प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य के अन्दर हमेशा कुछ ईमानदार अफसर भ्रष्ट अफसरों की आंखो की किरकिरी बनते रहे हैं यह किसी से छिपा नहीं है। उत्तराखण्ड में हमेशा से काफी ईमानदार अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर आसीन न होने देने के लिए जो चक्रव्यूह कुछ भ्रष्ट अफसर रचते रहे हैं वह यह बताता आ रहा है कि किस तरह से ऐसे अफसर सिस्टम में अपने आपको पॉवरफुल बनाये रखने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं? उत्तराखण्ड में आज भी काफी अफसर ऐसे हैं जो कुछ भ्रष्ट अफसरों के निशाने पर रहते हैं और उनके खिलाफ कहीं न कहीं ऐसा माहौल तैयार किया जाता है कि उन्हें महत्वपूर्ण पद पर आसीन होने से रोका जा सके। उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ अफसरों में हमेशा कोल्डवार का जो खेल दिखाई देता रहा है वह अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है ऐसे में मुख्यमंत्री के विजन को कैसे अफसरशाही धरातल पर उतार पायेगी यह अपने आप में कई सवालों को जन्म दे रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री अफसरों के तबादलों को लेकर अपनी गंभीरता बनाये रखते हैं लेकिन कहीं न कहीं कुछ अफसर ऐसे हैं जो पर्दे के पीछे रहकर ऐसा तानाबाना बुन देते हैं जिससे कि ईमानदार छवि के कुछ अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर आने से रोका जा सके?
उत्तराखण्ड का इतिहास आज भी चीख-चीखकर यह गवाही देता है कि अधिकांश सरकारों के कार्यकाल में कुछ भ्रष्ट अफसर ईमानदार अफसरों को अपने निशाने पर रखते थे और उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर तैनात न होने देने के लिए वह ऐसा चक्रव्यूह रचते थे कि ईमानदार अफसर को हाशिये पर लाकर खडा कर दिया जाये? बेलगाम अफसरशाही को लेकर कुछ सरकारांे में सत्ता और विपक्ष के नेता भी अपनी नाराजगी दिखाते थे और वह यह कहने से भी नहीं चूकते थे कि आखिरकार हर सरकार में चंद अफसर ऐसे कैसे बेलगाम हो जाते हैं कि वह अपने आपको खुद ही ‘सरकार’ समझने लगते थे जिस कारण कई पूर्व मुख्यमंत्रियों ने बेलगाम अफसरशाही को लेकर अपनी नाराजगी प्रकट की थी? अब उत्तराखण्ड में पिछले कुछ समय से कुछ अफसरों ने अपने आपको पॉवरफुल साबित करने के लिए जिस तरह से कुछ ईमानदार अफसरों को अपने निशाने पर लेकर उन्हें सरकार की आंखों में किरकिरी बनाने का जो चक्रव्यूह रचा है उसे देखकर साफ नजर आ रहा है कि कुछ अफसरों के बीच राज्य मंे एक बार फिर बडे गोपनीय तरीके से कोल्डवार शुरू हो गई है? ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक एजेंडे पर चलते हुए चंद अफसर कोल्डवार का चक्रव्यूह रचकर एक बडी रणनीति के तहत अपने मिशन में आगे बढ रहे हैं? अगर सरकार राज्य में कुछ अफसरों के बीच चल रही कोल्डवार को भाप नहीं पा रही है तो यह उसके लिए भी शुभ संकेत नहीं हो सकते क्योंकि कुछ सरकारों में ऐसी कोल्डवार की गूंज दिल्ली तक भी सुनने को मिलती रही है?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में कुछ सरकारों के कार्यकाल मंे कुछ अफसरों को इतना पॉवरफुल देखा गया कि वह अपनी पसंद के अफसरों को ही पोस्टिंग दिलाने का खेल खेलते थे और उसी के चलते काफी अफसर भ्रष्टाचार को लेकर राज्यभर में बदनामी का दाग अपने ऊपर लगाये रहे लेकिन पूर्व की कुछ सरकारों ने ऐसे भ्रष्ट अफसरों को कभी भी हाशिये पर लाने के लिए कोई कदम आगे नहीं बढाया? उत्तराखण्ड के कुछ विभागों में भ्रष्टाचार का जो खुला तांडव पूर्व की कुछ सरकारांे में देखने को मिला वह हैरान करने जैसा ही नजर आता था लेकिन उसके बावजूद भी भ्रष्ट अफसरों पर पूर्व सरकारों की दरियादिली हमेशा आवाम को एक दुख देती थी। उत्तराखण्ड में पुष्कर सिंह धामी ने जबसे सरकार की कमान अपने हाथ में ली है तबसे उन्होंने अफसरों को एक सूत्र मंे बांधने का दावा किया था और भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की थी। काफी समय तक तो अफसरशाही के बीच कोई कोल्डवार देखने को नहीं मिली लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल का एक साल भले ही बेमिसाल होने का दावा किया जा रहा है लेकिन कुछ अफसर अपने आपको पॉवरफुल मानकर अपनी आंखों की किरकिरी बने कुछ अफसरों को महत्वपूर्ण पदों से हटवाने के लिए जो कोल्डवार बडे नाटकीय ढंग से शुरू किये हुये हैं उसकी गूंज अब धीरे-धीरे उत्तराखण्ड की वादियांे में सुनाई देने लगी है? कुछ ईमानदार अफसरों के खिलाफ एक बडा चक्रव्यूह रचकर जिस तरह से उन्हें हाशिये पर लाने की कोल्डवार शुरू हो रखी है उसकी आहट सरकार को क्यों सुनाई नहीं दे रही यह हैरान करने जैसा ही दिखाई दे रहा है? उत्तराखण्ड में कुछ ईमानदार अफसर अपने स्वच्छ एजेंडे पर काम करने की चाहत में आगे बढ रहे हैं लेकिन चंद अफसर ऐसे अफसरों को अपने निशाने पर लेकर उन्हें महत्वपूर्ण पदों से हटवाने के लिए जिस तरह से बडे गोपनीय अंदाज में कोल्डवार का आगाज कर चुके हैं वह सरकार के लिए एक चिंता का विषय होना चाहिए?

