दरोगा भर्ती में एक कद्दावर नेता का हमराज शामिल तो नहीं?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली जंग लड रहे हैं और उन्होंने यह भी संकल्प ले रखा है कि गुनाहगार कितना भी बडा क्यों न हो उसे बक्शा नहीं जायेगा लेकिन क्या भ्रष्टाचारियों को सिर्फ जेल भेजकर ही एसटीएफ अपनी पीठ थपथपाती रहेगी या फिर गुनाहगारों के खिलाफ वह इतने सबूत एकत्र करेगी कि उन्हें जल्द से जेल से आजादी न मिल पाये? राज्य के अन्दर अब बहस चलने लगी है कि जिस दरोगा भर्ती घोटाले की जांच चल रही है उसमें एक कद्दावर नेता का हमराज तो शामिल नहीं है? अगर दरोगा भर्ती घोटाले में यह हमराज शामिल है तो फिर यकीन मानिये कि एसटीएफ ने एक अफसर के साथ उसके इतने गहरे सम्बन्ध हैं कि वह उसे इस जाल से बचाने के लिए कोई भी रास्ता अपनाने का सुझाव उसे दे सकते हैं? राज्य के अन्दर इन घोटालों की जांच सीबीआई से कराने के लिए अब फिर इसलिए मांग उठ रही है कि आखिर कितने गुनाहगारों को एसटीएफ गवाह बनाकर उन्हें अभयदान देने के लिए आगे आ जाये? भर्तीे घोटाला इतना विशाल है कि उसका एक-एक सच बाहर लाने के लिए एसटीएफ अपना दम दिखा पायेगी इसमें राज्यवासियों को काफी शंका नजर आ रही है?
उल्लेखनीय है कि 2०15 में हुये दरोगा भर्ती घोटाले को लेकर कांग्रेस के चंद नेताओं के दिलों की धडकनें आजकल बडी हुई हैं और यही कारण है कि राज्य के अन्दर एक नई बहस चल गई है कि क्या इस दरोगा भर्ती घोटाले के गुनाहगारों तक विजिलेंस के हाथ पहुंच पायेंगे? दरोगा भर्ती घोटाले में राज्य के अन्दर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कांग्रेस के एक कद्दावर नेता का हमराज जो कि पुलिस से ज्यादा घुलामिला रहता है कहीं इस भर्ती घोटाले में वह भी भ्रष्टाचार का कोई खेल तो नहीं खेल गया था? हालांकि विजिलेंस की जांच शुरू होने से काफी दरोगाओं में खलबली मची हुई है और देखने वाली बात यह होगी कि इस भर्ती घोटाले को लेकर विजिलेंस कब तक उन गुनाहगारों पर हाथ डाल पायेगी जिन्होंनेे दरोगा भर्ती घोटाले में भ्रष्टाचार का तांडव मचाया था? उत्तराखण्ड के अन्दर इस बात को लेकर भी बहस शुरू हो गई है कि जिस तरह से एसटीएफ की कमजोर पैरवी के चलते चार गुनाहगार चंद दिनों में ही जमानत से बाहर आ गये कहीं इस भर्ती घोटाले में कुछ बडे-बडे गुनाहगार भी एसटीएफ की कमजोर पैरवी के चलते जेल की सलाखों से बाहर तो नहीं आ जायेंगे? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक संकल्प के साथ इस घोटाले में शामिल छोटी और बडी सभी मछलियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का संकल्प ले रखा है जिससे यह सवाल खडे हो रहे हैं कि चंद दिन पूर्व जिन तीन बडे नामचीनों को एसटीएफ ने भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया है और पुलिस ने उन्हें अदालत ले जाने के दौरान जिस तरह से उनके साथ वीआईपी व्यवहार किया उससे शंकाओं का दौर चल रहा है कि क्या एसटीएफ इस भर्ती घोटाले में पकडे गये इन तीन नामचीनों पर भी गैंगेस्टर एक्ट लगाने का साहस दिखायेगी? सवाल यह है कि भ्रष्टाचार तो एक संगठित ग्रुप ने मिलकर किया है तो फिर किसी का गुनाह कम और किसी का गुनाह ज्यादा बताकर क्यों एसटीएफ गैंगेस्टर एक्ट लगाने के लिए आगे आ रखी है? अगर गुनाह एक है तो सब पर गैंगेस्टर लगनी चाहिए नहीं तो एसटीएफ की इस भाई भतीजावाद कार्यवाही से उस पर उंगलियां उठेंगी और अब तक उसने जो भर्ती घोटाले में आवाम से वाहवाही लूटी है वह हवा-हवाई भी हो जायेगी? अब एसटीएफ का बडा इंम्तिहान होना है कि वह बडों पर कार्यवाही करने के लिए एक पैमाना तय करेगी या फिर कुछ के गुनाह को माफी में तब्दील कर उसे सरकार के पक्ष में गवाह बना देगी?

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