जिला पंचायत चुनाव मे नायक के रूप मे साबित होगी राजेंद्र व शहजाद की जोड़ी!

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नयी रणनीति के साथ चुनाव मे उतारेगे जिताऊ उम्मीदवार गोपनीय वार्ताऔ का दौर शुरू
रुड़की(रियाज कुरैशी)। जिला पंचायत चुनाव को लेकर कभी भी अधिसूचना शासन स्तर पर जारी हो सकती है। हालांकि, परिसीमन की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है। अब दोवदार वोटरों को रिझाने में लग गये हैं। और चुनावी दंगल में जोड़ तोड़ व रुठों को मनाने में लग गये हैं। ऐसे में जिला पंचायत के बादशाह कहे जाने वाले चौधरी राजेंद्र ंिसह की बात की जाए तो वह इस बार पूर्व विधायक हाजी मुहम्मद शहजाद के साथ जिला पंचायत चुनाव की रणनीति बना रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार जिला पंचायत के चुनाव में यह जोड़ी विरोधियों को मिलकर मात देगी।
बताते चले कि जिला पंचायत की राजनीति के बादशाह कहे जाने वाले चौधरी राजेंद्र सिंह इस बार अपने पुरानी विरोधी से हाथ मिलाकर जिला पंचायत की राजनीति में नई रणनीति के साथ चुनाव में उतर रहे हैं। राजेंद्र ने हमेशा ही जिला पंचायत की राजनीति में हार नहीं मानी। कितनी भी कठिनाई आई हो, हमेशा ही उसका डटकर सामना किया। अपनी जीत हासिल करने के लिए उन्होंने हर फन का इस्तेमाल किया। हालांकि, राजनीति में हर काम व बात संभव होती है, विरोधी भी एक मंच पर आकर चुनाव लड़ सकते हैं। कुर्सी हथियाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। ऐसा ही कुछ पहली बार जिला पंचायत के चुनाव में होने जा रहा है। राजनीति में एक-दूसरे के विरोधी रहे शहजाद व राजेंद्र एक साथ बसपा में राजनीति करने के साथ जिला पंचायत के लिए हाथ मिला चुके हैं और विरोधियों को मात देने के लिए एक नई रणनीति का कदम गोपनीय तौर पर उठाने का काम कर रहे हैं। हालांकि, यह भी सत्य है कि पूर्व विधायक शहजाद हमेशा ही बड़बोलापन व अपने वायदे से मुंह करने वाले राजनेता हैं। तो वहीं चौधरी राजेंद्र की बात की जाए तो नुकसान हो या लाभ वे हमेशा ही जुबान के पक्के व सच्चे राजनेताओं में सुमार हैं। हालांकि, पूर्व में जिला पंचायत की राजनीति में चौधरी राजेंद्र सिंह को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। फिर भी उन्होंने अब राजनीति कायम रखने के लिए शहजाद से हाथ मिलाया है। दोनों ही जिला पंचायत की राजनीति में अपनी-अपनी जगह सक्षम हैं। लेकिन राजेंद्र की बात की जाए तो वह एक बड़े खिलाड़ी हैं। शासन स्तर पर कभी भी अधिसूचना जारी हो सकती है। क्योंंकि 16 अप्रैल तक उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत के चुनाव संपन्न हो जाएंगे। तत्पश्चात उत्तराखंड में चुनावी प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। राजनीतिक सूत्रों की माने तो आजकल शहजाद व राजेंद्र बंद एकांत कमरे में घंटों-घंटों गोपनीय वार्ता कर रहे हैं और जिला पंचायत सदस्यों के उम्मीदवारों पर मंथन कर रहे हैं। इन दोनों का लक्ष्य इस बार जिला पंचायत की कुर्सी पर बसपा का परचम लहराना है। यह भी माना जा रहा है कि 2०22 विधानसभा चुनाव का यह अभ्यास मैच है। यदि बसपा में इसमें अपना परचम लहराने में कामयाब होती है तो निश्चित रुप से विधानसभा चुनाव में बिना बसपा के समर्थन के कोई भी पार्टी उत्तराखंड में अपनी सरकार नहीं बना पाएगी। अब देखना यह होगा कि राजेंद्र व शहजाद की जोड़ी इस चुनाव में कामयाब हो पाती है या नहीं? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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