प्राकृतिक आपदा को संभालने में सक्षम हैं युवा सीएम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में आई आपदाओं के बाद वहां जो तांडव मचा उससे हर तरफ त्राहिमान का शोर मचा और मुख्यमंत्री ने आपदा पीडितों का दर्द हरने के लिए उनका हमदर्द बनकर उन्हें गले से लगाकर यह विश्वास दिला दिया था कि इस आपदा की धडी में वह अकेले नहीं है। मुख्यमंत्री ने आपदा पीडितों को तत्काल आर्थिक सहायता देकर उनके आसू पोछे तो वहीं देश के प्रधानमंत्री भी अपने सखा को इस संकट से उभारने के लिए आगे आये और उन्होंने उत्तराखण्ड में आई इस आपदा को लेकर उत्तराखण्ड की झोली में बारह सौ करोड रूपये की आर्थिक सहायता देकर यह साबित कर दिया कि डबल इंजन सरकार हर संकटकाल में राज्यवासियों के साथ खडी है। मुख्यमंत्री ने अपनी देखरेख में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर आपदा पीडितों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया तो उन्हें आपदा में चलाये गये रेस्क्यू का हीरो मान लिया गया।
उत्तराखण्ड के आधा दर्जन से अधिक जनपदों में जब कुछ समय पूर्व दैवीय आपदा आई तो उसके बाद कुछ जिलों में बडी तबाही मची और उसे देखकर मुख्यमंत्री आपदाग्रस्त इलाकों में खुद मोर्चा संभालने के लिए पहुंचे और उन्होंने जिस तरह से आपदा के इस दौर में आपदा पीडितों का दर्द हरने के लिए उनका हमदर्द बनने का जो जज्बा दिखाया उससे वह राज्यवासियों की आंखों के तारे बन गये। उत्तराखण्ड में आने वाली हर आपदा के बाद मुख्यमंत्री का मोर्चे पर डटे रहना राज्यवासियों को खूब रास आ रहा है और वह यह कहने से नहीं चूक रहे कि मुख्यमंत्री दबंग और निडर के साथ-साथ आवाम के रक्षक भी हैं जो हर संकट में उनके साथ खडे रहते हैं। मुख्यमंत्री ने आपदाग्रस्त इलाकों में एक बडा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर जिस तरह वहां सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमों को बचाव व राहत कार्य के लिए आगे रखा उससे यह साफ हो गया कि वह आपदा से लडने के लिए हमेशा अगली पक्ति में खडे हो जाते हैं इसलिए उन्हें रेस्क्यू ऑपरेशन का हीरो भी कहा जाने लगा है।
गौरतलब है कि चमोली के माणा मंे अचानक एक बडा ग्लेशियर टूटने से बीआरओ के लगभग 54 श्रमिक उसमें दबे तो सरकार के मुखिया के सामने उन्हें बचाना एक बडी चुनौती बना था। मुख्यमंत्री ने अचानक आई इस भयंकर आपदा से टकराने के लिए खुद मोर्चा संभाला और वह दबंगता के साथ खुद सडक से लेकर आकाश तक का रास्ता तय करते हुए बर्फ मे दबे एक-एक श्रमिक को बचाने के मोर्चे पर अभेद बनकर खडे हो गये थे। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलता के साथ चलाने के लिए रात-दिन एक किया और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के मिले अभेद साथ के कारण श्रमिकों को बर्फ से खोज निकालने का जो जज्बा दिखाया उससे वह एक बार फिर उत्तराखण्ड से लेकर देशभर मे एक साहसिक मुख्यमंत्री के रूप में अपनी बडी पहचान बना गये थे। ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन के सूत्रधार बने मुख्यमंत्री ने सेना और ऑपरेशन मे लगी सभी ऐजेंसियों से सीधा तालमेल बिठाकर जल्द से जल्द इस रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाने का संदेश दिया था और मात्र चंद दिन के भीतर ही बर्फ मे दबे 46 श्रमिकों को मौत के मुंह से बचा लिया जबकि आठ श्रमिक बर्फ मे दबने से अधिक घायल होने के कारण मौत की नींद सो गये। माणा के बर्फ से ढके पहाडों मंे जब ग्लेशियर टूटा तो वहां की बर्फबारी देखकर यह आशंका बनी रही कि इतनी बर्फ में सफलता के साथ कैसे रेस्क्यू ऑपरेशन चल पायेगा लेकिन प्राकृतिक आपदा को संभालने में सक्षम दिखने वाले मुख्यमंत्री ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को जिस सफलता के साथ चलाकर 46 श्रमिकों के जीवन की रक्षा की उससे श्रमिकों के परिवार मुख्यमंत्री और बचाव मे लगी सेना को दिल से शुक्रिया कहने के लिए आगे आई।
उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि जब-जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में बडी से बडी आपदायें आई तो उनसे टकराने के लिए खुद मुख्यमंत्री ने मोर्चा संभाला और जब तक रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलता नहीं मिली तब तक मुख्यमंत्री मोर्चे पर ही अपने अफसरों के साथ डटे रहे थे यह देश की जनता खुद देख चुकी है। हरिद्वार मे जब बारिश से कुछ इलाके और गांव जलमग्न हुये और वहां रहने वालों के सामने प्राणों का संकट गहराया तो मुख्यमंत्री ने खुद मोर्चा संभाला था और वह नाव से लेकर ट्रैक्टर मे सवार होकर इस आपदा से लडने के लिए खुद आगे आये थे और उनके इस साहस ने उनको दबंग मुख्यमंत्री होने का तमका मिला था। चमोली के जोशीमठ मे जब दिल दहला देने वाली दरारें वहां की जनता को सड़कों और अपने घरों पर दिखाई दी थी तो उनकी दिन-रात की नींद उड गई थी लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठवासियों के सामने आई इस बडी आपदा से टकराने के लिए खुद मोर्चा संभाला था और वह जोशीमठ में हर उस इलाके मे पैदल गये जहां दरारों का जाल वहां के लोगों को पल-पल डरा रहा था। बता दें कि राज्य में आने वाली आपदा के बाद चलाये जाने वाले ऐतिहासिक रेस्क्यू के सूत्रधार एक बार फिर मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी बने और यह बात भी शीशे की तरह साफ हो गई कि प्राकृतिक आपदा को संभालने मे युवा मुख्यमंत्री सक्षम हैं।

