राजनीति के महानायक

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में कांग्रेस व भाजपा की सरकारों को चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्रियों में आवाम का दिल जीतने का वो जज्बा कभी देखने को नहीं मिला जिससे आवाम को यह आभास होता कि सत्ता के शीर्ष पर बैठा राजनेता उन्हें अपना परिवार मानता है? बाइस सालों से राज्य की जनता को राजनीति में एक ऐसा महानायक देखने की चाहत दिखाई दे रही थी जिसे वह कभी भी अपने पास बुलाने का सपना पूरा कर सकता। उत्तराखण्ड में तीन साल से सरकार चला रहे मुख्यमंत्री ने राजनीति का सारा इतिहास भूगोल ही बदलकर रख दिया और उन्होंने अपने शासनकाल में बच्चों को जहां अपने सौम्य रूप से अपना बनाने का हुनर दिखाया तो बच्चों ने भी उन्हें अंकल मामा कहना शुरू कर दिया तो वहीं मातृशक्ति मुख्यमंत्री की सादगी और उनके फलावर रूप को देखकर वह उन्हें अभेद सत्ता चलाने का आशीर्वाद दे रही हैं तो वहीं राज्य के युवा मुख्यमंत्री को उत्तराखण्ड का महानायक मानकर उनकी स्वच्छ राजनीति को सैल्यूट कर रहे हैं। तीन साल से अधिक कार्यकाल से सरकार चला रहे मुख्यमंत्री आवाम की पाठशाला में सुपर बन गये हैं और आवाम मुख्यमंत्री को राजनीति का महानायक मानकर उन्हें अभेद सत्ता चलाने का आशीर्वाद देकर उत्तराखण्ड को एक नई उडान पर ले जाने के सपने पूरे कर रहा है।
उत्तराखण्ड में कांग्रेस व भाजपा के अधिकांश एक्स सीएम राज्य के अन्दर वो अलख नहीं जगा पाये थे जिसकी चाहत हमेशा राज्यवासियों ने पाली थी। उत्तराखण्डवासियों को हमेशा इस बात का दर्द रहा कि शहीद आंदोलनकारियों ने जिस राज्य की कल्पना के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था वह बलिदान उनका व्यर्थ जा रहा था? आंदोलनकारियों के मन में हमेशा यही चाहत रहती थी कि शहीद आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने के लिए कब कोई ऐसा राजनेता आयेगा जो उत्तराखण्ड के शहीदों के सपने पूरे करेगा। उत्तराखण्ड की कमान जबसे युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मिली है तो उन्होंने राज्य के अन्दर एक नई राजनीति का आगाज शुरू किया है और वह उत्तराखण्ड में भ्रष्टतंत्र को तहस नहस करने में जुटे हुये हैं तो वहीं आवाम का दिल जीतने के एजेंडे पर वह तेजी के साथ आगे बढते जा रहे हैं। आज उत्तराखण्ड में युवा मुख्यमंत्री की स्वच्छ राजनीति ने आवाम के बाइस सालों से देखने वाले सपनों को जिस तरह से पंख लगाये हैं उससे अब उत्तराखण्ड की जनता मुख्यमंत्री को राजनीति के महानायक के रूप में देख रही है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड़ की जनता ने राज्य बनने के बाद से ही एक से एक धुरंदर मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल देखा लेकिन जनता के दिलों मे राज करने के लिए कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री कामयाबी की सीढी नहीं चढ़ पाया था? तीन साल से बेदाग होकर सत्ता चला रहे मुख्यमंत्री की धमक से विपक्ष के अधिकांश नेता तो बेचैन नजर ही आ रहे हैं साथ मे भाजपा के भी काफी नेताओं मे मुख्यमंत्री की पारदर्शी सरकार चलाने की शैली ने उनके माथे पर शिकन डाल रखी है। मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री की तर्ज पर संदेश दे रखा है कि ‘न खाऊंगा और न किसी को खाने दूंगाÓ, शायद यही कारण है कि मुख्यमंत्री की इस शैली से भाजपा के कुछ नेता पर्दे के पीछे रहकर हमेशा मुख्यमंत्री को अपने निशाने पर लेने से नहीं चूकते। उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस चल रही है कि विरोधी चाहे कुछ भी ढोल पीटते रहे लेकिन यह बात भी सत्य है कि धामी जनता के दिलों मे अपना घर बना चुके हैं और वह बच्चों के अंकल मामा बन गये तो वहीं मातृशक्ति के प्रति मुख्यमंत्री की उदारता और उनकी रक्षा करने का उन्होंने जो वचन दिया हुआ है उसी का परिणाम है कि मातृशक्ति मुख्यमंत्री को अपना रक्षक मानकर उन्हें हमेशा यही आशीर्वाद देती आ रही हैं कि ‘सीएम साहब आप हमेशा सलामत रहोÓ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीन साल पूर्व जब मुख्यमंत्री की कमान संभाली थी तो किसी को इस बात का इल्म नहीं था कि वह उत्तराखण्ड के सबसे बेहतर मुख्यमंत्री साबित होंगे। मुख्यमंत्री ने सरकार चलाने के लिए सबसे पहले संदेश दिया कि ‘न खाऊंगा और न किसी को खाने दूंगाÓ। मुख्यमंत्री के इस संकल्प पर राज्य की जनता को शुरूआती दौर मे विश्वास नहीं हो रहा था और वह इसे सिर्फ एक पब्लिक स्टंट मान रही थी लेकिन मुख्यमंत्री ने जब उसी शैली पर काम करने का सिलसिला शुरू किया तो आवाम भी उनका कायल हो गया कि युवा मुख्यमंत्री कोई भी संकल्प हवाबाजी मे नहीं बल्कि उसे धरातल पर उतारने के लिए लेते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक दशक से राज्य की राजनीति को देखा है और उन्हें इस बात का शुरूआती दौर से ही इल्म था कि अगर उत्तराखण्ड की सत्ता मे अपनी धमक दिखानी है तो उसके लिए सबसे पहले उन्हें आवाम के दिलों मे अपनी जगह बनानी होगी। पुष्कर ंिसह धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जो राज्य के सभी जिलों मे बार-बार वहां दस्तक देकर आवाम के बीच चौपाल लगाते हैं और एक साधारण इंसान की तरह उनके बीच रहकर उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाये जाने के लिए उनसे राय मश्वरा भी करते हैं।
मुख्यमंत्री की सादगी से राज्य की जनता उन्हें अपना रक्षक मान चुकी है तो वहीं मुख्यमंत्री का बच्चों से असीम प्रेम इतना विराट रूप ले चुका है कि वह जब भी किसी कार्यक्रम में शामिल होने जाते हैं तो वह वहां बच्चों को देखकर उनके पास पहुंच जाते हैं जहां वह किसी बच्चे को गोद मे उठा लेते हैं तो किसी बच्चे के गले मे वह फूलों की माला डालकर उसे अपना आशीर्वाद देने के लिए आगे खडे हो जाते हैं। आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बच्चों के अंकल मामा बन चुके हैं वहीं मातृशक्ति मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को राजनीति का एक बडा अवतार मानकर उनके सम्मान मे आगे खडी हो रही है और वह उन्हें अपना खुला आशीर्वाद देने से पीछे नहीं हटती। कभी मातृशक्ति मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के माथे पर तिलक लगाती हैं तो कभी मातृशक्ति उनके सिर पर हाथ रखकर उन्हें एक लम्बे युग तक सत्ता मे बने रहने का आशीर्वाद देती है। मुख्यमंत्री की स्वच्छ राजनीति को राज्य की जनता खूब पसंद कर रही है और यही कारण है कि आज मुख्यमंत्री आवाम के बीच राजनीतिक महानायक बन गये हैं।

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