कीर्तिमानों के स्वामी पुष्कर

0
5

मुखिया के रूप में सबसे लंबे समय तक कर रहे जनसेवा
ऐतिहासिक फैसलों की झड़ी लगाकर बने हर दिल अजीज
युवा सीएम ने स्थापित किए अनेक मील के पत्थर
धामी सरकार, वास्तव में है ‘जन-जन की सरकार’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकार्ड को ध्वस्त कर देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक नया रिकार्ड बनाया है। अब ऐसा कैसे हो सकता है कि एक मित्र रिकार्ड बनाए और दूसरा पीछे रह जाए। यह तो सर्वविदित है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना बड़ा भाई मानते हैं और प्रधानमंत्री भी हर मंच से यही आह्वान करते हैं कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री उनके सखा (मित्र) हैं। अपने मित्र के पद्चिन्हों का अनुसरण करते हुए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दशकों पुराने एक रिकार्ड को ध्वस्त करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत एनडी तिवारी के मुखिया के तौर पर सबसे ज्यादा समय तक लगातार शासन करने के रिकार्ड को पुष्कर सिंह धामी ने पीछे छोड़ा। उत्तराखण्ड राज्य, जिसका इतिहास रहा है कि यहां मुख्यमंत्री मौसम की तरह बदल जाते हैं, ऐसे विषम राजनीतिक वातावरण वाले राज्य में यदि कोई मुखिया मौजूदा दौर में लगातार शासन कर रहा है तो इससे यह अंदाजा साफ लगाया जा सकता है कि उस व्यक्ति का साकारात्म प्रभाव आवाम में किस तरह व्याप्त है। अपने शासन के दौरान सीएम धामी ने ऐसे कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिनकी वजह से राजनीति के जानकार उन्हें कीर्तिमानों के स्वामी की संज्ञा देने तक से गुरेज नहीं करते।
पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखण्ड के मुखिया के रूप में न सिर्फ सबसे लंबे समय तक कार्य कर रहे हैं बल्कि वे एक ऐसा प्लेटफॉर्म स्थापित करने में जुटे हुए जोकि आने वाले समय जनसेवा की परिभाषा के रूप में जाना जाएगा। उनके कार्यकाल में जनहित को लेकर जितने अहम् फैसले लिए गए हैं, वैसे फैसले इससे पूर्व शायद ही देखने को मिले हों। खबर भले ही पुरानी हो गई हो लेकिन है तो ऐतिहासिक की पुष्कर सिंह धामी के राज में ही यह हुआ कि उत्तराखण्ड देश ऐसा पहला राज्य बना जिसने की समान नागरिक संहिता को लागू किया। ऐतिहासिक फैसलों की झड़ी लगाकर हर दिल अजीज बनने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी ताजा कैबिनेट की बैठक में एक और स्वर्णकालीन निर्णय लेते हुए यह सुनिश्चित किया कि उत्तराखंड में 456 अरेबिया मदरसों को अब सरकारी अनुदान नहीं मिलेगा। राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा के सुदृढ़ीकरण और पुनर्गठन के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम और नई मान्यता नियमावली लागू करते हुए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है। वहीं एक जुलाई से यह नई व्यवस्था लागू होने के बाद पूर्ववर्ती मदरसा शिक्षा बोर्ड और इससे जुड़े पूर्व के अधिनियम निरस्त हो चुके हैं। चूंकि, मदरसा बोर्ड अस्तित्व में नहीं है, ऐसे में उसके तहत संचालित होने वाले मदरसों को अनुदान और बजट मद अप्रासंगिक हो गए थे। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट की बैठक में वित्तीय वर्ष 2027-28 से मदरसों को अनुदान संबंधी बजट मद को समाप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
उत्तराखण्ड की राजनीतिक में एक वक्त ऐसा भी आया था जब उत्तराखंड सरकार के मुख्य विपक्षी कांग्रेस के क्षत्रपों की बांछें खिल गई थी जब भाजपा हाईकमान ने पहाड़ी प्रदेश की कमान पुष्कर सिंह धामी के युवा हाथों में सौंपी थी। उस समय कांग्रेसी दिग्गज यह मानने लगे थे कि यह युवा सीएम कहां उनकी राजनीतिक चालों को समझ पाएगा। कांग्रेसी दिग्गजों का भ्रम उस समय चकनाचूर हो गया था जब पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में वर्ष 2022 में भाजपा एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। जिस युवा सीएम को कांग्रेस हल्के में ले रही थी, वास्तव में वहीं युवा उत्तराखण्ड की राजनीति का धुरंधर बनकर उनके सामने आ गया और युवा सीएम के तौर पर उसने अनेक मील के पत्थर कर दिए। यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि धामी सरकार, वास्तव में ‘जन-जन की सरकार’ है और उसके अभी तक के कार्यकाल में लिया गया हर निर्णय जनहित को ही समर्पित रहा है।

LEAVE A REPLY