वायदे निभाने के बादशाह हैं पुष्कर

0
7

लोकायुक्त बनाने की ओर बढ़ा दिये कदम
वादा हकीकत में बनाने के रास्ते पर धामी
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने जबसे सरकार की कमान संभाली है तबसे उन्होंने आवाम से किये गये हर वायदे को धरातल पर उतारने के लिए जो मास्टर स्ट्रोक खेले हैं उसी के चलते अब राज्य की जनता यह मान चुकी है कि मुख्यमंत्री वायदे निभाने के बादशाह बन चुके हैं और उन्होंने सभी एक्स मुख्यमंत्रियों के रिकार्ड तोड दिये क्योंकि उन्होंने पांच साल में आवाम से किये हर वादे पर अपनी मोहर लगा दी। उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री खुलकर बैटिंग कर रहे हैं और उन्होंने लोकायुक्त बनाने की ओर अपने कदम आगे बढा दिये हैं जिससे राज्यवासियों की नजरें मुख्यमंत्री पर टिक गई हैं कि वह लोकायुक्त बनाने के वायदे को कब धरातल पर उतारकर भ्रष्टाचारियों की नाक में नकेल डाल देंगे।
उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों सबसे अधिक चर्चा जिस मुद्दे की है, वह है लोकायुक्त का गठन। लंबे समय से राज्य में एक सशक्त और प्रभावी लोकायुक्त की मांग उठती रही है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से इस दिशा में पहल की बात सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक तंत्र तक हलचल तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह पहल उत्तराखंड में जवाबदेही और पारदर्शिता का नया अध्याय लिखेगी या फिर यह मुद्दा भी केवल राजनीतिक विमर्श तक सीमित रह जाएगा? लोकायुक्त को लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक ऐसे संस्थान के रूप में देखा जाता है, जिसका उद्देश्य सत्ता और प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए एक मजबूत व्यवस्था उपलब्ध कराना है। यदि उत्तराखंड में प्रभावी अधिकारों के साथ लोकायुक्त की व्यवस्था लागू होती है, तो शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि इस पहल पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।
प्रदेश की जनता लंबे समय से यह अपेक्षा करती रही है कि सरकारी व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी हो और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच निष्पक्ष तरीके से हो। ऐसे में लोकायुक्त का गठन केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। अब लोगों की उत्सुकता इस बात को लेकर है कि मुख्यमंत्री इस पहल को कितनी तेजी और गंभीरता से धरातल पर उतारते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख अपनाने की बात कई बार दोहराई है। यदि लोकायुक्त को पर्याप्त अधिकारों, स्वतंत्र कार्यप्रणाली और प्रभावी जांच व्यवस्था के साथ स्थापित किया जाता है, तो यह व्यवस्था शासन में पारदर्शिता और जनता के विश्वास को और मजबूत कर सकती है। दूसरी ओर, यदि यह पहल केवल घोषणा बनकर रह जाती है, तो जनता की अपेक्षाओं को झटका भी लग सकता है। उत्तराखंड की जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि परिणाम देखना चाहती है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि लोकायुक्त का मुद्दा राजनीतिक घोषणा से आगे बढ़कर वास्तव में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाता है या नहीं। फिलहाल पूरा प्रदेश इसी प्रश्न का उत्तर तलाश रहा है।

LEAVE A REPLY