आवाम पूछ रहा सवालः कहां है सरकार के नौ रत्न?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के चमोली के जोशीमठ मंे जबसे भूधसाव को लेकर वहां एक बडा संकट आकर खडा हुआ है तो उससे समूचा उत्तराखण्ड डरा और सहमा हुआ है और पहाडों में रहने वाले हजारों परिवार यह सोचने पर मजबूर हो गये हैं कि जोशीमठ में आया यह संकट कहीं उनके शहरों में भी दस्तक देने के लिए न आ जाये? यही कारण है कि समूचे उत्तराखण्ड की निगाहें जोशीमठ पर टिकी हुई हैं और शंकराचार्य की इस धरती को बचाने के लिए मोर्चे पर राज्य के मुख्यमंत्री अब तक तो अकेले सरकार की ओर से डटे हुये दिखाई दे रहे हैं जिन्हांेने अपने अफसरों को जोशीमठ में उतार रखा है और इसी के चलते अब आवाम यह सवाल भी पूछने लगा है कि आखिरकार सरकार के वो नौ रत्न कहां हैं जो मुख्यमंत्री की कैबिनेट के सदस्य हैं? उत्तराखण्ड ही नहीं समूचे देश की नजरें जोशीमठ पर लगी हुई हैं और मुख्यमंत्री ने जोशीमठ को बचाने के लिए जिस तरह से अपनी सारी ऊर्जा लगा रखी है उससे साफ नजर आ रहा है कि वह किसी भी आपदा के समय कैसे अंगद का रूप धारण कर आपदा स्थल पर डेरा लगाकर वहां बचाव के मिशन में जुट जाते हैं।
उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो कि उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने का संकल्प लिये हुये हैं और वह पहाडों से पलायन को रोकने के लिए भी एक बडे विजन के तहत काम कर रहे हैं उनके सामने जोशीमठ में एक और आपदा ने अपनी दस्तक दी और यह दस्तक काफी भय पैदा किये हुये हैं क्योंकि भू-धसाव के कारण वहां जिस तरह से होटलों, मकानों और सडकों में बडी-बडी दरारें आई उससे जोशीमठवासियों के सामने एक बडा संकट आकर खडा हो गया क्योंकि यह दरारें इतनी भयावह रूप धारण किये हुये है कि उन्हें तोडना ही सरकार के पास एक मात्र विकल्प रह गया है सरकार ने ऐसे होटलों और मकानों को जब चिन्हित करने का सर्वे शुरू कराया तो अब तक 723 सरचना में दरारें परिलक्षित हुई हैं और इन दरारों के कारण मकानों में रहने वाले परिवारों के सामने एक बडा संकट आकर खडा हो गया जिसको देखते हुए चमोली प्रशासन ने अब तक 131 परिवारों को रिलीफ सेंटर मंे शिफ्ट किया है। वहीं सरकार के लिए यह भी बडी चुनौती आ रखी है कि कुछ होटल मालिक और काफी संख्या में परिवार अपने आशियाने तब तक खाली नहीं करना चाहते जब तक उन्हें इसका मुआवजा नहीं मिल जाता और यही कारण है कि ऐसे भवनों पर प्रशासन बुलडोजर चलाने का साहस नहीं कर रही है क्योंकि लोग सिस्टम के सामने आक्रोश की भावना में खडे हुये हैं। जोशीमठ में आई आपदा को लेकर जिस तरह से राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब तक अकेले मोर्चे पर डटे हुये दिखाई दे रहे हैं उसको देखते हुए आवाम भी अब यह सवाल दागने से पीछे नहीं हट रहा कि आखिरकार सरकार के वो नौ रत्न कहां गये जो सरकार में मंत्री पद संभाले हुये हैं? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठवासियों को इस संकट काल मंे बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और वह इसी मंथन और चिंतन के साथ जोशीमठ में काम कर रहे हैं कि किसी भी व्यक्ति को इस भूधसाव के कारण नुकसान न उठाना पडे? मुख्यमंत्री की टीम लगातार जोशीमठ में कैंप कर रही है और वह पानी रिसाव की मात्रा को लगातार माप रहे हैं जो कि रोज घट रहा है। बताया जा रहा है कि रविवार को पानी की यह मात्रा 570 एलपीएम थी जो कल घटकर 270 एलपीएम हो गई है और सात जनवरी के बाद कहीं भी कोई नई कोई दरारें विकसित नहीं हुई हैं जो कि जोशीमठ के लिए एक शुभ संकेत है। वहीं सरकार के लिए यह भी चिंता का विषय है कि कर्णप्रयाग में बहुगुणा नगर के कई घरों में दरारें दिखाई दी जिसको लेकर मुख्यमंत्री अलर्ट हो गये हैं और वह मोर्चे पर खुद डटे हुये हैं।