पुष्करः राजनीति के धुरंधर

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मिशन-2027 फतह करेगी धामी कैबिनेट
सीएम के चमत्कारी दांव से विरोधी हुई पस्त
प्रमुख संवाददाता
उत्तराखण्ड के राजनीतिक गलियारों में उस समय एक खलबली सी देखने को मिली थी जब धामी सरकार ने कैबिनेट का विस्तार करते हुए पांच विधायकों को मंत्री पद से नवाजा। क्षेत्रीय, जातीय और अनुभव का एक ऐसा त्रिकोण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनाया, जिसको लेकर उनकी राजनीतिक कुशलता के चर्चें आम हो चलें। विपक्षी दल कांग्रेस भले ही उन्हें कम अनुभवी समझने की भूल कर रही हो लेकिन पुष्कर ने यह साबित कर दिया है कि वह उत्तराखण्ड की राजनीति के धुरंधर हैं। कांग्रेस भले ही आरोप लगा रही हो कि जिन राजनेताओं ने कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में अपना विश्वास दिखाया था, धामी सरकार ने उनको ही मंत्रीमंडल में तरजीह दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस खेल को भी शायद कांग्रेस समझ नहीं पाई है कि धामी कांग्रेस के पासों से ही उसे पटखनी देने का खाका तैयार कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट विस्तार से यह भी संदेश दे दिया है कि उनकी यहीं कैबिनेट मिशन-2027 को फतह करेगी। धामी के इस चमत्कारी दांव से उनके विरोधी पस्त ही नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रदेश में काम संभाले हुए 23 मार्च 2026 यानी आज से ठीक चार दिन बाद चार साल पूरे हो जाएंगे, लेकिन इन चार सालों के दौरान श्धाकड़ धामीश् के नाम से जाने जाने वाले सीएम धामी के सामने उनके अपनों ने ही जहां कई कील-कांटे बिछाने से बाज नहीं आए, वहीं धाकड़ ने भी इन कील-कांटों को बिना लाग लपेट बड़े प्यार से वैसे ही अपने काम के दम से हटाया। इतना ही नहीं, इन चार सालों के दौरान जिस तरह से सीएम धामी ने राज्य में विकास की जो गंगा बहाई, चाहे विरोधी हों या उनके अपने, सभी उनके काम के कायल हैं। इसके अलावा प्रदेश में काफी समय से जारी उन कयासों को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नेस्तनाबूद कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि अब गए…तब गए। धामी ने अपनी कार्यशैली और जनता की पसंद के आगे इन सभी कयासों को एक सिरे से झुठलाते हुए हुए बस और बस… प्रदेश के कामों के लिए एक किए हुए हैं। वैसे ये अतिशयोक्ति भी नहीं है, फिर भी इसको चाहे पक्ष हो या विपक्ष किस रूप में ले, लेकिन ये सौ फीसदी सत्य है कि फिलहाल धामी को चुनौती देने की ताकत किसी में नहीं है। चाहे उनका संगठन हो या विपक्ष की वह धार जिसको सीएम धामी लगातार कुंद ही करते जा रहे हैं। आप भले ही ये कहें कि उन पर केंद्रीय सत्ता का बरदहस्त हासिल है, लेकिन ऐसा भी नहीं है। प्रदेश में धामी सरकार द्वारा किए गए काम ही उनकी कसौटी हैं और चाहे उनकी सरकार के उनके मातहत मंत्री हों या खुद वो, अभी तक हर कसौटी पर जहां खरे उतरे हैं, वहीं सभी की पसंद भी बने हुए हैं।
आगामी माह में उत्तराखंड की सबसे चुनौतीपूर्ण चारधाम यात्रा शुरू होने वाली है, इसके अलावा अन्य पर्व भी हैं, लेकिन सरकार के मुखिया यानी सीएम धामी जिस प्रकार से काम कर रहे हैं, मातहतों को अभी से यात्रा की तैयारियों के लिए मैदान में उतार दिया है, उससे पूरे प्रदेश को यकीन हो चला है कि यात्रा भी निर्विघ्न संपन्न हो जाएगी। वैसे इसके पूर्व धामी सरकार ने जिस तन्मयता से पूरा किया, इससे यही आभास हो रहा कि हाल फिलहाल आगामी चुनौती को भी सीएम धामी हंसते हुए पार पा लेंगे। वैसे देखा जाए तो सीएम धामी को समय-समय पर चुनौती भी देने का काम कुछ राजनीतिक तत्वों द्वारा किया जाता रहा है और आज भी ये तत्व अपने कारनामे से भले ही धामी सरकार को असहज करने का काम क्षणिक करें, लेकिन कुछ दिनों बाद ही ये पानी का बुलबुला भी फूट जाता है और सीएम धामी उसी रफ्तार से अपने काम को अंजाम देते हैं, जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो, जबकि कुछ देर के लिए भले ही धामी सरकार असहजता महसूस करे, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से सहज रूप में इन कारनामों को लेते हुए उसी रफ्तार से अपने काम को अंजाम देने में जुट जाते हैं।
वैसे देखा जाए तो कुछ संगठन में घुसे तत्व भी मुख्यमंत्री धामी को असहज महसूस करने से बाज नहीं आते और किसी न किसी रूप में उनको नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसी कोई बात कह ही देते हैं, जिससे सरकार की किरकिरी होती है, लेकिन इस किरकिरी के पीछे भी उनका निजी स्वार्थ और सत्ता की भूख ही होती है। इस भूख के लिए वो कोई न कोई कारनामा कर ही देते हैं। हां! ये भी सत्य है कि कहीं न कहीं ये लोग सीएम धामी को ही नीचा दिखाने का काम नहीं करते, बल्कि संगठन की भी किरकिरी कराते हैं। धामी सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए हर उस मील के पत्थर को आसानी से पार किया है, जो उसके सामने आए हैं। ये सीएम धामी की काबिलियत ही नहीं, बल्कि उनकी दूरदर्शी राजनीति क्षवि का भी कमाल है। सभी की आकांक्षाओं को पूरा करने वाले धामी अब एक और मोर्चे पर फतह की तैयारी में जुट गए हैं यानी बहुत दिनों से बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार एवं दायित्व वितरण। भाजपा विधायकों को मंत्रिमंडल में और 20 से ज्यादा सक्रिय कार्यकर्ताओं को दायित्व देकर उनकी इच्छाओं को जल्द पूरी करने वाले हैं। सीएम धामी ने 20 दायित्वधारियों की सूची बना ली है। हाईकमान से हरी झंडी मिलते ही करीब 15 दिन के भीतर ये दोनों कार्य होने तय माने जा रहे हैं। इसके अलावा धामी सरकार एवं भाजपा संगठन दोनों ही इस वक्त 2027 के प्रस्तावित विधानसभा के चुनावी मोड में आ चुके हैं।
धामी सरकार 23 मार्च को चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही सरकार की चार वर्ष की उपलब्धियों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सात मार्च को उत्तराखंड के हरिद्वार से कहा जाए तो चुनावी शंखनाद भी कर चुके हैं। अब 21 मार्च को हल्द्वानी में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी धामी सरकार के चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के उपलक्ष्य में सभा को संबोधित करेंगे। अगले वर्ष विस चुनाव होने हैं। प्रदेश में राजनीतिक और सरकार के स्थायित्व के संदेश के क्रम में पार्टी अपने विधायकों एवं कार्यकर्ताओं का भी मनोबल बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मंत्रिमंडल के विस्तार और दायित्व वितरण से पार्टी का मनोबल बढ़ाने के साथ ही धामी सरकार के कामकाज का संदेश भी देना है। धामी से विधायकों का मिलना भी शुरू धामी मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। इसी का नतीजा है कि सीएम धामी से इन दोनों विधायकों का मिलने का क्रम भी बहुत तेजी से चल पड़ा है। धामी मंत्रिमंडल में वर्तमान में पांच सीट रिक्त हैं। कुल 12 में से मंत्रिमंडल की सात सीट भरी हैं। अगले विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पर सहमति भी बनने की बात कही जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्य सभा सदस्य महेंद्र भट्ट और सीएम धामी इस संबंध में पहले भी संकेत दे चुके हैं। हिंदू नववर्ष के अवसर पर दायित्व वितरण और मंत्रिमंडल विस्तार आकार ले सकता है, लेकिन फिलवक्त हाईकमान की हरी झंडी का इंतजार है।गौरतलब हो वर्ष की शुरुआत में कुछ दायित्व बांटे थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में दायित्व बांटने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसके बाद धाकड़ धामी की रफ्तार और तेज होने के साथ उनकी पकड़ सरकार के साथ साथ संगठन में भी हो जाएगी।

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