आदि कैलाश में सीएम का नया संकल्प
सीमान्त गांव बनेंगे पर्यटन के बडे़ केन्द्र
प्रमुख संवाददाता
उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन, रोजगार और आर्थिक विकास की नई पहचान दिलाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। रविवार को पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र गुंजी पहुंचे मुख्यमंत्री धामी ने आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में प्रतिभाग कर देश के विभिन्न राज्यों से आए धावकों का उत्साह बढ़ाया। बर्फीली चोटियों, कठिन पहाड़ी रास्तों और सीमित ऑक्सीजन वाले इस क्षेत्र में आयोजित प्रतियोगिता के माध्यम से मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तराखंड की सीमांत घाटियां अब केवल दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि साहसिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार की नई संभावनाओं के केंद्र बन रही हैं।
गुंजी पहुंचने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का रं समुदाय के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर स्वागत किया। स्थानीय संस्कृति और हिमालयी परंपराओं के बीच मुख्यमंत्री ने 70 किलोमीटर और 42 किलोमीटर की दौड़ के विजेताओं को पुरस्कृत किया। उन्होंने प्रतिभागियों के साहस, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन महज एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि मानव क्षमता, आत्मविश्वास और संकल्प की कठिन परीक्षा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में दौड़ना सामान्य चुनौती नहीं है। विषम मौसम, दुर्गम रास्ते और ऑक्सीजन की कमी जैसी परिस्थितियों के बावजूद धावकों का उत्साह यह साबित करता है कि उत्तराखंड अंतरराष्ट्रीय स्तर की साहसिक खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की क्षमता रखता है। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि ’मई 2027 के प्रथम सप्ताह में माणा पास से औली तक श्100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रनश् का आयोजन किया जाएगा।’ लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा पास से शुरू होने वाली यह दौड़ बदरीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली पहुंचेगी। इस आयोजन के माध्यम से देश-विदेश के धावकों को उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों से जोड़ने और राज्य को साहसिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन के पहले संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया था। इस आयोजन की सफलता के बाद आदि कैलाश क्षेत्र के प्रति पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आकर्षण बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष क्षेत्र के लिए जारी इनर लाइन परमिट की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों को अंतिम गांव के बजाय देश के प्रथम गांव के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अनुरूप उत्तराखंड सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पर्यटन, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार का सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। आदि कैलाश जैसे आयोजनों से होमस्टे संचालकों, स्थानीय गाइडों, होटल व्यवसायियों, परिवहन कारोबारियों और खानपान से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि सीमांत गांवों के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आजीविका के बेहतर साधन उपलब्ध हों और रोजगार के अभाव में होने वाले पलायन को रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। राज्य की प्राकृतिक संपदा, ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं, नदियां और घाटियां साहसिक पर्यटन के लिए अपार संभावनाएं समेटे हुए हैं। इसी उद्देश्य से ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, कयाकिंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेन साइक्लिंग और एंगलिंग जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। औली, मुनस्यारी, ऋषिकेश और टिहरी जैसे पर्यटन स्थलों पर भी साहसिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में प्रयास जारी हैं। उन्होंने इस वर्ष नीति घाटी में आयोजित अल्ट्रा रन का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन को सफल बनाने में भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल के सहयोग की विशेष सराहना की। उन्होंने अधिकारियों और जवानों को सम्मानित करते हुए कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों में ऐसे आयोजनों को सफल बनाने में सुरक्षा बलों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 ने जहां साहसिक खेलों के प्रति बढ़ते आकर्षण को सामने रखा, वहीं मुख्यमंत्री की नई घोषणा ने उत्तराखंड के सीमांत पर्यटन को एक और बड़ा अवसर दिया है। माणा पास से औली तक प्रस्तावित अल्ट्रा रन के आयोजन से हिमालयी पर्यटन को व्यापक पहचान मिलने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर दर्जा राज्यमंत्री एवं उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष अशोक सिंह नबियाल, पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, भारतीय सेना, आईटीबीपी एवं एसएसबी के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


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