उमेश ने सरकार पर उठाये सवाल

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देहरादून(संवाददाता)। विधायक उमेश कुमार ने सदन में दूसरे दिन फिर जनहित के मुद्दे पर सरकार को घेरा और सदन के अन्दर अपने आपको मजबूत विपक्ष के रूप में जिस तरह से साबित किया और पुलिसकर्मियों के 46 सौ ग्रेड-पे के मुद्दे पर आवाज बुलंद की कि जब तक पुलिसकर्मियों को ग्रेड-पे नहीं मिल जाता तब तक यह लडाई जारी रहेगी। पुलिसकर्मियों के ग्रेड-पे का मुद्दा सदन में उठाने पर पुलिसकर्मियों के अन्दर उमेश कुमार एक हीरो बनते हुए दिखाई दे रहे हैं।
विधानसभा सत्र के दूसरे दिन भी उमेश कुमार ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उमेश कुमार जनहित के मुद्दों को हमेशा से ही बेबाकी से उठाते रहे हैं वहीं अब विधानसभा के सदन के अंदर भी उन्होंने प्रदेश स्तर के कई मुद्दों पर सरकार को घेरने का काम कर रहे हैं। प्रदेश के हजारों उपनलकर्मियों के मुद्दे से लेकर , पुलिसकर्मियों के ग्रेड पे और पत्रकार कल्याण कोष का मुद्दा उमेश कुमार ने प्रमुखता से उठाया। वहीं उन्होंने उपनलकर्मियों के मुद्दे को बेबाकी से रखा सदन के सामने रखा। पत्रकार वार्ता करते हुए उमेश कुमार ने कहा कि प्रदेश के हजारों उपनलकर्मीयों की समस्याओं को लेकर वो हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे हैं । उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी उपनलकर्मी को न हटाये जाने का आदेश भी दिया था उसके बाबजूद भी कई उपनलकर्मियों को हटाये जाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो इस मुद्दे पर चुप नही बैठेंगे। प्रदेश के हजारों पुलिसकर्मियों के ग्रेड पे मामले पर उमेश कुमार ने अपनी बात रखी । उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों से दिन रात ड्यूटी ली जाती है , बारिश हो या धूप हर वक्त ड्यूटी पर तैनात इन पुलिसकर्मियों की ग्रेड पे की माँग को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है वहीं जिन पुलिसकर्मियों ने आवाज उठाई थी अब उनके खिलाफ मुकदमे की तैयारी भी चल रही है जिसे बिल्कुल बर्दाश्त नही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के ग्रेड-पे के मामले में सरकार को भी अधिकारियों ने गुमराह करने का काम किया है लेकिन वो उन हजारों पुलिसकर्मियों के साथ हरवक्त खड़े हैं और उनकी इस जायज माँग के लिए लगातार लड़ते रहेंगे। उमेश कुमार ने पत्रकारों के लिए आवासीय नीति बनाये जाने की मांग उठाते हुए कहा कि जब मंत्री विधायको के लिए बन सकती है तो पत्रकारों के लिए क्यों नही? पत्रकारों को लेकर बनाये गए कल्याण कोष पर भी सवाल उठाते हुए उमेश कुमार ने कहा कि जब विधायको ,मंत्रियों की पेंशन हो सकती है , उनके लिए आवासीय योजनाएं हो सकती हैं तो आखिर पत्रकारों के लिए क्यो नहीं सरकार कोई आवासीय योजना लेकर आती है? उन्होंने कहा कि सरकार को ग्राम समाज की जमीनों को एक नीति बनाकर पत्रकारों के लिए आवासीय योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं खुद पत्रकारिता से और आज सदन में पहुंच हूँ पत्रकारों की पीड़ा को अच्छी तरह से समझता हूँ। मैं पत्रकारों के हकों की लड़ाई निरन्तर लड़ता रहूँगा।

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