भूमि घोटाले पर सीएम के एक्शन का इंतजार!

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एफआईआर हुई तो मास्टर माईंड भी होगा बेनकाब?
एक्शन में तबादला नहीं बडी कार्यवाही चाहता है आवाम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून/हरिद्वार। नगर निगम में करोडो के जमीन घोटाले की जांच का पहला सच सामने आने पर जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी और उसमें चंद बडे अफसरों की भूमिका को लेकर जिस तरह से साफ लिखा गया है उसके बाद से तो उत्तराखण्ड की अफसरशाही में एक बडी खलबली मची हुई है। सवाल तैर रहे हैं कि आखिरकार इस जांच रिपोर्ट के आने के कुछ दिन बाद भी अभी तक आखिर एक्शन क्यों दिखाई नहीं दे रहा? सवाल पनप रहे हैं कि भूमि घोटाले में सरकार कब तक दोषियों पर कार्यवाही करने के लिए आगे आयेगी? वहीं यह बहस भी चल रही है कि इस सनसनीखेज भूमि घोटाले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जायेगी जिससे कि यह साफ हो सके कि इस घोटाले मे किस-किस छोटे से लेकर बडे अफसर ने भ्रष्टाचार करने का खेल खेला था? अब सबकी नजरें भूमि घोटाले में सीएम के एक्शन का इंतजार कर रही है और वह इस घोटाले में दोषी अफसरों के तबादले नहीं बल्कि उनके खिलाफ बडी कार्यवाही देखना चाहती है जिससे कि उत्तराखण्ड के अन्दर कभी कोई भी अफसर भ्रष्टाचार या घोटाला करने का खेल न खेल सके? वहीं इस घोटाले को लेकर यह सवाल भी अब जन्म ले रहे हैं कि घोटाले का सच बाहर लाने के लिए सरकार को इस मामले मे एफआईआर करानी चाहिए जिससे कि इस बात से भी पर्दा उठ सके कि आखिरकार घोटाले को अंजाम तक पहुंचाने वाला मास्टर माईंड आखिर कौन है?
हरिद्वार नगर निगम के करोड़ों के जमीन घोटाले की हाई प्रोफाइल जांच पूरी हो चुकी है और आईएएस रणवीर सिंह चौहान ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भी कुछ दिन पूर्व सौंप दी थी। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद सबकी नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के त्रिकोण के इस घोटाले के दोषियों के खिलाफ धामी सरकार क्या एक्शन लेती है ? बता दें कि शहरी विकास सचिव नितेश झा को सौंपी गयी रिपोर्ट में तीन बड़े अधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। जांच में यह साफ हो गया कि लगभग ३३ बीघा भूमि के लैंड यूज व खरीद में तय नियमों व शर्तों का पालन नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट में हरिद्वार के डीएम कर्मेन्द्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी व एसडीएम अजयवीर सिंह को दोषी करार दिया गया है। जांच रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों के खिलाफ यथोचित एक्शन लेने की बात कही गयी है। मौजूदा समय में आईएएस वरुण चौधरी सचिवालय में अपर सचिव स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि हरिद्वार नगर निगम ने कुछ करोड़ की कृषि भूमि का लैंड यूज २० दिन के अंदर कर दिया। कूड़े के ढेर के समीप स्थित इस कृषि भूमि का कामर्शियल भू उपयोग में तब्दील होने पर जमीन की कीमत के दाम उछलकर ५५ करोड़ तक पहुंच गए। इसके बाद अधिकारियों की मिलीभगत के बाद यह जमीन ऊंचे दामों पर खरीद ली गयी। जांच रिपोर्ट में जमीन खरीद के औचित्य पर गहरे सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा भू उपयोग परिवर्तन से सरकारी खजाने में लगी करोड़ों की चपत को भी गम्भीर प्रशासनिक लापरवाही मुद्दा माना गया। जांच रिपोर्ट के बाद गेंद शासन के पाले में है और उससे लगातार सवाल खडे हो रहे हैं कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ सम्बंधित कार्मिक विभाग ही कोई एक्शन लेगा? गौरतलब है कि एक मई को हरिद्वार नगर निगम द्वारा बाजार भाव से अधिक दर पर भूमि खरीदे जाने के प्रकरण में प्रथम द्रष्टया दोषी पाए गए चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था जबकि एक अन्य अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर नगर निगम हरिद्वार द्वारा सराय गांव में भूमि खरीद मामले में यह सख्त कार्रवाई की गई थी।
इस घोटाले की जांच इस घोटाले की जांच रिपोट तीन दिन पहले शासन को मिल चुकी है और अभी तक सबकी नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि आखिरकार सरकार के मुखिया कब इस घोटाले मे दोषी अधिकारियों पर अपना एक्शन लेंगे? वहीं उत्तराखण्ड के अन्दर यह भी बहस चल रही है कि अगर इस घोटाले का सारा सच बाहर लाना है तो उसके लिए पहले सरकार को इस घोटाले मे एफआईआर दर्ज करानी चाहिए जिससे कि वो मास्टर माईंड भी बेनकाब हो सके जिसने शायद इस घोटाले की सारी व्यूह रचना नाटकीय ढंग से की थी?

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