सजने लगा 2027 का चुनावी रण

0
50

धामी ने जीत की बिसात पर बिछाई चौसर
कांग्रेस और उक्रांद भी चुनावी रण में उतरी
सियासी मैदान में बढ़ने लगी हलचल
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी भले ही आधिकारिक तौर पर चुनावी बिगुल नहीं बजा हो, लेकिन प्रदेश की राजनीति में इसकी आहट साफ सुनाई देने लगी है। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक सभी राजनीतिक दल जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। विकास, रोजगार, पलायन, कानून व्यवस्था, चारधाम यात्रा, निवेश और स्थानीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। आने वाले समय में प्रदेश की सियासत और अधिक गर्म होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा ने मिशन 2027 की तैयारियों को गति दे दी है। मुख्यमंत्री लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं और विकास योजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच पहुंच रहे हैं। भाजपा संगठन भी बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटा हुआ है। पार्टी का दावा है कि धामी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लेकर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा देने का काम किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि समान नागरिक संहिता लागू करने की पहल, नकल विरोधी सख्त कानून, भू-कानून को मजबूत करने के प्रयास, निवेश को बढ़ावा देने की नीति, महिलाओं और युवाओं के लिए संचालित योजनाएं तथा बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दे आगामी चुनाव में पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। मुख्यमंत्री धामी स्वयं कई मंचों से यह दावा कर चुके हैं कि वर्ष 2027 में भाजपा पहले से अधिक बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इसी को लेकर पार्टी जनता के बीच जाकर भाजपा सरकार की नीतियों को चुनौती देने की तैयारी में है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के दौरे और जनसभाओं का सिलसिला भी लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश की राजनीति में इस बार उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) भी अपनी मौजूदगी को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। राज्य आंदोलन की भावना और क्षेत्रीय अस्मिता को मुद्दा बनाकर उक्रांद जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटा है। पार्टी नेताओं का दावा है कि राष्ट्रीय दलों के बीच क्षेत्रीय मुद्दे लगातार उपेक्षित होते रहे हैं और उक्रांद इन्हीं मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उक्रांद कुछ क्षेत्रों में प्रभावी प्रदर्शन करता है तो कई सीटों पर मुकाबला रोचक और त्रिकोणीय हो सकता है।
चुनाव नजदीक आने के साथ-साथ भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने बड़े नेताओं की रैलियों और जनसभाओं की तैयारियों में जुट गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेता उत्तराखंड का दौरा कर सकते हैं। राजनीतिक दलों ने संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन और जनसंपर्क अभियान को भी तेज करना शुरू कर दिया है। प्रदेश में राजनीतिक चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता को लेकर भी लगातार बहस जारी है। भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक जहां धामी सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच प्रमुखता से रख रहे हैं, वहीं विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है। इसके बावजूद भाजपा खेमे में पूरा विश्वास दिखाई दे रहा है कि धामी के नेतृत्व में पार्टी एक बार फिर सत्ता हासिल करेगी।
फिलहाल उत्तराखंड की जनता भी राजनीतिक घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। गांव से लेकर शहर तक चुनावी चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथ में है। इतना जरूर है कि वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तराखंड की राजनीति का अब तक का सबसे दिलचस्प और प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबला साबित हो सकता है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है और प्रदेश में चुनावी रण की दस्तक अब साफ सुनाई देने लगी है।

LEAVE A REPLY