फिर शहंशाह बनोगे बेटा

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दायित्व बांटकर भाजपाईयों में भरा जोश
धामी के मास्टर स्ट्रोक से खलबली
सरकार और संगठन को एक तराजू में तोलते पुष्कर
देहरादून। उत्तराखण्ड की सियासत में यह बात तो शीशे की तरह साफ हो चुकी है कि भाजपा की लीडरशिप ने तय कर दिया है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व मंे ही अगला विधानसभा चुनाव लडा जायेगा। सरकार और संगठन को एक तराजू में तोलने के लिए मुख्यमंत्री चार साल से हमेशा एक ही रूप अपनाये हुये हैं। संगठन से मंथन करने के बाद मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं को दायित्व का तोहफा देने का जो सिलसिला शुरू कर रखा है उसे देखते हुए राजनीतिक पंडित भी मान रहे हैं कि धामी के इस मास्टर स्ट्रोक से उनमें बडी खलबली मची हुई है जो एक लम्बे समय से शोर मचा रहे थे कि मुख्यमंत्री साल के आखिर में दायित्व बांटने के लिए आगे नहीं आयेंगे। दायित्व का तोहफा मिलने के बाद हर कोई दायित्वधारी मुख्यमंत्री के कसीदे पढ़ रहा है कि उन्होंने उन पर जो भरोसा दिखाया है उस भरोसे पर वह खरा उतरेंगे और एक बार फिर राज्य के अन्दर भाजपा की सरकार लाने के लिए रात दिन एक कर देंगे। मातृशक्ति भी मुख्यमंत्री को अभेद आशीर्वाद दे रही हैं कि वह सियासत के फिर शहंशाह बनेंगे।
उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब केवल सरकार के मुखिया भर नहीं रह गए हैं, बल्कि भाजपा के चुनावी रणनीतिकार और संगठन को एकजुट रखने वाले नेता के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं। भाजपा की शीर्ष नेतृत्व द्वारा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की कमान धामी के हाथों में सौंपे जाने के संकेतों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री धामी जिस तेजी के साथ पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों से जुड़े लोगों को दायित्व सौंप रहे हैं, उससे भाजपा संगठन के भीतर नया उत्साह दिखाई दे रहा है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय कई नेताओं को नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में भी सकारात्मक संदेश गया है कि मेहनत और संगठन के प्रति समर्पण का सम्मान किया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धामी ने सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया है। यही कारण है कि पार्टी के भीतर विभिन्न धड़ों को एक मंच पर लाने में उन्हें सफलता मिलती दिखाई दे रही है। भाजपा के कई नेता खुलकर यह कहने लगे हैं कि मुख्यमंत्री ने जिस विश्वास के साथ उन्हें जिम्मेदारियां सौंपी हैं, उस भरोसे पर खरा उतरने के लिए वे पूरी ताकत झोंक देंगे।
मुख्यमंत्री धामी का फोकस केवल सरकार चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह 2027 के चुनावी रण की तैयारियों को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। प्रदेश में विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और संगठनात्मक विस्तार के जरिए भाजपा को मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम किया जा रहा है। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व भी धामी के नेतृत्व पर लगातार भरोसा जता रहा है। भाजपा के अंदर चल रही इस सक्रियता को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और नए चेहरों को अवसर देने की नीति से भाजपा चुनावी मोड में दिखाई देने लगी है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो 2027 का विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व और उनकी रणनीति की बड़ी परीक्षा साबित होगा। वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा ने अभी से चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। संगठन और सरकार के बीच तालमेल बैठाने की धामी की शैली विपक्ष के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों को भी अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी पड़ सकती है।

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