सरकार के खिलाफ दहाड़ी आशा कार्यकर्ता

0
177

लालकुआञ्चहल्द्वानी। आशाओं को मासिक वेतन और अन्य समस्याओं का समाधान करने के लिए चल रहा आंदोलन राज्य की भाजपा सरकार की उदासीनता और असंवेदनशील रवैये के चलते पूर्व घोषित अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार के चरण में पहुंच गया है। ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के बैनर तले आशा वर्कर्स ने जोरदार प्रदर्शन कर धरना दिया और कार्य बहिष्कार हड़ताल शुरू कर दी। आशा नेताओं ने कहा कि लंबे समय से काम के बदले मानदेय फिक्स करने की लड़ाई लड़ रही आशाओं को आंगनबाड़ी की तरह मानदेय फिक्स किया जाय और अन्य मांगों पर ध्यान दिया जाय।
गौरतलब है कि 23 जुलाई 2०21 को आशाओं ने राज्य भर में ब्लॉकों में प्रदर्शन मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा था लेकिन सरकार ने एक नहीं सुनी, 3० जुलाई को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया गया तब भी सरकार के कानों में तेल डालकर बैठ गई है। इसलिए आशाओं को कार्यबहिष्कार करने पर मजबूर होना पड़ा। इससे पहले भी लगातार आशाएँ अपनी समस्याओं से भाजपा की राज्य सरकार को 2०17 में सरकार बनने के बाद से ही अवगत करा रही हैं लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। श्ऐक्टूश् से संबद्ध ट्टउत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन* के व ट्टसीटू* से संबद्ध ट्टउत्तराखण्ड आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन* के संयुक्त आह्वान पर 2 अगस्त से पूर्ण कार्यबहिष्कार कर पूरे राज्य में प्रदर्शन किया जा रहा है।
यूनियन के प्रदेश महामंत्री डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, ट्टसेवा के नाम पर आशाओं का शोषण कब तक चलेगा? उत्तराखण्ड में हक, सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई अब आरपार के चरण में पहुंच गई है। पूरे राज्य में अब एक साथ एक स्वर में आंदोलन चल रहा है। अपने वेतन और सम्मान के लिए आशा वर्कर तब तक सड़कों पर रहेंगी जब तक सरकार मासिक वेतन की घोषणा नहीं कर देती।* उन्होंने कहा कि, ट्टपूरे उत्तराखण्ड में आशाओं ने ऐतिहासिक कार्यबहिष्कार करके दिखा दिया है कि अब सरकार द्वारा किया जा रहा शोषण खत्म करने के बाद ही लड़ाई रुकेगी।* यूनियन की हल्द्वानी नगर अध्यक्ष रिंकी जोशी ने कहा कि, ष्प्राथमिक रूप से मातृ शिशु सुरक्षा के लिए तैनात की गई आशाओं को आज कोविड से लेकर पल्स पोलियो, टीकाकरण, परिवार नियोजन, डेंगू, मलेरिया, ओआरएस बांटने और तमाम सर्वे व अभियानों में लगाया जा रहा है। आशाओं के पास अपने परिवार तक के लिए फुर्सत नहीं है लेकिन सरकार एक रुपया भी मासिक वेतन के नाम पर नहीं दे रही है। भगवती बिष्ट ने कहा कि, अब आशाओं की सहनशीलता की और परीक्षा न ले सरकार। क्या किसी भी अन्य कर्मचारी से बिना मानदेय के काम ले सकती है सरकार? तब आशाओं से बिना वेतन या मानदेय के काम क्यों लिया जा रहा है, इस बात का जवाब दे सरकार।
कार्यबहिष्कार धरने में रीना बाला, सरोज रावत, भगवती बिष्ट, रजनी देवी, मंजू आर्य, शांति शर्मा, बीना उपाध्याय, कमला बिष्ट, दीपा जोशी, भवानी सुयाल, सुनीता भट्ट, अंजना, भगवती पाण्डे, शाहीन अख्तर, बसंती बिष्ट, प्रियंका सक्सेना, दीपा बिष्ट, अर्शी, धना मेहता, मंजू रावत, पुष्पा आर्य, बबीता, माया टंडन, निर्मला चंद, किरन पलडिया, पुष्पा राजभर, मनीषा आर्य, अनिता सक्सेना, गीता, आशा, पुष्पा, प्रेमा, राबिया, सलमा, गंगा तिवारी, सरस्वती आर्य, लीला परिहार, चम्पा परिहार, सुधा जायसवाल, बिमला तिवारी, लता तिवारी, पुष्पा देवी, शोभा, हंसी फुलारा, ममता लटवाल सहित सैकड़ों की संख्या में आशा वर्कर्स मौजूद रहीं।

LEAVE A REPLY