कुर्सी पाने को समझौता नहीं करते ईमानदार अफसर!

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देहरादून। उत्तराखण्ड का गठन जबसे हुआ है तबसे देखने में आ रहा है कि काफी अफसर सरकार की चौखट पर जाकर कुछ राजनेताओं की चरण वंदना करते रहे हैं और उन्होंने पद पाने के लिए जिस तरह से अपने आपको गुलामियत के रूप में आगे किया उसका दृश्य वर्षों से राज्य की जनता देखती आ रही है। उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ ईमानदार अफसर ऐसे भी हैं जिन्होंने मलाईदार पद पाने के लिए कभी भी किसी राजनेता की चौखट पर जाकर उनकी चरण वंदना नहीं की और वह सत्य के साथ काम करने की ही प्रतिज्ञा मन में लेकर आगे बढते हुए नजर आये लेकिन अधिकांश सरकारों के कार्यकाल में कुछ भ्रष्ट अफसरों ने ईमानदारी से काम कर रहे कुछ अफसरों को अपनी रडार पर लेने के लिए साजिशों का वो खेल खेला जिसको खेलते हुए उन्होंने चंद ईमानदार अफसरों को उनके पदों से हटवाने में सफलता का जो खेल खेला उसके चलते राज्य के अन्दर काफी ईमानदार अफसरों ने अपने आपको खामोशी के दौर में लाकर खडा कर दिया? उत्तराखण्ड में आज भी कुछ अफसर ऐसे हैं जो कुर्सी पाने के लिए कोई समझौता राजनेताओं के साथ करने को तैयार नहीं है और इसी के चलते वह आवाम की आंखों के तारे बने हुये हैं चाहे वह महत्वपूर्ण पद पर नहीं है लेकिन फिर भी वह सिस्टम के अन्दर हीरो की तरह आवाम को दिखाई दे रहे हैं।
उत्तराखण्ड का जन्म हुये पच्चीस साल हो गये और इन बाइस सालों में राज्य की जनता ने जहां कई बडे-बडे भ्रष्ट अफसरों का भ्रष्टाचार देखा तो वहीं उन्होंने कुछ ईमानदार अफसरों के चेहरे देखकर उन्हें हमेशा सैल्यूट किया और मन में यही इच्छा पाली कि अगर राज्य के अन्दर कुछ ईमानदार अफसर मौजूद हैं तो ही उन्हें कोई गम नहीं है कि राज्य में अगर काफी अफसर भ्रष्टाचारी बनकर राज्य की जनता का शोषण कर रहे हैं।
उत्तराखण्ड एक छोटा राज्य है और यहां काफी प्रशासनिक और पुलिस अफसरों को कुछ राजनेताओं की चौखट पर सजदे करते हुए देखा गया कि वह किस तरह से मलाईदार पद पाने के लिए अपनी गरिमा को तार-तार कर रहे हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ ईमानदार अफसरों की वजह से राज्यवासी अपने आपको सुरक्षित महसूस करते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का इल्म रहता है कि कुछ ईमानदार अफसर मलाईदार पद पाने के लिए समझौते नहीं किया करते क्योंकि उनके मन में एक ही ललक दिखाई देती है कि उन्होंने जिस उद्देश्य से सरकारी नौकरी में अफसर बनने के लिए अपने कदम आगे बढाये हैं वह किसी मलाईदार पद पाने के लिए किसी राजनेता के दरवाजे पर दस्तक देने के लिए नहीं जायेंगे। उत्तराखण्ड में कुछ अफसर ईमानदारी के जुनून में दिखाई देते आ रहे हैं कि वह सही को सही और गलत को गलत कहने से पीछे नहीं हटते चाहे उसके लिए उन्हें अपने पद से क्यों न हटना पडा हो। राज्य के अन्दर कई आईएएस, पीसीएस, आईपीएस, पीपीएस अफसर ऐसे देखने को मिले जिन्होंने भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों से नफरत की और उन्हें भ्रष्टाचार का दानव इतना क्रोधित करता है कि उसे देखकर उत्तराखण्डवासियों को यह सकून मिलता है कि राज्य में अगर भ्रष्ट अफसरों की कुछ फौज खडी है तो ईमानदार अफसरों की भी राज्य के अन्दर कमी नहीं है। उत्तराखण्ड के अन्दर एक आईपीएस अफसर ऐसे भी है जिन्हें भ्रष्टाचार से लडने का हमेशा एक जुनून रहता है और यही कारण है कि राज्य के काफी बडे अफसर और चंद आईपीएस अफसर उनकी ईमानदारी से अपने आपको राज्य में असुरक्षित समझते हैं लेकिन इस आईपीएस अफसर को राज्य की जनता से लेकर उन्हें नजदीक से पहचानने वाले अफसर यह कहते भी नहीं थकते कि यह अफसर उत्तराखण्ड की शान है और उन्होंने कभी भी पद के लिए किसी भी राजनेता या अफसर के यहां परिक्रमा नहीं की। उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के लिए राज्य के अन्दर काफी ईमानदार अफसरों की मौजूदगी है और उन्हें अफसरों की बदौलत राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के संकल्प पर आगे बढ रहे हैं लेकिन कुछ भ्रष्ट अफसरों की आंखों में ऐसे चंद ईमानदार अफसर हमेशा उनकी आंखों की किरकिरी बने रहते हैं यह भी एक सत्य है?

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