार आगे बढा रखे है और उन्होंने जिस जज्बे के साथ उत्तराखंड को आदर्श राज्य बनाने के लिए भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों, माफियाओं को सबक सिखाने का आपरेशन चलाया है उससे ऐसे भ्रष्ट तंत्र की चूले हिल गई है और उसी को देखते हुए उत्तराखंड के पहाड से लेकर मैदान तक आवाम एक ही पुकार लगा रहा है कि भ्रष्टाचारियों की सोने की लंका में आग लगा दो पुष्कर।
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार और माफियागिरी के बल पर दौलत कमाने वाले सफेदपोश, भ्रष्ट राजनेता और भ्रष्ट अफसरों को अब पुष्कर के बढते कदम उन्हें डराने लगे है और जिस दिलेरी के साथ मुख्यमंत्री ने सत्ता चलाने का अंदाज आवाम के सामने रखा है वह अंदाज आवाम को खूब रास आ रहा है और अब उत्तराखंड के अंदर आवाम की एक ही पुकार है कि भ्रष्टाचारियों की सोने की लंका जला दो पुष्कर। उत्तराखंड के अंदर विकास का जो आईना आवाम को दिखना चाहिए था वह एक दशक तक उसे कभी रास नहीं आया क्योंकि उत्तराखंड के विकास के लिए जो पैसा आता रहा उसमें भ्रष्ट राजनेताओं, अफसरों और काफी सफेदपोशों ने जो पर्दे के पीछे रहकर बडा खेल खेला उसी का परिणाम है कि ऐसे भ्रष्टों ने राज्य के विकास के पैसे से अपना विकास किया और दौलत का जो बडा अंबार उन्होंने राज्य और राज्य के बाहर गुप्त रूप से खडा किया है उस पर अब प्रहार करने के लिए मुख्यमंत्री ने अपना चक्र भ्रष्टाचारियों के खिलाफ चलाना शुरू किया है उससे उत्तराखंड की जनता पुष्कर सिंह धामी को राजनीति का सुपर स्टार मानने लगी है।
उत्तराखंड का जब जन्म हुआ तो देहरादून के विकास के लिए दिल्ली से इतना पैसा आया था कि अगर उस पैसे के अंदर बंदरबांट का खेल न खेला जाता तो देहरादून भी उन विकास शहरों में शामिल हो गया होता जिन शहरों को देखकर देश की जनता खुल कर नाज करती है। भ्रष्ट राजनेताओं और भ्रष्ट सफेदपोशों ने राज्य के काफी भ्रष्ट अफसरों के साथ पर्दे के पीछे रहकर हाथ मिलाया और उसके बाद उन्होंने भ्रष्टाचार का जो खुला खेल खेला वह राज्य की जनता से कभी छुपा नहीं रहा? हैरानी वाली बात तो यह है कि कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने तो भ्रष्टाचार का खुला खेल देखने के बावजूद खुद को धृतराष्ट्र के रूप में लाकर खडा कर दिया था। उत्तराखंड के अंदर भ्रष्टाचार, घोटाले और माफियागिरी ने आवाम के मन में चंद सरकारों को लेकर जो नफरत दिखाई थी वह किसी से छिपी नहीं रही और चंद पूर्व मुख्यमंत्री खुद भ्रष्टाचार को लेकर आवाम के निशाने पर हमेशा आते रहे? उत्तराखंड के अंदर भ्रष्टाचार के खिलाफ लडने का भोंपू तो कुछ पूर्व मुख्यमंत्री खूब बजाते रहे लेकिन उनका यह भोंपू हमेशा हवा हवाई ही दिखाई दिया और राज्य की जनता के मन में उत्तराखंड के एक दो पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा कोई जगह नहीं बना पाया था।

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