तीन राजनेताओं पर राज्यवासियों की टिकी नजरें
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का मौसम देखकर गढवाल से लेकर कुमांऊ तक आवाम के मन में एक ही सवाल तैर रहा है कि आखिर राज्य में कब नई ऋतु आयेगी? अक्टूबर के महीने में उत्तराखण्ड की फिजाओं में जिस तरह से ठंडक का अहसास हो रहा है वह यह सोचने को मजबूर कर रहा है कि उत्तराखण्ड मंे ऋतु अपने हिसाब से अपना मिजाज बदलती है? वहीं उत्तराखण्ड में जहां राज्य के मुख्यमंत्री को ताकतवर मुख्यमंत्री का खिताब दिया जा रहा है वहीं उत्तराखण्ड में सरकार से ज्यादा आवाम की निगाहें तीन राजनेताओं पर लगी हुई हैं कि वह किस राह पर अपने कदम आगे बढा रहे हैं? इन दिनों जहां मुंबई के पूर्व राज्यपाल व उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगदा राज्य के मुख्यमंत्री के विकास कार्यों का बखान अपनी सभाओं में कर रहे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल ने जबसे उत्तराखण्ड में अपनी वापसी की है उसके बाद से ही भाजपा के बडे नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका जिस गर्मजोशी से वैलकम कर रखा है वह भाजपा के ही कुछ राजनेताओं के पेट में जरूर दर्द कर रहा होगा? भगतदा ने उत्तराखण्ड आकर पहले आवाम के बीच जाकर जिस अंदाज में अपने बोल बचन शुरू कर रखे हैं उसे देखकर साफ नजर आ रहा है कि वह राज्य के मुख्यमंत्री के सारथी बनकर उनके साथ खडे हुये हैं। वहीं पिछले काफी समय से उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार से सांसद ने भी युवाओं के आंदोलन को अपना साथ देकर उन्हें अपना मानते हुए पेपर लीक प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी वह मांग पूरी होने पर सांसद के अपने खुलकर राज्य के कुछ जिलों में जश्न मना रहे हैं। वहीं कोटद्वार से विधायक व विधानसभा अध्यक्ष ने भी अपने इलाके में विकास को लेकर जो एक नई पटकथा लिखनी शुरू कर रखी है उससे वह भी लम्बे समय से सुर्खियों में है क्योंकि उन्होंने जिस अंदाज में अफसरों की क्लास लेने का जो दौर शुरू कर रखा है उसे देखकर राज्य की जनता प्रदेश के अन्दर दिखाई दे रहे उतार चढाव के इस दौर को लेकर कई सम्भावनाओं पर खुलकर चर्चा करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
उत्तराखण्ड की वादियांे में भले ही सर्दी का आभास होने लगा हो लेकिन आज राजनीति में सर्दी के दौर में भी राजनीतिक गर्माहट का आभास आवाम को खूब हो रहा है लेकिन अभी भी गर्मी के कुछ पल आवाम को सर्दी का आभास करा रहे हैं और आवाम यह सोचने को मजबूर है कि आखिर उत्तराखण्ड में नई ऋतु कब आयेगी? बेमौसम की बारिश देखकर राज्यवासी भी अचंभित हो रखे हैं वहीं राज्य की राजनीति में कहीं न कहीं एक खामोशी सी दिखाई दे रही है और आज से राज्य मंे जिस तरह से आवाम को बिजली-पानी और दवा महंगी का बडा झटका लगेगा वहीं शराब के शौकीनों को सरकार सस्ती शराब का तोहफा देकर आम आदमी को महंगाई के इस दौर में फिर रूलाती हुई नजर आयेगी? गजब की बात है कि राज्य में अकसर आवाम को बिजली के दामांे में बढोत्तरी का करंट क्यों मिलता रहता है यह समझ से परे है? उत्तराखण्ड में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी ने जब विधानसभा मंे बैकडोर से हुई भर्तियों की जांच कराकर एक कडक कुशल राजनेता की तरह विधानसभा में हुई अवैध नियुक्तियों को बर्खास्त कर उन्हे रद्द किया उससे उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में ऋतु खण्डूरी की बडी सोच देखकर भाजपा के दिग्गज नेता भी कहीं न कहीं गद्गद् नजर आये थे? उधर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जिस तरह से अपनी नई राजनीति का आईना आवाम को दिखाना शुरू किया है वह बडे-बडे राजनीतिक पंडितों को भी समझ नहीं आ रहा है कि आखिरकार त्रिवेंद्र सिंह रावत राजनीति की कौन सी ऐसी पटकथा लिख रहे हैं जिसके चलते उन्होंने कुछ समय पूर्व ही बेरोजगार छात्रों द्वारा पेपर लीक को लेकर जब सीबीआई जांच की मांग की थी तो त्रिवेन्द्र ंिसह रावत ने सरकार के मुखिया से सीबीआई जांच कराने का मास्टर स्ट्रोक चलकर गेंद मुख्यमंत्री के पाले में डाल दी थी और जैसे ही मुख्यमंत्री ने पेपर लीक प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया तो उसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत के समर्थन में बडे-बडे होर्डिंग्स और जुलूस निकले उसने उत्तराखण्ड की राजनीति में एक नई हलचल मचाकर रख दी थी और सवाल खडे हुये थे कि सीबीआई जांच का जो श्रेय मुख्यमंत्री को मिलना चाहिए था वह श्रेय त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने खाते में लेकर बेरोजगार छात्रों के हीरो बन गये।
वहीं उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी जबसे महाराष्ट्र से राज्यपाल का पद छोडकर राज्य में आये हैं तबसे उनका राजधानी से लेकर कुमांऊ के जनपदों में बडे पैमाने पर उनका स्वागत और सत्कार हुआ वह देखने लायक था और जिस तरह से भाजपा नेता, कार्यकर्ता व जिलों की जनता आज भी भगत सिंह कोश्यारी को उसी रूप में बडा स्नेह दे रही है जैसा स्नेह वह उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में उन्हें दिया करती थी। देखने में आ रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी जहां पर भी मंच संभालते हैं वह मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी के विकास कार्यों के खूब कसीदे पढते हैं और वह पुष्कर ंिसंह धामी के सारथी बनकर जिस तरह से उनके साथ अभेद होकर खडे हुये हैं उससे आज एक बार फिर वह चर्चा के केन्द्र में आकर खडे हो गये है।

