भ्रष्ट नेताओं और अफसरों को मिला जादुई चिराग!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड को हासिल करने के लिए पहाड से लेकर मैदान तक के हजारों लोगों ने एक बडा आंदोलन किया था और राज्य को पाने के लिए उन्होंने पुलिस के जुल्म सहे और कुछ आंदोलनकारियों को इस आंदोलन में अपने प्राण की आहूति देनी पडी थी तब जाकर उत्तराखण्ड राज्य बना था। उत्तराखण्ड एक हराभरा और स्वच्छ राज्य बने इसके लिए करोडो राज्यवासियों ने मन में उम्मीदों का एक ख्वाब देखा था कि उनके राज्य में भ्रष्टाचार और माफियागिरी का साम्राज्य कभी खडा नहीं होगा लेकिन राज्य बनने के बाद से ही राज्यवासियों का वो ख्वाब टूटता चला गया जिसको लेकर उन्होंने सपना संजोया था कि उनका अपना उत्तराखण्ड एक मिसाल बनकर उभरेगा। उत्तराखण्ड में दर्जनों भ्रष्ट नेताओं और अफसरों ने दौलत कमाने के लिए पर्दे के पीछे रहकर हाथ मिलाये और उन्होंने एक सिंडिकेट की तरह काम करना शुरू किया जिसके चलते वह दौलत कमाने के उस सफर पर आगे बढते चले गये जिस सफर के रूकने का कोई स्टेशन नहीं था। भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की दौलत कमाने के हुनर की हर सरकार के अन्दर खूब चर्चाएं रही लेकिन कोई भी इन भ्रष्टों के खिलाफ कार्यवाही करने का साहस नहीं दिखा पाया था यह भी एक आज तक बडा सच है? सवाल आज भी राज्य के गलियारों में उडते आ रहे हैं कि ऐसे भ्रष्ट नेताओं और अफसरों को आखिर कौन सा ऐसा जादुई चिराग मिल गया था जिसे घिस-घिसकर वह दौलत का वो साम्राज्य खडा करते चले गये जिसकी कोई सीमा ही नहीं है? अगर ऐसे भ्रष्टों के खिलाफ सरकारें एक्शन नहीं ले पाई तो उससे समझा जा सकता है कि भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने का ऑपरेशन सिर्फ छोटी मछलियों को ही जाल मे फंसाकर अपनी वाह-वाही लूटने तक सीमित है?
उत्तराखण्ड में चाहे किसी की भी सरकार रही हो हर सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का जो काला खेल चलता रहा आ रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करने का संकल्प मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिया हुआ है लेकिन आज भी जेल की सलाखों के पीछे सिर्फ भ्रष्टाचार की छोटी-छोटी मछलिया ही विजिलेंस के हाथो से पकडी जा रही हैं और उनके पास ऐसी कोई पॉवर नहीं है कि वह किसी भी बडे भ्रष्ट राजनेता या अफसर को भ्रष्टाचार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर सके। उत्तराखण्ड में हमेशा से यही आवाज उठती आ रही है कि आखिरकार भ्रष्ट नेताओं और अफसरों के पास ऐसा कौन सा जादुई चिराग है जिसे घिस-घिसकर वह अकूत दौलत के मालिक बनते चले गये और उनके पास कितनी बेनामी सम्पत्तियों का खजाना है वह तब तक बेनकाब नहीं हो सकता जब तक राज्य के अन्दर सशक्त लोकायुक्त का गठन न हो जाये। उत्तराखंड का निर्माण होने से पहले काफी सफेदपोश और राजनेता झोला थैला हाथ में टांगकर पैदल घूमा करते थे और एक दो राजनेताओं के पास तो टूटे फूटे स्कूटर हुआ करते थे लेकिन जैसे ही उत्तराखंड का निर्माण हुआ तो गरीबीकाल में जीवन यापन करने वाले कुछ सफेदपोश और राजनेताओं को राजनीति करने के दौरान न जाने कौन सा ऐसा जादुई चिराग मिल गया जिसके चलते वह उसे घिस घिस कर आज कई सौ करोड रूपये का किला खडा कर चुके है ऐसे सफेदपोशों और राजनेताओं द्वारा कमाई गई दौलत का सच जानने के लिए कब कौन सी एजेंसी इनके दौलत की कहानी का पता लगाने के लिए आगे आयेगी यह हमेशा से ही राज्य के अंदर एक बडा सवाल खडा हो रखा है?
उत्तराखंड का निर्माण करने वाले हजारों आंदोलनकारियों के मन में आज राज्य के पच्चीस वर्ष बाद भी इस बात को लेकर बडी पीडा है कि वह राज्य बनने से पहले जैसे थे वैसे ही वह आज भी है लेकिन उत्तराखंड बनने से पहले जो सफेदपोश राजनेता हाथ में झोला थैला लेकर पैदल या टूटे फूटे स्कूटर पर चला करते थे उन्होंने जब उत्तराखंड के अंदर राजनीति शुरू की तो उन पर नोटों की ऐसी बारिश होनी शुरू हुई मानों उन्हें कोई ऐसा जादुई चिराग मिल गया हो जिसे घिस घिस कर वह दौलत का इतना बडा साम्राज्य खडा करते चले गये जो एक सपने जैसा ही दिखाई देता है। उत्तराखंड के काफी सफेदपोश और राजनेताओं ने दौलत कमाने के लिए भ्रष्टाचार के जिस पायदान पर अपने कदम रखे उस पायदान पर आगे बढते हुए वह इतनी दौलत के बादशाह बन गये जो एक हसीन सपना ही माना जा सकता है। अपने आपको राज्य का हितैषी बताने वाले कुछ भ्रष्ट राजनेताओं के पास दौलत का इतना साम्राज्य मौजूद है कि अगर देश की कोई एजेंसी इनके दौलत कमाने के राज के पन्नों को एक एक करके खंगालने लगे तो उन्हें इस बात का पता चल जायेगा कि यह राजनेता किसी जादुई चिराग को घिस घिस कर दौलतमंद नहीं बने बल्कि इन्होंने भ्रष्टाचार के जिस समुंद्र में गौते लगाये है। वह किसी से छिपे नहीं है लेकिन कोई भी पूर्व सरकार ऐसे भ्रष्ट राजनेताओं की अकूत संपत्तियों को खंगालने की दिशा में कभी आगे नहीं आई जिसके चलते भ्रष्ट राजनेता दौलत पर दौलत कमाते चले गये लेकिन अब राज्य के अंदर ईमानदार छवि के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सत्ता चला रहे है तो आवाम को भरोसा है कि शायद वह उन भ्रष्ट राजनेताओं के उस दौलतमंद किले को ढाने के लिए आगे आयेंगें जिन्होंने भ्रष्टाचार से दौलत का वो साम्राज्य खडा कर दिया है जो फिल्मों में ही अक्सर दिखाई देता है।

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