उत्तराखण्ड में फैल रहा सोशल मीडिया का जहर!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पत्रकारिता का स्तर लगातार गिराने की दिशा में कुछ पत्रकारों के गैंग लगातार काम कर रहे हैं। यह गैंग पिछले कुछ समय से अपनी ही बिरादरी के लोगों के खिलाफ मुहिम चलाते तो आ ही रहे थे वहीं अब ऐसे गैंग के कर्ताधर्ताओं ने स्वच्छ छवि के अधिकारियों को भी अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। कुंठा के तालाब में डूबे ऐसे गैंग के कलमवीर अपनी विफलताओं से इतने हतोतसाहित हो चुके हैं कि अब उनकी कलम ने पत्रकारिता के धर्म का पालन करना त्याग दिया है और अब इन्होंने सोशल मीडिया को अपनी कुंठा को प्रसारित करने का हथियार बना रखा है। ऐसे लोगों ने उत्तराखण्ड में सोशल मीडिया का जहर फैलाने का काम शुरू किया हुआ है? खुद की विश्वसनीयता खो चुके ऐसे गैंग के पत्रकारों ने एक समय पर अपने ही बिरादरी के उन पत्रकारों को निशाना बनाया था जो हमेशा से अपनी कलम से सच लिखते आए हैं और जिन्होंने हमेशा से समाज को हकीकत का आईना दिखाया। कुंठा से ग्रसित ऐसे गैंग के पत्रकारों ने पूर्व में कई बार ऐसी साजिशें रची, जिससे कि हकीकत लिखने वाले पत्रकारों पर शिंकजा कस सके लेकिन साजिश के कई जाल बिछाने के बाद भी वहा सफल नहीं हो पाए क्योंकि सच का पराजित नहीं किया जा सकता। अब इस गैंग के पत्रकारों ने उत्तराखण्ड राज्य के स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। स्वच्छ अधिकारियों के खिलाफ इस गैंग ने सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार शुरू कर दिया है। इस गैंग के पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर अपनी कुंठा को जाहिर करते हुए एक स्वच्छ अधिकारी के खिलाफ अनर्गल पोस्ट प्रसारित करनी शुरू कर दी है। हालांकि अधिकारी ने भी सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ चल रही इन भ्रामक खबरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की है और खुद राजधानी के पुलिस कप्तान इन मामले का संज्ञात लेते हुए एफआईआर दर्ज कराकर ऐसा करने वालों की तलाश शुरू कर दी है। वह दृश्य कितना रोमांचक और आश्चर्यजनक होगा जब कुंठा से लबरेज ऐसे गैंग के पत्रकार बेनकाब होंगे सबको पता चलेगा की आखिर कौन थे वो जो स्वच्छ अधिकारी के खिलाफ सोशल मीडिया में भ्रामक प्रचार कर रहे थे।
किसी राज्य की उपलब्धियां ही उसके स्वर्णीम काल को बयां करती हैं। जब यह नजर आता है कि राज्य के हर क्षेत्र में विकास तेजी के साथ बढ़ रहा है तो इस बात का अंदाजा खुद ही लग जाता है कि उस राज्य की सरकार और उसके अधिकारी जनहित में कितनी संजीदगी से काम कर रहे हैं। मौजूदा काल को जानकार उत्तराखण्ड का स्वर्णीम काल कह रहे हैं। उनका ऐसा मानना इसलिए भी है क्योंकि पिछले 25 सालों में जिस तेजी के साथ विकास की गंगा उत्तराखण्ड में गत कुछ वर्षों में बही है, ऐसी तेजी पिछली सरकारों के राज में देखने के नहीं मिली। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिन्हें खुद के देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपना मित्र मानते हैं, उनके राज में डबल इंजन की सरकार एक्सप्रेस की गति से हर क्षेत्र में विकास के काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विवेक कुशलता से हर कोई परिचित है और अपने अधिकारियों कि नियुक्तियों को लेकर उनकी पारदर्शिता का भी हर कोई कायल है। राज्य के अधिकांश विभागों में उन्होंने ऐसे अधिकारियों को तैनात किया हुआ है जो संबंधित विभागों के एकदम सही अधिकारी हैं। सीएम द्वारा तैनात किए गए अधिकारियों ने भी कभी उन्हें निराश नहीं किया। उत्तराखण्ड का सूचना एवं लोक संपर्क विभाग खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास है। इस विभाग की महत्वता को देखते हुए सीएम ने इस विभाग के महानिदेशक के रूप में वरिष्ठ अधिकारी बंशीधर तिवारी को नियुक्त किया था। अपनी नियुक्ति के बाद से ही बंशीधर तिवारी ने अपने कर्तव्यों का निर्वाह्न पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ किया हैं और यहीं कारण है कि उनके खिलाफ संभवत: कभी कोई शिकायत सरकार के पास नहीं आई। हैरान करने वाली बात है कि बंशीधर की सच्ची निष्ठा किसी की आंखों में इतनी चुभ गई कि लोग उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करने में जुट गए। बताया जा रहा है कि कुंठा से ग्रसित पत्रकारों के एक गैंग ने साजिश के तहत सोशल मीडिया पर बंशीधर तिवारी के खिलाफ सोशल मीडिया में भ्रामक प्रचार करने कुकृत्य किया था। जिसके खिलाफ एक्शन लेते हुए सूचना महानिदेशक ने राजधानी के पुलिस कप्तान के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। जिस पर पुलिस कप्तान के निर्देशों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कितनी अफसोसजनक बात है कि किसी गैंग के कुछ पत्रकार कुंठा के तालाब में इतने डूब चुके हैं कि उन्हें स्वच्छ छवि वाले बंशी की निष्पक्षता भी चुभने लगी है।

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