मानव और प्रकृति के परस्पर प्रेम को दर्शाता हरेला पर्व: प्रदीप

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देहरादून(संवाददाता)। न्यायमूर्ति मनोज तिवारी, सीनियर जज कार्यपालक अध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के निर्देशानुसार आज ”हरेला पर्व” के दिवस पर जनपद देहरादून की नव निर्मित परिवार न्यायालय, देहरादून में पौधारोपण का आयोजन किया गया।
उक्त दिवस का शुभारम्भ प्रदीप पन्त, जिला न्यायाधीश अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून द्वारा किया गया एवं उपस्थित सभी न्यायिक अधिकारीगण एवं पराविधिक कार्यकर्तागण आदि को ”हरेला पर्व” के विषय में अवगत कराया कि श्रावण मास में पावन पर्व हरेला उत्तराखण्ड में धूमधाम से मनाया जाता है। आज से इस पर्व की शुरूआत हो गयी है। मानव और प्रकृति के परस्पर प्रेम को दर्शाता यह पर्व हरियाली का प्रतीक है। उक्त अवसर पर जिला न्यायाधीशध्अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून द्वारा नीम के पेड़ का पौधारोपण कर किया गया तथा नीम के बाबत् निम्न जानकारी से अवगत कराया कि नीम का उपयोग औषधी बनाने के लिये किया जाता है। नीम का उपयोग त्वचा रोग और दांत से सम्बंधित बिमारियों के लिये होता है। नीम का पेड़ वातावरण में हवा को शुघ्द्व करके जीवन के लिये ज्यादा ऑक्सीजन का निर्माण करता है। उसके साथ-साथ प्रकृति के संतुलन को बनाये रखने का काम भी करता है। नीम के पेड़ फल और पत्तियॉ सब कार्य में काम आती है। इसके अतिरिक्त जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून द्वारा उपस्थित सभी अधिकारीगण/कर्मचारीगण आदि को अवगत कराया कि वह जो भी पौधें लगाये उसकी अपने स्तर से समुचित देख-रेख भी करें ताकि वह फलें-फूलें एवं बडे होकर पर्यावरण को प्रदूषित होनें से बचायें।
तत्पश्चात् जनपद देहरादून के अन्य न्यायिक अधिकारीगण द्वारा भी नीम बेलपत्र/पीपल/चम्पा/बड/तुलसी आदि विभिन्न प्रकार के वृक्षों का पौधारोपण किया गया एवं उनके द्वारा एक-एक पौधें को गोद लिया गया तथा यह संकल्प लिया गया कि आज जो भी वह पौधा रोपण कर रहें हैं उसकी समुचित देख-रेख व पूर्ण रक्षा करेंगें चाहे वह कही भी रहें। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा अधिक से अधिक पौधें लगाये जाने के लिये लोगों को जागरूक किया गया। पीपल के पेड़ के पत्तों में ग्लूकोज और मेननों, फेनोलिक होते हैं जबकि इसकी छाल में विटामिन के, टेनन और फाइटोस्टेरोलिन पाया जाता है। इन सभी सामग्रियों से मिलकर पीपल के पेड़ को एक असाधारण औषधीय पेड़ बना दिया गया है। बेल के वृक्ष का धार्मिक महत्व हैं क्योंकि बिल्व का वृक्ष भगवान शिव का ही रूप है।
बिल्व वृक्ष के मूल अर्थात उसकी जड़ में शिवलिंग स्वरूपी भगवान शिव का वास होता है। इसी कारण से बिल्व के मूल में भगवान शिव का पूजन किया जाता है। पूजन में इसकी मूल यानी जड़ को सीचा जाता है। तुलसी शाकीय तथा औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है जिसे हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है। भारत में हर घर के आंगन में तुलसी का पौधा पाया जाता है। .तुलसी के पौधे का प्राचीन काल से ही हमारे जीवन में बहुत महत्व रहा है। नियमित रूप से इसकी पूजा की जाती है ओर इसे देवी-देवताओं को भी अर्पण किया जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य पेड़-पौधों के बाबत् भी जानकारी दी गयी।

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