मास्टर-ब्लास्टर पुष्कर

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। जब भी कानों में ‘मास्टर-ब्लास्टरÓ शब्द सुनाई देता है तो एक ही नाम जहन में कौंध जाता है, सचिन तेंदुलकर। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन को ‘मास्टर-ब्लास्टरÓ की उपाधि इसलिए दी गई है क्योंकि उन्होंने क्रिकेट के अपने सफर में अपने खिलाफ गेंदबाजी करने वाले किसी भी गेंदबाज को नहीं बख्शा था। उनके बारे में कहा जाता है कि जो भी गेंदबाज उन्हें एक बार जिस तरीके से आउट करता था वह, उन्हें दूसरी बार उस तरीके से आउट नहीं कर पाता था। इसका मुख्य कारण यह रहता था कि सचिन अपनी गल्तियों को दुबारा दोहराते नहीं थे। यहीं कारण है कि वह आज क्रिकेट की दुनिया में एक महान् हस्ती हैं, और उन्हें ‘गॉड ऑफ क्रिकेटÓ की संज्ञा भी दी जाती है। ऐसा नहीं है कि ‘मास्टर-ब्लास्टरÓ सिर्फ क्रिकेट की पिच पर ही होते हैं, कुछ तो सियासत की पिच पर भी पाए जाते हैं। ऐसे ही एक Óमास्टर-ब्लास्टर’ है उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। पहाड़ी प्रदेश की सियासी पिच भर सीएम धामी ऐसी धुंआधार बल्लेबाजी कर रहे है कि उनके नेतृत्व में भाजपा इतिहास रचते हुए उत्तराखण्ड में लगातार दूसरी बार डबल इंजन की सरकार स्थापित करने में सफल हो पाई। जिस प्रकार से क्रिकेट की पिच बांउसर एक बल्लेबाज को हिला देती है, उसी प्रकार उत्तराखण्ड की सियासी पिच पर भी सीएम धामी को एक बाउंसर बदरीनाथ उपचाव के परिणामों ने दी थी। हालांकि इस परिणाम से सबक लेते हुए उन्होंने केदारनाथ में हुई उपचुनाव में ऐसी बांउसरों को तोड़ ढूंढकर वहां के परिणाम को बदलते हुए भाजपा के पक्ष में कर दिया। सियासी पिच पर राजनीति-रणनीति के बढिय़ा स्ट्रोक खेलते हुए जिस प्रकार से सीएम धामी ने अपनी सरकार को मजबूती प्रदान करने का काम किया है, उससे हाईकमान का भरोसा भी उन पर और बढ़ गया है।
उल्लेखनीय है कि केदारनाथ विधानसभा सीट के उपचुनाव में जो भाजपा को जीत मिली है उसने न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार किया है, बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का राजनीतिक कद भी बढ़ाया है। ज्ञात हो कि कुछ समय पूर्व हुए बदरीनाथ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को मिली हार ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया था। कुछ भीतरघातियों ने सरकार के अंदर रहते हुए ही अपनों के खिलाफ षडय़ंत्र रचने भी शुरू कर दिए थे। हालांकि अपनी कुशल राजनीति के दांव पेंचों से सीएम धामी ने ऐसे षडय़ंत्रों को कुचल कर रख दिया और उसका परिणाम केदारनाथ विधानसभा के उपचुनाव में साफ देखने को मिल गया। सरकार और भाजपा संगठन दोनों ने अल्टीमेट टयूनिंग के साथ चुनाव लड़ा और अपने विपक्षियों को चारों खाने चित करते हुए जीत हासिल की। दिवंगत भाजपा विधायक शैलारानी रावत के निधन के कारण खाली हुई विधानसभा की केदारनाथ सीट को अपने पास बनाए रखने की भाजपा के सामने चुनौती थी। जिसको मद्देनजर रखते हुए सरकार और संगठन ने ग्राउंड लेवल पर आक्रमकता से काम करते हुए पार्टी की जीत को सुनिश्चित करने की दिशा में अपने कदम आगे बढ़ाए थे। एक मास्टर स्ट्रोक के तहत सीएम पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ क्षेत्र में जाकर यह एलान किया कि जब तक उपचुनाव नहीं हो जाता, तब तक वह यहां के विधायक के रूप में काम करेंगे। उनका एक मास्टर स्ट्रोक यह भी था कि केदारनाथ क्षेत्र के लिए सात सौ करोड़ की योजनाओं की घोषणाएं होने के साथ ही इनके शासनादेश भी जारी हुए। उपचुनाव में भाजपा के प्रचार अभियान की अगुआई भी मुख्यमंत्री धामी स्वयं कर रहे थे। उन्होंने क्षेत्र में पांच जनसभाओं व दो बाइक रैलियों में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ क्षेत्र के विकास कार्यों को रेखांकित किया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के केदारनाथ धाम के प्रति विशेष स्नेह को भी उजागर किया। उपचुनाव के प्रचार अभियान के दौरान विपक्ष ने मुख्यमंत्री की घेराबंदी भी की, लेकिन परिणाम बता रहे हैं कि विपक्ष अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया।
यह बात तो जगजाहिर है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस पहाड़ी राज्य के हित में कई उल्लेखनीय कार्य कर रहे है और कार्य भी ऐसे जिसकी मात्र कल्पना ही की जा सकती है। वहीं केदारनाथ विधानसभा में अपनी पार्टी को जीत का स्वाद चखाकर उन्होंने यह भी बता दिया कि उत्तराखण्ड की सियासी पिच पर किस तरह से एक ‘मास्टर-ब्लास्टरÓ की तरह बल्लेबाजी करते हैं।

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