देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड सरकार के मुखिया दावा कर रहे हैं कि चार साल में उनकी सरकार ने राज्य के अन्दर बेहतर काम किया लेकिन उनके इस दावों की पोल मुख्यमंत्री आवास से कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही खुलती हुई नजर आ रही है? सडक निर्माण को लेकर जिस तरह से सरकारी सिस्टम ने अपनी आंखे बंद कर रखी हैं उससे इलाके के गांववासियों के मन में एक बडी नाराजगी देखने को मिल रही है और उनका साफ आरोप है कि जिस सडक का निर्माण किया जा रहा है उससे गांववालों को क्या फायदा होगा और जिस तरह से वह पैदल इस मार्ग से अपना सफर तय कर रहे हैं वह बेहद खतरनाक है और यहां से गुजरने वालों को हमेशा अपने जीवन का भय बना रहता है कि अगर पहाड से मलवा नीचे आ गया तो किसी वह उसमें दबकर मौत के आगोश में न चले जायें। अब देखने वाली बात होगी कि क्या राज्य के मुख्यमंत्री खुद इस खतरनाक रास्ते को देखने के लिए अपने कदम आगे बढायेंगे जिससे गांववासियों के मन में एक आशा की किरण जागे कि सरकार को उनके दर्द का एहसास है।
मुख्यमंत्री आवास से लगभग 17 किलोमीटर की दूर कंड्रियाना भितरली गांव जहां आजादी के बाद सड़क का निर्माण कार्य आरंभ हुआ परंतु स्थानीय ग्रामीण आज भी अपनी जान को जोखिम में डालकर चल रहे हैं क्योंकि जो नई सड़क का निर्माण हो रहा है ठीक उसी के नीचे ग्रामीणों का पैदल मार्ग है जो निर्माणाधीन सड़क के मलबे के कारण पूर्णत: बंद हो चुका है वह नई सड़क भी पूर्णत: क्षतिग्रस्त हो गई है।
नई सड़क का मलवा बार-बार ग्रामीणों के पैदल मार्ग पर गिर रहा है जिससे कभी भी कोई भी अनहोनी होने की आशंका है संबंधित ठेकेदार व विभाग की बड़ी लापरवाही के कारण ग्रामीणों को इसका सामना करना पड़ रहा है क्योंकि संबंधित ठेकेदार द्वारा सही दिशा निर्देशों का पालन न किए जाने के कारण यह हादसा हो रहा है क्योंकि सड़क निर्माण में निकले मलबे को उचित स्थान पर डंपिंग जोन बनाकर डाला जाना चाहिए था परंतु जहां से सड़क बनाई गई है वहीं से नीचे मलवा फेंका गया है जिसके कारण ग्रामीणों को तो जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करना पड़ रहा है साथ ही बहुत बड़ी हानि पर्यावरण को पहुंचाई गई है जो शायद ही कभी पूरी हो पाए क्योंकि सड़क से लगती हुई भूमि के आसपास जितने भी जंगल थे उनको समाप्त किया जा चुका है आज जो ग्रामीण इस सड़क के लिए इतने वर्षो से संघर्ष कर रहे थे यह देखकर वह ग्रामीण खुद ही कहते हैं कि इस सड़क से अच्छा तो पहले ही ठीक था कम से कम हमारे क्षेत्र की वन संपदा तो बची रहती ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पता नहीं था कि विकास इस कदर होना है तो वे कभी भी इस सड़क के लिए कभी मांग ना करते क्योंकि जहां पर सड़क बन रही है उससे शायद ही ग्रामीणों को कोई फायदा हो जब सड़क गांव को टच नहीं करेगी तो फायदा ही क्या है?
