नशा मुक्ति केन्द्रों पर सरकार सख्त

0
144

प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में युवा पीढी नशे के जिस दलदल में फंसती जा रही है वह प्रदेश के लिए काफी घातक है और उनके परिजनों में इस बात को लेकर बेहद चिंता है कि उनके अपने लाडले नशे के मकडजाल में जिस तेजी के साथ फंसते जा रहे हैं वह उन्हें मौत के रास्ते पर आगे ले जा रहा है। उत्तराखण्ड के कुछ जिलों में युवा पीढी नशे में डूबती जा रही है उसको देखते हुए वहां नशामुक्ति केन्द्रों ने अपनी पैठ बना ली है और युवाओं को नशे से बचाने के लिए उनके परिजन बडी राशि देकर उन्हे वहां भर्ती कराते हैं लेकिन काफी नशामुक्ति केन्द्रों में नशा करने वाले युवकों के साथ तांडव होता है वह कई बार साफ देखने को मिल चुका है। चंद जनपदों में नशामुक्ति केन्द्रों के संचालकों द्वारा युवाओं को पीटा गया उससे उनकी मौत हुई तो उसके बाद काफी बवाल मचा था और उसी के बाद मुख्यमंत्री ने नशामुक्ति केन्द्रों पर सख्त रूख अपनाने के लिए अपने कदम आगे बढाये थे। प्राईवेट नशा मुक्ति केन्द्रों में चल रहे तांडव को देखते हुए स्वास्थ्य सचिव ने भी उनसे निपटने के लिए बडे विजन के साथ काम करना शुरू कर रखा है और अब जिस तेजी के साथ नशा मुक्ति केन्द्रों को स्वास्थ्य महकमे ने अपनी रडार पर लेना शुरू किया है उससे नशामुक्ति केन्द्र के संचालकों को इस बात का इल्म हो चुका है कि अगर उन्होंने अपने यहां भर्ती युवकों के साथ कोई भी अत्याचार किया तो उन्हें इसका बडा खामियाजा भुगतना पडेगा।
उत्तराखंड में जिस तरह से अक्सर नशा मुक्ति केन्द्रों में नशा करने वाले युवकों के साथ अत्याचार के मामले के सामने आ रहे है उसको लेकर पुष्कर सरकार सख्त रूख अपनाकर आगे आ गई है और इसी के चलते स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने अपने रूख को साफ किया है उससे साफ झलक गया है कि राज्य में नशा मुक्ति केन्द्रों की अब हैकडी नहीं चल पायेगी क्योंकि स्वास्थ्य सचिव ने आदेश दिये है कि राज्य में मानसिक स्वास्थ्य नियमावली के लागू हो जाने के बाद काफी सुधार आयेगा। मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण डॉ आर राजेश कुमार का साफ मानना है कि राज्य में संचालित सभी सरकारी एवं गैर सरकारी मानसिक स्वास्थ्य संस्थानो एवं नशा मुक्ति केन्द्रो को तीन माह के भीतर राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण में अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी। स्वास्थ्य सचिव डा0 आर राजेश कुमार ने इसके व्यापक प्रचार- प्रसार प्रिन्ट मीडिया एवं टैली मीडिया के माध्यम से कराये जाने का आदेश दिया हुआ है ताकि आम जनता मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्तियो के अधिकारो से परिचित हो सके एवं मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं नशा मुक्ति केन्द्र इनके अनुरूप अपने केन्द्रो को संचालित करे एवं मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा करे। सरकार ने जिस तरह से नशा मुक्ति केन्द्रों को लेकर अपना सख्त रूख अपनाया है उससे यह साफ संदेश जा रहा है कि अब इनकी मनमानी राज्य के अंदर नहीं चल पायेगी।
उत्तराखण्ड में पिछले लम्बे समय से नशामुक्ति केन्द्रों को सरकार ने जिस तरह से अपनी रडार पर लिया हुआ है उससे उनके मन में अब एक भय है कि उन पर सिस्टम अपनी पैनी नजर बनाये हुये है और अगर उन्होंने कोई भी हठधर्मिता या नशामुक्ति केन्द्र में भर्ती युवाओं के साथ कोई अत्याचार किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो जायेगी।

LEAVE A REPLY