गिरगिट से भी तेज रंग बदलती मीडिया

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ईमानदार अफसरों के खिलाफ भी रची जा रही साजिश?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के शासनकाल में पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ चल रही सरकार काफी राजनेताओं और सफेदपोशों को रास नहीं आ रही है और वह किसी न किसी बहाने राज्य के मुखिया को पर्दे के पीछे रहकर तथाकथित कुछ कलमवीरों को आगे करके उन्हें बदनाम करने व अस्थिर करने का जो चक्रव्यूह रचा जा रहा है उसमें वह जब सफलता से चूकने लगे तो उन्होंने अब कुछ ईमानदार अफसरों के खिलाफ भी साजिश रचने का हथियार सोशल मीडिया को बना लिया है और फर्जी आईडी के सहारे वह सरकार व उनके कुछ अफसरों को एक शैतान बनकर टारगेट करने के ऑपरेशन पर आगे बढे हुये हैं जो उत्तराखण्डवासियों को एक पीडा दे रहा है और सवाल खडा हो रहा है कि आखिरकार इस पूरे एजेंडे के पीछे आखिर वो कौन से चेहरे हैं जो मुख्यमंत्री और उनके कुछ अफसरों को अपने निशाने पर लेना का तांडव करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। मीडिया के कुछ लोग गिरगिट से भी तेज रंग बदलने में माहिर हो गये हैं और वह अपनी तिजोरी भरने के लिए किसी भी अफसर का चीरहरण करने से भी नहीं चूक रहे हैं ऐसे में मुख्यमंत्री को उस सारी साजिश को बेनकाब करने के लिए आगे आना चाहिए जो उन्हें व उनकी टीम के कुछ अफसरों को राज्यभर में बदनाम करने का चक्रव्यूह रच रहे हैं?
उत्तराखण्ड का एक दौर ऐसा भी देखने को मिला जहां मीडिया ने कुछ सरकारों में हो रहे भ्रष्टाचार और घोटालों को बेनकाब करने के लिए कोई कसर नहीं छोडी और उन्हांेने सरकारों और सिस्टम को यह आईना दिखा दिया था कि सभी कलमवीर गुलाम नहीं हो सकते? चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल मंे कुछ भ्रष्ट अफसरों और राजनेताओं द्वारा किये गये भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए कुछ कलमवीरों अपने भविष्य को दांव पर लगाते हुए आवाम के सामने वो सच पिरोया था जो सत्ता के गलियारांे में चल रहा था और सत्य को उजागर करने के लिए पूर्व सरकारांे के चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों ने कुछ कलमवीरों के खिलाफ फर्जी मुकदमें दर्ज करवाये और उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार भाजपा शासनकाल के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ंिसह रावत ने सरकार को आईना दिखाने वाले कुछ पत्रकारों के खिलाफ अपनी सत्ता का खुला दुरूपयोग करते हुए उन पर फर्जी राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराने से भी परहेज नहीं किया था और इस फर्जी राजद्रोह का हश्र उच्च न्यायालय मंे ऐसा हुआ था कि उच्च न्यायालय ने फर्जी राजद्रोह को खारिज कर दिया था। मुख्यमंत्री के चार साल के कार्यकाल में कभी पत्रकारों के खिलाफ सरकार ने किसी भी खबर को लेकर कोई द्वेष भावना नहीं दिखाई लेकिन इसके बावजूद भी कुछ मीडियाकर्मी एक एजेंडे के तहत सरकार के मुखिया और उनके कुछ अफसरों को साजिश के तहत बदनाम करने के एजेंडे पर आगे बढे हुये हैं।
उल्लेखनीय है कि काफी मीडिया अब चौथा स्तम्भ के बजाए गुलामियत की जंजीरों में कैद रहकर अपने को सुरक्षित रखने और अपने लिए मिठाई के डिब्बों की व्यवस्था करना उसके लिए सबसे बडा ऐजंडा हो गया है? गजब की बात तो यह है कि राज्य का काफी मीडिया पिछले लम्बे समय से गिरगिट से भी ज्यादा तेज रंग बदलने में माहिर हो चुका है और वह अपना रंग बदलने के लिए हर समय भ्रष्ट सफेदपोशों और भ्रष्ट अफसरों के इशारे पर किसी भी ईमानदार अफसर के खिलाफ राज्यभर में एक माहौल बनाने के लिए अफवाहों का दौर ऐसे शुरू कर देता है जिससे कि वह ईमानदार अफसरों को निशाने पर ले सके? उत्तराखण्ड में काफी कलमवीर आज के इस दौर मंे सिर्फ एक ही एजेंडे पर काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि किस तरह से वह अपनी कलम को चलाये जिससे कि उन्हें आर्थिक लाभ का प्रसाद मिलता रहे और इसके लिए वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार दिखाई दे रहे हैं? उत्तराखण्ड में मौजूदा दौर मंे जिस तरह से काफी मीडियाकर्मियों ने अपनी बोली लगाते हुए कुछ भ्रष्ट नेताओं और सफेदपोशों की गुलामियत को स्वीकार किया है वह उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य के लिए घातक ही दिखाई दे रहा है? आज के इस दौर में उत्तराखण्ड के अन्दर मीडिया पर आवाम का जिस तरह से भरोसा उठता जा रहा है उसी का परिणाम है कि आज सोशल मीडिया पर लोग आवाम को सच का आईना दिखाने से नहीं चूक रहे हैं जिससे चौथा स्तम्भ अपना विश्वास खोता जा रहा है?
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड में एक ओर सरकार राज्य को आदर्श राज्य बनाने का संकल्प लिये हुये है तो वहीं आवाम को सच का आईना दिखाने वाली मीडिया का उत्तराखण्ड में आये दिन स्वरूप जिस तेजी के साथ बदलता जा रहा है वह उत्तराखण्ड के आवाम के लिए घातक दिखाई दे रहा है? हैरानी वाली बात है कि अपने आपको कलमवीर कहने वाले कुछ मीडियाकर्मी चंद भ्रष्ट नेताआंे और सफेदपाशों के हाथों की इन दिनों खुलकर कठपुतली बने हुये हैं और उनके इशारे पर वह चंद ईमानदार अफसरों को लेकर अफवाहों का जो ढोेल पीटने में लगे हुये हैं उसे देखकर तो राज्य के अन्दर अब यह आवाज उठनी शुरू हो गई है कि मीडिया के कुछ लोग गिरगिट से भी तेज रंग बदलने में माहिर हो चुके हैं?

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