देहरादून। मंशा, इस शब्द का अर्थ यदि समझना हो तो उसे बिना उदाहरण के पूर्ण रूप से समझना कुछ हद तक मुश्किल होता है क्योंकि इस शब्द की गहराई इतनी है कि यह किसी भी व्यक्ति और उसके व्यक्तित्व को सही ढंग से बता सकता है। यदि किसी व्यक्ति की मंशा किसी का अहित करने की हो तो उसके व्यक्तित्व में नाकारात्मक बदलाव देखने को मिल ही जाता है। ठीक उसी प्रकार से यदि कोई व्यक्ति किसी के हित में काम करने की मंशा रखता है तो, उसके व्यक्तित्व में साकारात्मकता देखने को मिल जाती है। यदि कोई राज्य विकास की दिशा में बुलंदियों को छूता है तो उससे साफ पता चलता है कि उस राज्य के मुखिया की मंशा कितनी साकारात्मक हैं। किस्मत से बुलंदियों पर पंहुचने का यह सौभाग्य एक लंबे समय के बाद उत्तराखण्ड को प्राप्त हुआ है, जब से इस पहाड़ी प्रदेश की कमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मजबूत हाथों में आई है। राज्य की बागडोर संभालने के बाद से ही सीएम धामी ने यह प्रण ले लिया था कि वह उत्तराखण्ड को देश सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाएंगे और इसके लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ रखी है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस राज्य में प्राकृतिक आपदा का आना प्रत्येक वर्ष लगा रहता है। ऐसी आपदाओं से लडऩे के लिए भी सीएम पुष्कर सिंह धामी हमेशा तैयार रहते हैं। इसका उदाहरण उस समय पूरे विश्व ने देखा जब उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में कई मजदूर फंसे थे और जिनके सुरक्षित रेस्क्यू के लिए सीएम ने खुद मोर्चा संभाला था और उन्हें इस रेस्क्यू में सफलता भी प्राप्त हुई थी। ऐसे कई उदाहरण उत्तराखण्ड के इतिहास में दर्ज हो चुके हैं जो सीएम पुष्कर सिंह धामी के समर्पण को बयां करते हैं। उत्तराखण्ड के विकास को सर्वापरि रखने के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह भी सुनिश्चित किया है कि राज्य का सामाजिक विकास भी निरंतर होता रहे। इसके लिए उन्होंने समाज को एकजुट करने की दिशा में कदम उठाया और राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू किया और ऐसा करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के ध्येय वाक्य को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धरातल पर उतारा है। भौगोलिक विकास और सामाजिक विकास के साथ अब सीएम धामी ने शैक्षिक विकास की तरफ कदम बढ़ाएं हैं। इस बात अनुमान इससे साफ लग जाता है कि उन्होंने राज्य में मदरसा बोर्ड भंग कर दिया और अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2०25 को मंजूरी दे दी, जिसके तहत राज्य के सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्ध होना अनिवार्य होगा। इस कदम से मदरसा बोर्ड का इतिहास बन जाएगा और सभी अल्पसंख्यक विद्यालयों में नई शिक्षा नीति के तहत राष्ट्रीय पाठ्यक्रम लागू होगा। मुख्यमंत्री धामी का यह फैसला भी यूसीसी की ही तरह बहुत ही क्रांतिकारी साबित होने जा रहा है, ऐसा जानकारों का मानना है। जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि उत्तराखण्ड वास्तव एक अद्भुत राज्य है और यह उसका सौभाग्य है कि इस पहाड़ी राज्य को पुष्कर सिंह धामी जैसा एक दुर्लभ सीएम मिला है।
भाजपा शासित राज्यों में विकास की गंगा जिस प्रकार से बह रही है वैसी दूसरे राजनीतिक दलों के शासित राज्यों में देखने को नहीं मिल रही है। डबल इंजन की सरकारों का पूरा फोकस अपने अपने राज्यों विकसित करना है। फिर चाहे वह उत्तर प्रदेश में योगी अदित्यनाथ की सरकार हो या फिर असम में हेमंत बिश्वा शर्मा हर कोई अपने राज्य को बुलंदियों तक पंहुचाने में जुटा हुआ है। भविष्य की तर्ज पर देखें तो यह देश के लिए शुभ संकेत हैं। इस बात को लेकर देश के प्रधानमंत्री भी यह कह चुके हैं एक देश का तभी सफल होता है जब उसके राज्य सफल हों। सफलता के इस क्रम में उत्तराखण्ड भी अग्रिम पंकित में नजर आ रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नेतृत्व में उत्तराखण्ड भौगोलिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। यूसीसी लागू करना, मदरसा बोर्ड भंग करने जैसे कदम उठाकर मुख्यमंत्री धामी ने यह साफ संदेश दिया है कि सामाज में सब बराबर हैं और उत्तराखण्ड का प्रत्येक व्यक्ति के लिए नियम एक ही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इन क्रांतिकारी कदमों ने देश की मीडिया का ध्यान भी अपनी ओर खींचा हैं। बड़े-बड़े मीडिया चैनलों पर होने वाली चर्चाओं में उत्तराखण्ड के सीएम का नाम एक मजबूत सीएम रूप में लिया जाता हैं। कई वरिष्ठ पत्रकारों का तो यहां तक कहना है कि पुष्कर सिंह धामी ने अपने अल्प समय कार्यकाल में जनहित के लिए जो क्रांतिकारी फैसले लिए हैं, ऐसे फैसले कई दिग्गज पूर्व सीएम भी नहीं ले पाए थे। उनका कहना है कि ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूत मंशा की आवश्यकता होती है और सीएम धामी इस मजबूत मंशा के धनी हैं। यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि सीएम पुष्कर सिंह धामी की मजबूती की वजह से ही आज उत्तराखण्ड देश का अव्वल राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है।

