बेखौफ हैं बेलगाम नौकरशाह!

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पच्चीस सालों मे भी कुछ अफसर ‘हठधर्मी’
चुफाल के ‘वार’ से कठघरे में सरकार
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की हर सरकार में कुछ बेलगाम अफसर सरकारों से भी अपने आपको पॉवरफुल समझकर जिस तरह से आवाम को अपने हाथों की कठपुतली समझते आ रहे हैं उससे एक ही सवाल पनप रहा है कि आखिरकार ऐसे बेलगाम अफसर कब तक बेखौफ होकर यह सोचकर इतराते रहेंगे कि उन पर शिकंजा कसने के लिए शायद कोई भी आगे आने का साहस नहीं करेगा? पच्चीस सालों में हर सरकार के मुखिया ने अफसरशाही को सही दिशा में ले जाने के लिए अपनी रणनीति बनाई लेकिन कुछ अफसर हर सरकार के कार्यकाल में बेखौफ होकर बेलगाम होते रहे हैं यह भी किसी से छिपा नहीं है? बेलगाम होते नौकरशाहों के खिलाफ जिस तरह से कुमांऊ के डीडीहाट से कददावर भाजपा विधायक ने एक टैक्सी निर्माण को लेकर दिखाई जा रही हठधर्मिता पर उन्हें अपने निशाने पर लेते हुए सोशल मीडिया पर उनका तमाशा बनाया है उससे सवाल पनप रहे हैं कि बेलगाम नौकरशाहों पर आखिर कौन नकेल लगायेगा जब चंद अफसर मुख्यमंत्री के आदेश को भी हवा मे उडाने से बाज नहीं आ रहे हैं?
उत्तराखण्ड गवाह है कि राज्य के चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में शासन, प्रशासन व पुलिस के कुछ अफसर बेलगाम होकर अपने आपको सरकार समझते थे और वह राजपाठ चलाने के लिए अहंकार और भ्रष्टाचार की राह पर खूब तेजी से आगे भी निकले थे लेकिन चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के लाडले बने इन अफसरों से राज्य की जनता के मन में सिस्टम को लेकर जो आक्रोश की ज्वाला देखने को मिलती थी वह किसी से छिपी नहीं रही? चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में काफी अफसर बेलगाम होकर आवाम को अपनी ताकत से रूबरू कराते थे और कोई व्यक्ति साहस करके उनके हिटलरपन का विरोध करने का साहस दिखाता था तो उस पर फर्जी मुकदमें लगाकर उसे जेल की सलाखांे के पीछे पहुंचाने का भी खूब तांडव मचा था? वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सखा बने पुष्कर सिंह धामी के हाथों में जब सत्ता आई तो उन्होंने राज्य के अन्दर साफ संदेश दे दिया था कि वह अपने शासनकाल में नौकरशाही को बेलगाम नहीं होने देंगे और यही कारण है कि आज राज्य के किसी भी जनपद से यह आवाज नहीं उठती कि पुष्कर राज मंे ब्यूरोक्रेसी बेलगाम होकर काम कर रही है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने जनसेवक बनकर आवाम को साफ संदेश दे रखा है कि सरकार उनके साथ हर मोड पर खडी है और कोई भी उनके साथ अन्याय नहीं कर पायेगा। मुख्यमंत्री के इस वचन को भापकर ब्यूरोक्रेसी अब सही राह पर आगे बढ रही है और चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में बेलगाम होने वाले अफसरों को अब इस बात का इल्म हो चुका है कि धामी राज मंे उनका अडियल रवैया तिनकाभर भी नहीं चल पायेगा।
उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल मंे उनके लाडले बने काफी अफसर बेलगाम होकर खूब भ्रष्टाचार और तानाशाही का खेल खेला करते थे जिसके चलते आवाम के मन में आज भी उन पूर्व मुख्यमंत्रियों को लेकर बडा आक्रोश दिखाई देता है जिनके कार्यकाल मंे भ्रष्ट और बेलगाम अफसरों ने आवाम को तानाशाही का जहरीला रूप दिखाकर उनके साथ खुला तांडव किया था। एक-दो पूर्व मुख्यमंत्री तो अपने चंद लाडले अफसरों को इतनी खुली छूट दिये हुये थे कि उनकी ओर वह देखना भी पसंद नहीं करते थे कि वह राज्य में किस तरह से राजपाठ चला रहे हैं? कांग्रेस व भाजपा शासनकाल में चंद पूर्व मुख्यमंत्रियांे के कार्यकाल मंे भ्रष्टाचारी, घोटालेबाज, माफियागिरी व खनन माफियाओं का सिंडिकेट कुछ बेलगाम अफसरों के हमराज बने हुये थे और उन्होंने जिस तरह से दोनो हाथों से राज्य के अन्दर लूटमार का आतंक मचाया वह किसी से छिपा नहीं था और यही कारण है कि एक-दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को राज्य की जनता आज भी हिटलरशाह की उपाधि देने से पीछे नहीं हट रही?
वहीं राज्य की कमान जबसे युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संभाली है तबसे उन्होंने राज्य की अफसरशाही को साफ संदेश दे रखा है कि आवाम के साथ किसी भी अफसर ने हिटलरशाही या उसे बेवजह अपनी पॉवर का अनुचित दबाव दिखाते हुए डराने की कोशिश की तो अब उनके राज मंे यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त रूख के चलते राज्य में अफसरशाही सही दिशा में आगे बढती हुई नजर आये लेकिन यह भी सच है कि आज भी कुछ अफसर अपने आपको सरकार से भी बडा समझने के ख्याली पलाव बनाकर अपने आपको राज्य के अन्दर पॉवरफुल दिखाने के एजेंडे पर आगे बढे हुए हैं? चंद अफसरों के कारण एक बार फिर यह बहस शुरू हो रही है कि यह बेखौफ बेलगाम अफसर आखिर किसकी शह पर इतने हठधर्मी हो चुके हैं कि वह मुख्यमंत्री के आदेश को भी हवा में उडाने से बाज नहीं आ रहे हैं?
भाजपा के डीडीहाट से कददावर विधायक बिशन सिंह चुफाल ने कुछ माह के भीतर दूसरी बार सोशल मीडिया पर सामने आकर भ्रष्टाचार और कुछ अफसरों की हठधर्मिता को लेकर उन्हें कठधरे में खडा करते हुए जिस तरह से निशाना साधा है उससे साफ नजर आ रहा है कि आज भी राज्य के अन्दर कुछ बेलगाम अफसर बेखौफ होकर आवाम को अपने हाथो की कठपुतली माने हुये हैं और डीडीहाट में जो टैक्सी स्टैंड कुछ वर्ष पूर्व बन जाना चाहिए था वह आज भी जिस हालात में नजर आ रहा है उसे देखकर विधायक का जो गुस्सा सिस्टम के बेलगाम अफसरों पर फूटा है उससे सवाल पनप रहे हैं कि आखिरकार राज्य के अन्दर बेलगाम अफसरों पर आखिर कौन नकेल लगायेगा?

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