चम्पावत का चुनावी रण जितेंगे पुष्कर

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देहरादून(संवाददाता)। देश की जनता मौजूदा समय में आईपीएल की मस्ती में सराबोर है। ऐसा इसलिए भी है कि भारत में क्रिकेट को एक धर्म के रूप में देखा जाता है? आईपीएल का सत्र अपने आखिरी पड़ाव पर है और जीतने वाली प्रत्येक टीम का बल्लेबाज अंत में एक विनिंग शॉट मार कर ही अपनी टीम को विजयश्री दिलाने में कामयाब होता है। ऐसा ही एक आईपीएल इस समय उत्तराखण्ड में खेला जा रहा है। हालांकि इस आईपीएल में गेंद-बल्ले की जगह राजनीति के दांव पेंचों का इस्तेमाल हो रहा है क्योंकि यह क्रिकेट का नहीं बल्कि राजनीति का आईपीएल है। उत्तराखण्ड की चंपावत विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। इस उपचुनाव में उत्तराखण्ड के यशस्वी मुख्यमंत्री मैदान में उतरे हुए है और माना यहां तक जा रहा है कि इस उपचुनाव में उनकी जीत सुनिश्चित है। सीएम धामी का चुनाव प्रचार खूब जोरोशोर के साथ चल रहा हैै, जिसकी बागडोर खुद उनकी अर्धांगिनी ने अपने हाथों में ले रखी है, जिन्होंने ने दिन रात एक करते हुए चंपावत की जनता से सीधा संपर्क साधा हुआ है। चंपावत को विकास की बुलंदियों पर पंहुचाने तथा वहां की नारियों को सशक्त बनाने के लिए वह वचनबद्ध है। वहीं सीएम धामी भी चंपावत को विकास मुख्यधारा से जोडऩे के लिए काफी आशवस्त है। जानकारों का मानना है कि चंपावत में चल रहे इस राजनीतिक आईपीएल में सीएम पुष्कर सिंह धामी की जीत लगभग सुनिश्चित ही है और भाजपा को यह सीट जीताने के लिए विनिंग शॉट धामी ही मारेंगे। देखने में यह भी आ रहा है कि इन चर्चाओं को सुनकर सीएम धामी के विपक्षियों में काफी हलचल मची हुई है। राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के दिग्गज इसी उधेड़बुन में लगे हुए है कि कैसे धामी के विजय रथ को रोका जाए। उत्तराखण्ड के दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने मैदान में उतर कर सीएम धामी के खिलाफ मोर्चा भले ही खोल रखा हो लेकिन यह मात्र उसी रूप में देखा जा रहा है कि मानो दरिया कह रहा हो कि वह सागर को अपने में समा लेगा?
यह तो सर्व विदित है कि उत्तराखण्ड में भाजपा ने इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत प्राप्त किया लेकिन जिस व्यक्ति के चेहरे के दम पर भाजपा ने चुनाव लड़ा था, उस शख्सियत को खुद अपनी ही विधानसभा से हार का मुंह देखना पड़ा था। हालांकि भाजपा के इतिहास में यह कोई नई घटना नहीं है क्योंकि इससे पूर्व भी ऐसा हो चुका है। धामी की हार पर विभिन्न प्रकार के तर्क सुनने को मिले। कारण जो भी रहा हो लेकिन आज के समय में वह पराजित हुआ व्यक्ति ही राज्य का मुखिया है और इसका सबसे बड़ा कारण है उसका विशाल व्यक्तित्व है जिसका मुरीद समूचा भाजपा हाईकमान है। अल्प समय में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जो विकास की गंगा बहाई है वह किसी से छिपी नहीं है। अब वह चम्पावत से उपचुनाव लड़ रहे है। जानकारों को इस बात का विश्वास है कि चम्पावत की अधिकांश जनता विकास के नाम पर अपने मत का इस्तेमाल करेगी और इन्हीं मतों के आधार पर सीएम धामी चम्पावत पर फतह हासिल करने में कामयाब होंगे। यह विश्वास काल्पनिक नहीं समझा जा सकता है, क्योंकि इस विश्वास को पुष्कर सिंह धामी ने कमाया है। प्रदेश के अंदर पार्टी के लगभग सभी पदाधिकारी व नेता इस बात से संतुष्ट है कि हाईकमान ने धामी को सीएम बनाया है और इसका प्रमाण उस समय देखने को मिल गया था जब सीएम के उपचुनाव की बात उठी थी तो कई विधायक उनके लिए अपनी सीट छोडऩे के लिए तैयार हो गए थे। पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी व्यक्तिगत ख्याति के साथ-साथ पार्टी की लोकप्रियता के कद को भी आसमान तक पंहुचाया। चम्पावत सीट पर हो रहे उपचुनाव में भी इसका लाभ पार्टी को जरूर मिलेगा। सीएम धामी के चुनाव प्रचार को देखते हुए विरोधियों की हालत इस बात को लेकर भी पस्त होती हुई नजर आ रही है क्योंकि उनके चुनाव प्रचार की कमान खुद ‘लेडी पुष्करÓ यानि की सीएम धामी की धर्मपत्नी गीता ने अपने हाथों में ले रखी है। गीता की इस सक्रियता को को देखकर विरोधी निष्क्रिय दिखाई दे रहे है और ऐसा होना भी लाजमी है क्योंकि लेडी पुष्कर ने अपने पति के चुनाव प्रचार में दिन रात एक कर रखा है, जो इस बात का प्रमाणित करता है कि अब वह अपने पति को जीत दिलाने के बाद ही चौन से बैंठेंगी। उनके इस आत्मविश्वास को देखकर कई दिग्गज भी हैरान है और संभवत: वे भी अब यह मानने लगे है कि अब तो पुष्कर सिंह धामी की जीत निश्चित ही है?

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