गेंवला गांव के ऊपर जमीन पर पडी लंबी और गहरी दरारें, भूगर्व मे है तालाब!

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गेंवला/ब्रहमखाल(सुरेश चन्द रमोला)। जोशीमठ की त्रासदी को देखकर अब गेंवला ब्रहमखाल गांव के सिर पर खेतों मे गहरी और चौडी दरारे पडी है। हाल ही मे आये भूंकप के झटको के कारण ये दरारे जमीन पर पडी और धीरे धीरे अब ये दरारे चौडी और गहरी होती जा रही है। जमीन का एक बहुत बडा टीला धीरे धीरे दरारो से कट रहा है जिससे ग्रामीण खौफ मे आ गये है।
लगातार आ रहे कम तीब्रता के भूकम्पों से पहाडो पर इसका असर दिख रहा है। 1988 मे यमुनोत्री हाइवे के इस टीले का भूगर्वीय वैज्ञानिकों ने सर्वेक्षण भी किया था तो उन्होने पाया कि इस टीले के अंदर एक विशाल काय पानी का तालाब है और दलदली मिट्टी के कारण यह क्षेत्र बहुत ही संबेदनशील है। इस पानी का रिसाव भी जगह जगह देखा जा सकता है । दरारे आने के साथ ही पानी के रिसाव को 3०० मीटर तक यमनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव के ऊपर कईजगहों पर देखा जा सकता है। यदि इस जमीन के भूगर्व मे वास्तव मे तालाब है तो यह गांव के लिये बहुत बडा खतरा बन सकता है। जिस तरह से जमीन के टीले पर दरारे चौडी होती जा रही है और भूकंप जैसी घठनायें लगातार हो रही है तो यह भविष्य के लिये अनहोनी की आहट है। और तालाब भी फट सकता है। जोशीमठ मे आई भूगर्वीय आपदा के जैसे यहां पर न हो इसके लिये शासन प्रशासन को समय पर इन आती दरारों को सज्ञान मे लेकर एक बार भू बैज्ञानिकों से स्थलीय जांच करवाना चाहिए ताकि ग्रामीणों मे दहसत का माहोल समाप्त हो जाय। लगातार पहाडो पर भारी भरकम मसीनो से हो रहे कटान का भी संज्ञान लेकर राजमार्ग निर्माण के तौर तरीकों की समीक्षा भी सरकार को कराना चाहिए ताकि भूधंसाव को रोका जा सके।

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